15 लाख के सीसी चेक डैम में ‘खेल’ का आरोप, भरमिला में भ्रष्टाचार की गूंज,जांच की मांग तेज
मशीन से निर्माण, कम सामग्री उपयोग और भुगतान की तैयारी पर सवाल; सचिव, उपयंत्री और एसडीओ की भूमिका भी कटघरे में(जय प्रकाश शर्मा)
मानपुर। जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कठार के भरमिला में निर्मित सीसी चेक डैम अब गंभीर आरोपों के घेरे में है। कुशाहार नाला में राम कमल पटेल के खेत के पास बनाए गए इस निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक, सीसी चेक डैम निर्माण कार्य को स्वीकृति क्रमांक 1740001/2023/2024 एवं W.C.1740001058/2201/2035060067 के तहत लगभग 14 लाख 98 हजार 577 रुपए की लागत से मंजूरी दी गई थी। 29 मई 2023 को स्वीकृत इस कार्य में सामग्री मद के लिए लगभग 12 लाख 91 हजार 168 रुपए तथा श्रम मद का भी प्रावधान किया गया था।
जमीन पर कुछ और, कागजों में कुछ और!
ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर वास्तविकता कुछ और ही बयां कर रही है। दावा किया जा रहा है कि निर्माण में महज 2.5 से 3 लाख रुपए तक की सामग्री का उपयोग किया गया, जबकि शेष राशि निकालने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किस आधार पर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है?

श्रम प्रधान कार्य में मशीनों का खेल
इस कार्य में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जहां मजदूरों से काम कराया जाना था, वहां मशीनों का उपयोग किया गया। पंचायत और मनरेगा जैसे कार्यों में श्रमिकों को रोजगार देना प्राथमिक उद्देश्य होता है, लेकिन यहां इस मूल उद्देश्य को ही दरकिनार कर दिया गया।
सचिव, उपयंत्री और एसडीओ की भूमिका संदिग्ध
यह मामला अब केवल निर्माण एजेंसी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ग्राम पंचायत सचिव, संबंधित उपयंत्री और एसडीओ की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि क्या बिना तकनीकी मूल्यांकन के ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, क्या मापन पुस्तिका में वास्तविक कार्य का सही-सही उल्लेख किया गया है, और क्या निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक परीक्षण एवं साइट निरीक्षण किया गया। यदि इन सभी बिंदुओं पर पारदर्शिता नहीं बरती गई है, तो यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही ही नहीं बल्कि संभावित मिलीभगत की ओर भी संकेत करती है।
अधिकारी बोले-अभी मूल्यांकन नहीं
जब इस संबंध में उपयंत्री प्रदीप उद्यम से चर्चा की गई, तो उन्होंने बताया कि वे वर्तमान में अवकाश पर हैं और अभी कार्य का मूल्यांकन नहीं हुआ है। यह जवाब खुद कई नए सवाल खड़े करता है कि बिना मूल्यांकन के भुगतान की चर्चा कैसे शुरू हो गई?
नियमों की अनदेखी या सुनियोजित खेल?
सरकारी निर्माण कार्यों में स्पष्ट प्रावधान हैं कि कार्य स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार हो, श्रम और सामग्री का अनुपात बना रहे, गुणवत्ता परीक्षण हो और मापन पुस्तिका के आधार पर ही भुगतान किया जाए। लेकिन भरमिला के इस मामले में इन सभी नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आ रहे हैं।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने उमरिया कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।