“छेक लाल यादव का ‘छेक’ सिस्टम: शहडोल में रेत का काला कारोबार बेखौफ जारी”
सुधीर यादव @ 9407070722
शहडोल।जिले में इन दिनों रेत के अवैध उत्खनन का कारोबार अपने चरम पर पहुंच चुका है। खासकर पिपरिया, नरवार, बिजौरी, पटासी और सोन टोला जैसे क्षेत्रों में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए रेत का खनन किया जा रहा है। इस पूरे खेल के केंद्र में “छेक लाल यादव ” नामक व्यक्ति का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है, जिसने कथित तौर पर पूरे क्षेत्र में रेत के काले कारोबार पर अपना ‘छेक’ जमा रखा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन इलाकों में दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से नदियों और घाटों से रेत निकाली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही नजर आती है।
अवैध उत्खनन के कारण क्षेत्र की नदियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। गहराई बढ़ने से जलस्तर प्रभावित हो रहा है, वहीं किनारों पर कटाव बढ़ने से आस-पास के गांवों के लिए खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह खनन जारी रहा तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर हो सकता है।
बिना किसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के इस तरह का उत्खनन पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ देता है और जैव विविधता पर भी नकारात्मक असर डालता है।
रात के अंधेरे में दौड़ते वाहन, प्रशासन बेखबर?
ग्रामीणों का आरोप है कि जैसे ही शाम ढलती है, रेत से भरे ट्रैक्टर और हाइवा सड़कों पर फर्राटा भरने लगते हैं। कई बार ओवरलोडिंग के कारण हादसों की आशंका भी बनी रहती है। इसके बावजूद संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है।
लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन चाहे तो इस अवैध कारोबार पर तुरंत रोक लगाई जा सकती है, लेकिन कथित मिलीभगत के चलते यह खेल लगातार जारी है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
रेत माफिया के इस नेटवर्क को लेकर आम जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले से अनजान हैं या जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं?