हर 15 दिन में खून से चलती जिंदगी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए ब्लड हीरो बने युवा
हर 15 दिन में खून से चलती जिंदगी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए ब्लड हीरो बने युवा
कटनी।। खेलने-कूदने की उम्र में जब बच्चों के हाथों में खिलौने होने चाहिए, तब कई मासूम अस्पताल के बेड पर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। थैलेसीमिया और सिकलसेल जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित इन बच्चों की सांसें हर 15 से 20 दिन में मिलने वाले रक्त पर टिकी होती हैं। समय पर खून न मिले तो परिवारों की चिंता बढ़ जाती है और बच्चों की हालत बिगड़ने लगती है।
ऐसे कठिन समय में कटनी ब्लड डोनर एंड वेलफेयर सोसायटी पिछले 13 वर्षों से इन बच्चों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद की सबसे मजबूत कड़ी बनी हुई है। विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर संस्था के उन युवाओं की सेवा भावना सामने आई, जो एक फोन कॉल या मैसेज मिलते ही अस्पताल पहुंचकर रक्तदान करते हैं।
संस्था से जुड़े युवा रक्तदाताओं को लोग अब ब्लड हीरो कहने लगे हैं। इनमें कॉलेज छात्र, नौकरीपेशा युवक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं, जो जरूरत पड़ते ही अपना काम छोड़कर मरीजों की मदद के लिए पहुंच जाते हैं।
एक थैलेसीमिया पीड़ित 8 वर्षीय बच्चे के पिता ने बताया कि उनके बेटे को हर 15 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है। कई बार ब्लड बैंक में जरूरी ग्रुप का रक्त उपलब्ध नहीं होता, लेकिन संस्था के ग्रुप में संदेश डालते ही कुछ ही समय में रक्तदाता अस्पताल पहुंच जाते हैं। उन्होंने बताया कि एक बार देर रात बेटे की हालत अचानक बिगड़ गई थी और तत्काल रक्त की जरूरत थी। परिवार घबराया हुआ था, लेकिन संस्था के युवाओं ने रात में ही रक्त उपलब्ध कराकर बच्चे की जान बचा ली।
कटनी ब्लड डोनर एंड वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष टीनू सचदेवा ने बताया कि वर्तमान में करीब 75 बच्चों को नियमित रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए हर महीने लगभग 100 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। संस्था से जुड़े करीब एक हजार युवा नियमित रक्तदाता के रूप में सक्रिय हैं और कई सदस्य अब तक दर्जनों बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि दुर्लभ ब्लड ग्रुप वाले मरीजों के लिए सबसे ज्यादा चुनौती सामने आती है। कई बार दीमरखेड़ा, विजयराघवगढ़ और बरही क्षेत्र तक संपर्क करना पड़ता है, लेकिन संस्था की कोशिश रहती है कि कोई भी बच्चा रक्त के इंतजार में परेशान न हो। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि बीमारी से लड़ना जितना कठिन नहीं, उससे ज्यादा डर हर बार रक्त मिलने के इंतजार का होता है। आर्थिक बोझ, अस्पतालों के लगातार चक्कर और बच्चों की पीड़ा परिवारों को भीतर तक तोड़ देती है। हर वर्ष 8 मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। यह दिन समाज को रक्तदान के प्रति जागरूक करने और थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की मदद के लिए आगे आने का संदेश देता है।