शहडोल मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक रार : सेवा के बजाय ‘राजनीति का अखाड़ा’ बनता जा रहा संस्थान, डीन के रवैये पर उठे सवाल

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शहडोल। संभाग का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र, बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय इन दिनों अपनी स्वास्थ्य सेवाओं से ज्यादा आंतरिक गुटबाजी और प्रशासनिक खींचतान को लेकर सुर्खियों में है। आलम यह है कि जिस संस्थान को आम जनता को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए स्थापित किया गया था, वह अब कथित तौर पर खुद कर्मचारियों को आपसी राजनीति में उलझाकर रखने का केंद्र बनता जा रहा है। लगातार आ रहे अजीबोगरीब प्रशासनिक फैसलों ने अस्पताल की व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है।

विवाद की जड़: मनमानी नियुक्तियां और अचानक हटाना

संस्थान में विवाद की शुरुआत तब हुई जब पूर्व में दो नर्सिंग स्टाफ को नियमों को दरकिनार कर मनमर्जी से महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां दी गईं। कुछ समय तक यह मामला शांत रहा, लेकिन हाल ही में १५ मई २०२६ को कार्यालयीन आदेश (क्रमांक २८५७) जारी कर प्रभारी नर्सिंग अधीक्षक श्रीमती दीपा रोहाणी कनौजिया को तत्काल प्रभाव से पद से भारमुक्त कर दिया गया। इस आदेश के बाद मेडिकल कॉलेज के भीतर सुगबुगाहट तेज हो गई है। अब यह सवाल उठ रहा है कि जब एक कर्मचारी को हटाया गया, तो दूसरे को किस आधार पर उसी ढर्रे पर कार्य करने दिया जा रहा है? सूत्रों के अनुसार, कॉलेज प्रबंधन में तीन से चार अलग-अलग धड़े सक्रिय हैं, जो अपने चहेतों को इस महत्वपूर्ण कुर्सी पर बैठाने की होड़ में लगे हैं।

कड़े फरमान से चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं

इस आंतरिक राजनीति का सबसे गंभीर असर मरीजों पर पड़ रहा है। प्रभारी नर्सिंग अधीक्षक को हटाने के बाद, आगामी रणनीति तय करने के लिए डीन कार्यालय द्वारा १८ मई २०२६ को एक और आदेश (क्रमांक ३१७०) जारी किया गया। इसमें १९ मई (मंगलवार) को दोपहर १२:०० बजे अस्पताल के लेक्चर हॉल में समस्त नर्सिंग ऑफिसर्स की ‘सामान्य बैठक’ बुलाई गई। आदेश में आपातकालीन ड्यूटी को छोड़कर सभी के लिए उपस्थिति अनिवार्य की गई थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि एक साथ पूरे नर्सिंग स्टाफ को प्रशासनिक बैठक में बुलाने से अस्पताल की सामान्य वार्ड सेवाओं पर विपरीत असर पड़ा। जिस नर्सिंग स्टाफ का मूल काम मरीजों की तीमारदारी और व्यवस्था देखना है, उन्हें प्रशासनिक उलझनों में झोंक दिया गया।

डीन के ‘तानाशाही’ रवैये और अभद्रता के आरोप

विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार को आयोजित इस बैठक का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बैठक शुरू होने से पहले ही कर्मचारियों पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। जब स्टाफ उपस्थित होने लगा, तो उनसे तीखे सवाल किए जाने लगे।

हद तो तब हो गई जब चर्चा के दौरान डीन के पद पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी द्वारा मर्यादा की सीमाएं लांघने की बात सामने आई। बताया जा रहा है कि खासकर महिला नर्सिंग स्टाफ के साथ बातचीत में ‘तू-तड़ाक’ और कुछ अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जो इतने गरिमामयी पद पर बैठे व्यक्ति को शोभा नहीं देता। इस अमर्यादित व्यवहार को लेकर कुछ महिला कर्मचारी गहरे आक्रोश में आ गईं, जिसके बाद मौके पर जैसे-तैसे मामले को शांत कराया गया।

जल्द बड़ी शिकायत में तब्दील हो सकता है मामला

हालांकि, प्रशासनिक रसूख और कार्यवाही के डर से फिलहाल कोई भी कर्मचारी लिखित शिकायत देने के लिए खुलकर सामने नहीं आ रहा है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि यह खामोश तूफान की आहट है। पीड़ित कर्मचारियों ने डीन के साथ हुई इस पूरी बातचीत और विवाद का ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड कर लिया है, जो कभी भी सोशल मीडिया पर वायरल हो सकता है। संस्थान के भीतर चल रही यह चर्चा अब जोर पकड़ रही है कि डीन के इस कथित अमर्यादित आचरण और अपशब्दों के खिलाफ जल्द ही उच्च स्तर पर एक औपचारिक और बड़ी सामूहिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। कुल मिलाकर, शहडोल मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की यह आंतरिक राजनीति अब आम जनता की सेहत पर भारी पड़ने लगी है।

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