स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनीं आशा-ऊषा कार्यकर्ता सड़कों पर, मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू तीन माह से लंबित भुगतान, मानदेय वृद्धि और एरियर की मांग; बोलीं- हमारी मेहनत पर चलती हैं स्वास्थ्य योजनाएं,कलेक्ट्रेट गेट के बाहर प्रदर्शन, नारेबाजी कर सरकार से लगाई न्याय की गुहार
स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनीं आशा-ऊषा कार्यकर्ता सड़कों पर, मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू
तीन माह से लंबित भुगतान, मानदेय वृद्धि और एरियर की मांग; बोलीं- हमारी मेहनत पर चलती हैं स्वास्थ्य योजनाएं,कलेक्ट्रेट गेट के बाहर प्रदर्शन, नारेबाजी कर सरकार से लगाई न्याय की गुहार
कटनी।। जिले की आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार के बाहर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। आशा ऊषा कार्यकर्ता महिला संगठन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए शासन-प्रशासन से उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की।
संगठन की जिला अध्यक्ष सुरेखा आरख एवं पदाधिकारियों के नेतृत्व में पूर्व मे कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में तीन माह से लंबित प्रोत्साहन राशि, केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई राशि का एरियर, नियमित भुगतान, मानदेय वृद्धि सहित विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है।
धरना स्थल पर मौजूद आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे स्वास्थ्य विभाग और शासन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक टीकाकरण, प्रसूति सेवाएं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, जनजागरूकता अभियान तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रहती है। इसके बावजूद उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है, जिससे आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि तीन माह से लंबित समस्त प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान किया जाए, केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई 1500 रुपये की राशि का एरियर दिया जाए तथा प्रत्येक माह की 5 तारीख तक भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही 29 जुलाई 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा घोषित वार्षिक वृद्धि राशि का एरियर सहित भुगतान, आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं को 21 हजार रुपये मानदेय, एंड्रॉयड मोबाइल एवं डाटा सुविधा, आशा रेस्ट रूम, आशा सम्मेलन तथा दुर्घटना एवं मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सहायता जैसी मांगें भी प्रमुख रूप से रखी गई हैं।
धरना दे रही महिलाओं का कहना है कि शासन और प्रशासन की अधिकांश जनकल्याणकारी योजनाएं आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं के माध्यम से ही अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं। कोरोना काल सहित कई आपात परिस्थितियों में उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दीं, लेकिन आज भी उन्हें अपने अधिकारों और उचित पारिश्रमिक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
संगठन की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती नर्मदा ठाकरे के निर्देशन में चल रहे इस आंदोलन में कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।

आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं का कहना है कि शासन-प्रशासन को उनकी पीड़ा समझने के साथ-साथ उनकी उपयोगिता और महत्व को भी स्वीकार करना होगा। क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी व्यवस्था में आशा और ऊषा कार्यकर्ता ही वह आधार हैं, जिनके बिना सरकार की अनेक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं है। इसलिए उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान केवल कर्मचारियों के हित का विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता भी है।