सिवनी चौकी क्षेत्र में दर्दनाक सड़क हादसा: गाय से टकराकर बाइक सवार युवक की मौत, मरवाही CHC की बदहाली और 45 किमी की दूरी बनी काल
मरवाही/गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।
सिवनी चौकी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत सिवनी में एक बार फिर तेज रफ्तार और आवारा मवेशी के कारण दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। गुरुवार शाम करीब 7 बजे हुए इस हादसे में बाइक सवार एक युवक की जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मौत हो गई। मृतक की पहचान ग्राम नरौर के भूतपूर्व सरपंच नरेंद्र सिंह मरावी के सगे भाई चंद्रशेखर के रूप में हुई है। इस हादसे ने एक बार फिर क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है।
पेंड्रा की ओर से आ रहे थे घर, अचानक सामने आई गाय
मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम करीब 7:00 बजे चंद्रशेखर सिंह मरावी अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर पेंड्रा की तरफ से आ रहे थे। जैसे ही वह सिवनी ग्राम पंचायत क्षेत्र के पास पहुंचे, अंधेरा होने के कारण अचानक उनकी बाइक के सामने एक गाय आ गई। रफ्तार तेज होने के कारण बाइक अनियंत्रित होकर गाय से सीधे टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि चंद्रशेखर बाइक सहित सड़क पर दूर जा गिरे, जिससे उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।
मुस्तैद दिखी पुलिस, पर ‘रेफर सेंटर’ बने मरवाही अस्पताल ने तोड़ी उम्मीदें
घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए आपातकालीन सेवा 108 और डायल 112 को सूचना दी।
त्वरित एक्शन: सूचना मिलते ही मरवाही से आपातकालीन वाहन तुरंत मौके पर पहुंचे।
पुलिस की मौजूदगी: सिवनी चौकी के मुंशी भी दल-बल के साथ बिना वक्त गंवाए घटनास्थल पर पहुंच गए और तुरंत बचाव व राहत कार्य शुरू किया।
सिर्फ ‘रेफर सेंटर’ बना मरवाही CHC: घायल चंद्रशेखर को आनन-फानन में मरवाही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। लेकिन, करोड़ों की लागत से बने इस अस्पताल में समुचित इलाज और आपातकालीन सुविधाओं का घोर अभाव साफ देखने को मिला। गंभीर रूप से घायल मरीज को तुरंत वेंटिलेटर या न्यूरो जैसी विशेषज्ञ सुविधाओं की जरूरत थी, लेकिन मरवाही CHC केवल एक ‘रेफर सेंटर’ बनकर रह गया है। यहाँ प्राथमिक उपचार के नाम पर खानापूर्ति की गई और डॉक्टरों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मरीज को तुरंत गौरेला जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
45 किलोमीटर का सफर बना काल:
मरवाही CHC में इलाज न मिलने के कारण गंभीर रूप से घायल चंद्रशेखर को 45 किलोमीटर दूर गौरेला जिला अस्पताल के लिए ले जाना पड़ा। यदि मरवाही अस्पताल में ही सारी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होते, तो चंद्रशेखर को तुरंत इलाज मिल जाता और शायद आज उनकी जान बच जाती। मरवाही से गौरेला की यह 45 किलोमीटर की दूरी और रास्ते में बीता समय ही मरीज के लिए काल बन गया।
रास्ते में ही तोड़ा दम: मरवाही से गौरेला जिला अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही चंद्रशेखर ने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
क्षेत्र में शोक की लहर, मवेशियों और स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश
इस दुखद खबर के बाद से ग्राम नरौर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। भूतपूर्व सरपंच नरेंद्र सिंह मरावी के भाई के इस तरह अचानक निधन से स्थानीय लोग स्तब्ध हैं।
इस घटना के बाद ग्रामीणों में दोहरा आक्रोश देखा जा रहा है। एक तरफ जहाँ सड़कों पर बैठने वाले आवारा मवेशियों को लेकर लोग प्रशासन से नाराज हैं, वहीं दूसरी तरफ मरवाही CHC की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि सरकारें बुनियादी स्वास्थ्य दावों के जितने भी ढोल पीट लें, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी मरवाही के लोगों को आपातकाल में इलाज के लिए 45 किलोमीटर दूर भागना पड़ता है, जिससे लोगों की जान जा रही है।