बांधवगढ़ में बाघ ‘बजरंग’ की घेराबंदी! वायरल वीडियो ने खोली सिस्टम की पोल

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इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और झकझोर देने वाली खबर मध्य प्रदेश के उमरिया से आ रही है। क्या वन्यजीवों की सुरक्षा सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गई है? यह सवाल आज हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश के पर्यावरणविदों को हैरान कर दिया है।

जंगल का राजा… वो वनराज जिसके एक खौफ से पूरा जंगल कांपता है, आज वो खुद इंसानी लालच और लापरवाही के बीच लाचार नजर आ रहा है। बांधवगढ़ के सबसे मशहूर नर बाघ ‘बजरंग’ की कुछ लोगों ने मिलकर ऐसी घेराबंदी की, जिसने नियमों की धज्जियां उड़ा कर रख दीं।

(अब एंकर थोड़ा तिरछा होकर पीछे लगी बड़ी स्क्रीन की तरफ हाथ से इशारा करते हुए मुड़ेगा)

जरा मेरे पीछे इस स्क्रीन पर चल रही इन तस्वीरों और वीडियो को देखिए… (एंकर स्क्रीन की तरफ मुड़कर इशारा करे)

यह कोई आम सफारी नहीं है, यह सीधे-सीधे वन्यजीवों के अधिकारों का हनन है! आप साफ देख सकते हैं कि किस तरह इस विशालकाय बाघ ‘बजरंग’ को चारों तरफ से गाड़ियों ने घेर रखा है। एक तरफ लोहे की फेंसिंग है, और बाकी के रास्तों को इन शासकीय और निजी जिप्सियों ने पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है।

(वापस कैमरे की तरफ देखते हुए, तीखे अंदाज में)

बाघ गाड़ियों से महज कुछ ही फीट की दूरी पर है। वह परेशान है, विचलित है और बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहा है। लेकिन गाड़ियों में बैठे इन पर्यटकों को देखिए… इन्हें बाघ की सुरक्षा या अपनी जान की कोई परवाह नहीं है। मोबाइल फोन चमकाए जा रहे हैं, रील्स बनाई जा रही हैं और कैमरे की फ्लैशलाइट से उस बेजुबान को और ज्यादा तनाव में धकेला जा रहा है।

(फिर से स्क्रीन पर आ रहे नए विजुअल की तरफ हाथ दिखाकर मुड़ें)

इस हिस्से को ध्यान से देखिए… (एंकर स्क्रीन पर गाड़ियों की कतार की तरफ पॉइंट करे)

ये वो गाड़ियां हैं जो नियमों को ताक पर रखकर यहाँ पहुंचीं। आखिर इतनी भारी संख्या में ये जिप्सियां एक साथ एक ही जगह कैसे जमा हो गईं? बताया जा रहा है कि ताला जोन के कबीर आश्रम इलाके में जैसे ही बाघ द्वारा शिकार किए जाने की खबर मिली, वैसे ही गाइडों और ड्राइवरों ने नियमों का पालन कराने के बजाय, मोबाइल मैसेज के जरिए इस लोकेशन को वायरल कर दिया। और देखते ही देखते वहाँ 10 से 12 गाड़ियों का अवैध मेला लग गया। सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि इन गाड़ियों में कुछ सरकारी गाड़ियां भी शामिल थीं, जिनका काम सुरक्षा व्यवस्था को देखना है!

(वापस कैमरे के सामने आकर अंतिम कड़क सवाल दागते हुए)

आज सवाल बांधवगढ़ के उस पूरे सिस्टम पर है जो हर साल करोड़ों रुपए वन्यजीवों की सुरक्षा के नाम पर खर्च करता है।

अगर इस घेराबंदी से परेशान होकर बाघ ‘बजरंग’ किसी जिप्सी पर हमला कर देता, तो उसका जिम्मेदार कौन होता?

वहाँ मौजूद जिम्मेदार अधिकारी और मैदानी अमला उस वक्त क्या सो रहा था, जब यह तमाशा चल रहा था?

यह लापरवाही बर्दाश्त के बाहर है। स्थानीय नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों ने अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी जिप्सी चालकों, गाइडों समेत लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। देखना होगा कि इस वायरल सच के सामने आने के बाद जिम्मेदार एजेंसियां क्या

कदम उठाती हैं।

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