अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में बालिका संप्रेक्षण गृह शहडोल में योग प्रशिक्षण एवं स्वस्थ जीवनशैली जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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शहडोल। आगामी 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून 2026) के उपलक्ष्य में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित बालिका संप्रेक्षण गृह शहडोल में निवासरत बालिकाओं के शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विशेष योग प्रशिक्षण एवं स्वस्थ जीवनशैली जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

सहायक संचालक श्रीमती संजीता भगत ने जानकारी देते हुए बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व जिले में विभिन्न योग जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में बालिका संप्रेक्षण गृह में यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, ताकि बालिकाओं को योग के महत्व एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा सके।

कार्यक्रम में योगाचार्य श्रीमती वर्षा तनेजा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कॉमन योग प्रोटोकॉल के अनुसार योग प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने बालिकाओं को ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्धचक्रासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वज्रासन, उष्ट्रासन, शशांकासन, भुजंगासन, शलभासन, मकरासन, सेतुबंधासन, पवनमुक्तासन एवं शवासन का अभ्यास कराया। साथ ही अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी एवं ध्यान की विधियों का प्रशिक्षण भी दिया गया।

योगाचार्य श्रीमती वर्षा तनेजा ने कहा कि योग भारत की प्राचीन एवं अमूल्य धरोहर है, जिसे आज विश्वभर में अपनाया जा रहा है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन एवं आत्मा के संतुलन का माध्यम है। नियमित योगाभ्यास से शरीर में लचीलापन, स्फूर्ति एवं शक्ति का विकास होता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। योग मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव एवं अन्य जीवनशैली जनित बीमारियों से बचाव में अत्यंत लाभकारी है।

उन्होंने बताया कि नियमित योग एवं ध्यान से मन शांत रहता है, आत्मविश्वास बढ़ता है, नकारात्मक विचारों में कमी आती है तथा एकाग्रता एवं स्मरण शक्ति का विकास होता है। योग व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाकर जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता प्रदान करता है।

कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार, पर्याप्त जल सेवन, नियमित दिनचर्या, समय पर सोने एवं जागने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें मोबाइल एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।

योगाचार्य श्रीमती वर्षा तनेजा ने कहा कि यदि प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट योग, प्राणायाम एवं ध्यान के लिए निकाले जाएं तो व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकता है, बल्कि मानसिक रूप से भी संतुलित, सकारात्मक एवं प्रसन्न रह सकता है। उन्होंने बालिकाओं से आह्वान किया कि वे योग को केवल एक कार्यक्रम न समझें, बल्कि अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।

कार्यक्रम में उपस्थित बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास किया तथा 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले सामूहिक योग कार्यक्रम में सहभागिता करने एवं नियमित रूप से योग एवं ध्यान करने का संकल्प लिया।

अंत में सभी बालिकाओं को प्रतिदिन योग करने, संतुलित आहार अपनाने तथा स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम से अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण हेतु प्रेरित किया गया। यह कार्यक्रम बालिकाओं के सर्वांगीण विकास, स्वास्थ्य संवर्धन एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध

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