भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: गौरेला जनपद पंचायत सीईओ ज्ञानदर राम भगत की त्वरित कार्रवाई, मनरेगा फर्जीवाड़े पर बैठाई जांच

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गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन ने एक मिसाल कायम की है। ग्राम पंचायत स्तर पर हो रहे फर्जीवाड़े की शिकायत मिलते ही जनपद पंचायत गौरेला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ज्ञानदर राम भगत ने अपनी कार्यकुशलता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उनकी इस कार्यवाही से विभागीय भ्रष्टाचार में संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।

 

क्या है पूरा मामला?

विकासखण्ड गौरेला के ग्राम पंचायत पड़वनिया में मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की शिकायत सामने आई थी।

 

आरोप है कि रोजगार सहायक एवं पंचायत सचिव की मिलीभगत से अत्यंत वृद्ध व्यक्तियों के नाम पर फर्जी मस्टररोल भरकर शासकीय राशि का गबन किया जा रहा था।

 

ये वे वृद्ध हितग्राही हैं जो शारीरिक रूप से कार्य करने में अक्षम हैं और जिन्हें शासन से वृद्धा पेंशन मिल रही है।

 

‘हाल-ए-हलचल न्यूज’ के सह-संपादक द्वारा 08.06.2026 को एक शिकायत पत्र सौंपकर इस फर्जीवाड़े की शिकायत किया गया था।

 

शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया गया कि रतूला बाई (जॉब कार्ड क्र. 213) और तीरथ कुंवर (जॉब कार्ड क्र. 770) जैसे वृद्धा पेंशनधारियों को वित्तीय वर्ष 2024-25 तथा 2025-26 के निर्माण कार्यों में श्रमिक दर्शाकर फर्जी हाजिरी भरी गई और लाखों रुपये निकाले गए।

 

सीईओ की सराहनीय और त्वरित कार्रवाई:

जनपद पंचायत सीईओ ज्ञानदर राम भगत ने इस संवेदनशील और गंभीर मामले में बिना कोई देरी किए तुरंत एक्शन लिया।

 

पत्र प्राप्त होने के मात्र कुछ ही दिनों के भीतर, दिनांक 11/06/2026 को सीईओ ने आधिकारिक आदेश (क्रमांक/1048) जारी कर मामले की सघन जांच के निर्देश दे दिए हैं।

 

पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के लिए उन्होंने तीन अधिकारियों का एक विशेष जांच दल गठित किया है, जिसमें श्री राजेश बरवा (वरिष्ठ करारोपण अधिकारी), श्री भूपेन्द्र सिदार (तकनीकी सहायक), और श्री मनमोहन सिंह (तकनीकी सहायक) शामिल हैं।

 

सीईओ ने अपनी प्रशासनिक सख्ती दिखाते हुए अधिकारियों को मात्र 03 दिवस के भीतर अपना स्पष्ट अभिमत सहित जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का अल्टीमेटम दिया है।

 

सुशासन की ओर एक मजबूत कदम:

सीईओ ज्ञानदर राम भगत का यह कदम यह दर्शाता है कि वे शासन की योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँचाने और भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उनकी इस त्वरित और सख्त कार्रवाई की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है, जिससे आम जनता का प्रशासन की कार्यप्रणाली पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

 

उम्मीद की जा रही है कि इस जांच के बाद दोषियों (रोजगार सहायक व सचिव) पर कड़ी कार्रवाई होगी और गबन की गई राशि की वसूली की जाएगी।

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