रिटायर्ड एसीसी कर्मी से साइबर ठगों ने उड़ाए लाखों रिटायरमेंट की जमा पूंजी पर साइबर अपराधियों की नजर फोन कॉल से शुरू हुआ खेल,खाते से पार हुए 1 लाख रुपये,रिटायर्ड कर्मचारी बन रहे निशाना
रिटायर्ड एसीसी कर्मी से साइबर ठगों ने उड़ाए लाखों
रिटायरमेंट की जमा पूंजी पर साइबर अपराधियों की नजर फोन कॉल से शुरू हुआ खेल,खाते से पार हुए 1 लाख रुपये,रिटायर्ड कर्मचारी बन रहे निशाना
डिजिटल दौर में साइबर अपराध लगातार नए रूप ले रहे हैं। पहले जहां ठग आम लोगों को निशाना बनाते थे, वहीं अब उनकी नजर विशेष रूप से बुजुर्गों और रिटायर्ड कर्मचारियों पर है। कटनी के माधवनगर थाना क्षेत्र से सामने आया ताजा मामला इस बढ़ते खतरे की गंभीर तस्वीर पेश करता है
कटनी।। डिजिटल सुविधाओं ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं। अब साइबर ठग विशेष रूप से रिटायर्ड कर्मचारियों और बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं। हाल ही में माधवनगर क्षेत्र में सामने आए एक मामले ने इस खतरे को फिर उजागर कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, 67 वर्षीय रिटायर्ड एसीसी कर्मी मोबाइल के माध्यम से साइबर ठगों के संपर्क में आए और कुछ दिनों के भीतर उनके बैंक खाते से एक लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल ली गई। मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, शर्मा कॉलोनी (डेहरू लाइन, एसीसी) निवासी 67 वर्षीय रिटायर्ड एसीसी कर्मी सुनील कुमार पंथ साइबर ठगी का शिकार हो गए। बताया गया कि 4 जून से 8 जून 2026 के बीच अज्ञात साइबर जालसाजों ने मोबाइल के माध्यम से उनसे संपर्क किया और बातचीत के दौरान उन्हें अपने झांसे में ले लिया। ठगों ने अलग-अलग किस्तों में उनके बैंक खाते से कुल 1,00,240 रुपये निकाल लिए। कुछ समय बाद जब बुजुर्ग को बैंक खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। फरियादी की शिकायत पर माधवनगर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की डायरी साइबर सेल को सौंप दी गई है। पुलिस मोबाइल नंबर के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
क्यों बन रहे हैं रिटायर्ड कर्मचारी आसान शिकार
जानकारों के अनुसार साइबर अपराधी ऐसे लोगों को चुनते हैं.जिनके पास सेवानिवृत्ति के बाद बैंक बैलेंस या बचत राशि होती है जो डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन फ्रॉड के नए तरीकों से कम परिचित होते हैं
जो फोन पर आने वाले कॉल, केवाईसी अपडेट, बैंक अधिकारी या सरकारी अधिकारी बनकर किए गए संपर्क पर जल्दी भरोसा कर लेते है.जो अकेले रहते हैं या तत्काल सलाह नहीं ले पाते
अपराधी कैसे फंसाते हैं
साइबर ठग आमतौर पर बैंक खाते या केवाईसी अपडेट के नाम पर कॉल करते हैं,मोबाइल पर लिंक भेजते हैं,
ओटीपी, स्क्रीन शेयरिंग ऐप या यूपीआई पिन मांगते हैं
इनाम, पेंशन अपडेट या अकाउंट बंद होने का डर दिखाते हैं।
बचाव के लिए क्या करें
किसी भी अनजान कॉल पर बैंक विवरण साझा न करें
ओटीपी, यूपीआई पिन या स्क्रीन शेयरिंग ऐप कभी इंस्टॉल न करें। बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर आने वाले कॉल की पुष्टि आधिकारिक नंबर से करें
किसी भी संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को समय-समय पर साइबर सुरक्षा की जानकारी दें। यह मामला एक चेतावनी है कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ठग योजनाबद्ध तरीके से बुजुर्गों और रिटायर्ड लोगों को निशाना बना रहे हैं। जागरूकता ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।