पति की राह तकती आंखें, पिता के इंतजार में मासूम बच्चे….अब न्याय की आस में आवेदन के पन्ने पलट रहा है एक परिवार
पति की राह तकती आंखें, पिता के इंतजार में मासूम बच्चे….अब न्याय की आस में आवेदन के पन्ने पलट रहा है एक परिवार
कटनी।। विश्राम बाबा क्षेत्र में उद्योगपति मुकेश गुप्ता पर हुए हमले के मामले में दर्ज अपराध क्रमांक 606/2026 की जांच जहां पुलिस अपने स्तर पर आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर इस प्रकरण में नामजद आरोपी कोका उर्फ प्रशांत शुक्ला का परिवार न्याय की उम्मीद लेकर प्रशासन के दरवाजे खटखटा रहा है। घर के बाहर हर आहट पर नजर टिकाए बैठी पत्नी पूनम शुक्ला की आंखों में एक ही इंतजार है—कब उनके पति घर लौटेंगे। वहीं मासूम बच्चों के लिए हर दिन एक ही सवाल है, पापा कब आएंगे….इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है, लेकिन परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।

पूनम शुक्ला ने पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस महानिदेशक को भेजे गए आवेदन में निष्पक्ष एवं साक्ष्य आधारित जांच की मांग की है। उनका कहना है कि उनके पति को घटना में गलत तरीके से नामजद किया गया है। परिवार का दावा है कि घटना के समय वे घटनास्थल पर नहीं बल्कि ग्राम बिलगंवा में मौजूद थे, जिसके समर्थन में निजी सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है। साथ ही आसपास लगे सरकारी कैमरों की रिकॉर्डिंग की भी जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
इसी मामले में पुरुषोत्तम तिवारी ने भी संबंधित क्षेत्र के सरकारी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने और उपलब्ध कराने के लिए आवेदन दिया है। उनका मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि उद्योगपति पर हमले की शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज किया गया है तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। शेष आरोपियों की तलाश और विवेचना जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे अधिक परीक्षा एक परिवार की हो रही है। एक पत्नी के लिए हर गुजरता दिन उम्मीद और चिंता के बीच बीत रहा है, जबकि बच्चों की निगाहें दरवाजे पर टिक जाती हैं कि शायद आज उनके पिता लौट आएं। दूसरी ओर पीड़ित पक्ष भी न्याय की अपेक्षा कर रहा है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच सत्य तक पहुंचने का एकमात्र माध्यम निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य आधारित जांच ही है। भारतीय न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत भी यही कहता है कि किसी भी व्यक्ति का दोष न्यायालय में विधिसम्मत साक्ष्यों के आधार पर ही सिद्ध होता है। यदि प्रस्तुत सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण साबित होते हैं, तो उनका निष्पक्ष परीक्षण होना उतना ही आवश्यक है, जितना अपराध में शामिल वास्तविक दोषियों को कानून के कटघरे तक पहुंचाना।

न्याय का अर्थ केवल दोषियों को दंड देना नहीं, बल्कि यदि कोई निर्दोष है तो उसे समय रहते न्याय दिलाना भी है। अब सभी की निगाहें जांच पर हैं कि वे उपलब्ध प्रत्येक साक्ष्य का निष्पक्ष परीक्षण कर सच्चाई को सामने लाएं, ताकि पीड़ित को न्याय मिले और किसी निर्दोष को अनावश्यक पीड़ा न झेलनी पड़े।
