कागजों में 3 महीने में पूरा हुआ 32 लाख का काम, जमीनी हकीकत में 1 साल बाद भी अधूरा: जिला अस्पताल गौरेला में सेमरा पंचायत का बड़ा फर्जीवाड़ा

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गौरेला (विशेष संवाददाता):

विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का एक बड़ा मामला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले से सामने आया है। जिला चिकित्सालय परिसर में ड्रेनेज, सीवरेज और टॉयलेट उन्नयन के नाम पर स्वीकृत 32.97 लाख रुपये का कार्य महज कागजों पर तीन महीने में पूरा कर लिया गया। अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की मिलीभगत का आलम यह है कि कार्य पूर्ण हुए एक साल बीत चुका है, पूर्णता और गुणवत्ता के प्रमाण पत्र जारी हो चुके हैं, लाखों रुपये का भुगतान भी हो गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी काम अधूरा पड़ा है।

 

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त दस्तावेजों और कार्यस्थल पर लगे शिलापट्ट के अनुसार:

 

योजना का नाम: जिला खनिज न्यास संस्थान मद (DMF)

कार्य का नाम: जिला चिकित्सालय के अंदर ड्रेनेज एवं सिवरेज कार्य/टॉयलेट उन्नयन

स्वीकृत राशि: 32.97 लाख रुपये (वर्ष 2024-25)

कार्य एजेंसी: सरपंच/सचिव, ग्राम पंचायत सेमरा

कार्य प्रारंभ दिनांक: 20-05-2025

कार्य पूर्णता दिनांक: 20-08-2025

 

कागजों के अनुसार यह भारी-भरकम काम मात्र 3 महीने में पूरा कर लिया गया। आज इस कागजी पूर्णता को ठीक एक साल हो चुका है, लेकिन अस्पताल परिसर में अधूरा काम जिम्मेदारों के दावों की पोल खोल रहा है।

 

कागजों में दौड़ते घोड़े: बिना काम हुए जारी हो गए सारे प्रमाण पत्र

इस पूरे फर्जीवाड़े में निचले स्तर से लेकर उच्चाधिकारियों तक की संलिप्तता नजर आ रही है। दस्तावेजों की पड़ताल से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

 

पूर्णता एवं उपयोगिता का खेल: कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और कार्य उपयोगिता प्रमाण पत्र के अनुसार, जनपद पंचायत गौरेला द्वारा इस कार्य का अंतिम मूल्यांकन 29,95,451/- रुपये आंका गया है। इन दस्तावेजों पर सरपंच (तुफान सिंह धुर्वे), सचिव, उप अभियंता (अस्मिता कुर्रे), अनुविभागीय अधिकारी (एस.डी. मोहले) और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत गौरेला) के हस्ताक्षर मौजूद हैं।

 

गुणवत्ता का झूठा दावा: हद तो तब हो गई जब अधूरे काम को गुणवत्तापूर्ण बताकर ‘गुणवत्ता प्रमाण पत्र’ भी जारी कर दिया गया।

 

विद्युतीकरण के नाम पर अलग खेल: सिविल कार्य के अलावा, अस्पताल परिसर में विद्युतीकरण सामग्री प्रदाय एवं स्थापना का कार्य भी कागजों में निपटा दिया गया। जानकारी के अनुसार 2,89,993/- रुपये का विद्युतीकरण कार्य पूर्ण बताया गया है। इसका भी गुणवत्ता प्रमाण पत्र बकायदा जारी कर दिया गया है।

 

फाइल में ‘शिवम कंस्ट्रक्शन’ द्वारा लगाई गई विद्युत सामग्रियों (पंखे, स्विच, तार आदि) की हस्तलिखित सूची है, और फाइल में कार्य पूर्ण होने की कुछ तस्वीरें चस्पा की गई हैं, ताकि फाइल का पेट भरा जा सके।

 

उठते गंभीर सवाल

जब जमीनी स्तर पर काम अधूरा है, तो उप अभियंता और अनुविभागीय अधिकारी (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) ने किस आधार पर भौतिक सत्यापन कर 29.95 लाख रुपये का मूल्यांकन कर दिया?

 

मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत गौरेला ने बिना जमीनी हकीकत परखे पूर्णता और उपयोगिता प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर कैसे कर दिए?

 

ग्राम पंचायत सेमरा (जो कि क्रियान्वयन एजेंसी है) ने जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर के निर्माण कार्यों में इतनी बड़ी लापरवाही और वित्तीय अनियमितता को कैसे अंजाम दिया?

 

यह पूरा प्रकरण राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) और उच्च स्तरीय जांच का विषय है। खनिज न्यास (DMF) का पैसा क्षेत्र के विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए होता है, लेकिन यहां यह अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबें भरने का जरिया बन गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस कागजी लीपापोती का संज्ञान लेकर दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है।

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