नियम, नोटिस और राजनीतिक हस्तक्षेप—आखिर सही कौन पन्ना तिराहे पर 40 साल पुराने भवन पर कार्रवाई को लेकर घमासान, निगम अमला पहुंचा तो मौके पर पहुंचे भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष, नोटिस-आदेश और तामील पर उठे सवाल तीखी बहस के बाद भवन स्वामी को एक सप्ताह की मोहलत, कार्रवाई किए बिना लौटी नगर निगम की टीम,वायरल वीडियो ने शहर से लेकर भोपाल तक गरमाई सियासत

0

नियम, नोटिस और राजनीतिक हस्तक्षेप—आखिर सही कौन
पन्ना तिराहे पर 40 साल पुराने भवन पर कार्रवाई को लेकर घमासान, निगम अमला पहुंचा तो मौके पर पहुंचे भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष, नोटिस-आदेश और तामील पर उठे सवाल
तीखी बहस के बाद भवन स्वामी को एक सप्ताह की मोहलत, कार्रवाई किए बिना लौटी नगर निगम की टीम,वायरल वीडियो ने शहर से लेकर भोपाल तक गरमाई सियासत
कटनी। पन्ना तिराहे पर कथित अनधिकृत निर्माण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब कार्रवाई करने पहुंचे अतिक्रमण अमले के सामने भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष मृदुल मिश्रा सहित अन्य लोग पहुंच गए। कार्रवाई की वैधानिक प्रक्रिया, नोटिस और आदेश को लेकर निगम अधिकारियों और मौके पर मौजूद लोगों के बीच तीखी बहस हुई। घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है।
नगर निगम का अतिक्रमण दस्ता वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बालीनाथ पटेल एवं ललित पटेल से संबंधित भवन की कथित अनधिकृत संरचना के खिलाफ कार्रवाई के लिए पन्ना तिराहे पहुंचा था। निगम की टीम कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची ही थी कि इसकी जानकारी मिलने पर भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष मृदुल मिश्रा सहित अन्य लोग वहां पहुंच गए। इसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर सवाल-जवाब का दौर शुरू हो गया। मौके पर काफी देर तक गहमागहमी रही। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक की स्थिति बनी। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कथित तौर पर निगम अधिकारी से कार्रवाई का आदेश दिखाने और कार्रवाई करके दिखाने के बाद परिणाम देखने जैसी बातें कही जाती सुनाई दे रही हैं। हालांकि वायरल वीडियो की संपूर्ण परिस्थितियों और उसमें कही गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

40 साल पुराने भवन का दावा, कार्रवाई से पहले नोटिस पर सवाल
पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू संबंधित भवन की उम्र और नगर निगम की कार्रवाई से पहले अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर है। भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष मृदुल मिश्रा का कहना है कि संबंधित व्यक्ति का मकान करीब 40 वर्ष पुराना है। उनका दावा है कि नगर निगम का अमला बिना पर्याप्त नोटिस और विधिवत तामील की प्रक्रिया पूरी किए कार्रवाई के लिए पहुंच गया। मिश्रा के अनुसार परिवार को अपना पक्ष रखने और भवन से संबंधित दस्तावेज नगर निगम के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलना चाहिए था। उनका कहना है कि यदि दस्तावेजों की जांच के बाद निर्माण नियमों के विपरीत पाया जाता है तो नगर निगम नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित मामले की जांच पटवारी के माध्यम से कराई जानी चाहिए, जिससे भूमि, निर्माण और उपलब्ध दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

निगम के सामने सबसे बड़ा सवाल,नोटिस कब, किसे और कैसे दिया
पन्ना तिराहे के घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर खड़ा हो गया है। क्या संबंधित भवन स्वामी को कार्रवाई से पहले नोटिस दिया गया था। यदि नोटिस दिया गया था तो उसकी तामील किस माध्यम से हुई। क्या भवन स्वामी को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय दिया गया। कार्रवाई किस अधिकारी के आदेश पर की जा रही थी। क्या मौके पर पहुंची टीम के पास कार्रवाई का लिखित आदेश मौजूद था और जिस संरचना को नगर निगम कथित रूप से अनधिकृत बता रहा है, उसकी पहचान किस दस्तावेज या जांच के आधार पर की गई। इन सवालों का स्पष्ट उत्तर नगर निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही सामने आ सकता है।

एक सप्ताह की मोहलत, बिना कार्रवाई लौट गया अमला
मौके पर विवाद बढ़ने के बाद भवन स्वामी पक्ष की ओर से कथित संरचना को स्वयं हटाने तथा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया। इसके बाद नगर निगम की टीम ने एक सप्ताह की मोहलत देते हुए तत्काल कार्रवाई नहीं की और वापस लौट गई। अब यही एक सप्ताह पूरे मामले में महत्वपूर्ण हो गया है। यदि भवन स्वामी इस अवधि में अपने दस्तावेज नगर निगम के समक्ष प्रस्तुत करता है तो उनकी जांच किस स्तर पर होगी,यदि दस्तावेज सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई का क्या स्वरूप होगा और यदि निर्माण नियम विरुद्ध पाया जाता है तो क्या नगर निगम दोबारा कार्रवाई के लिए पहुंचेगा। इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आने हैं।

मृदुल मिश्रा का पक्ष: विरोध कार्रवाई का नहीं, प्रक्रिया का
भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष मृदुल मिश्रा ने अपने पक्ष में कहा कि उनका विरोध किसी वैध कार्रवाई का नहीं था। उनका कहना है कि यदि किसी भवन को नियम विरुद्ध पाया गया है तो नगर निगम नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है, लेकिन उससे पहले संबंधित व्यक्ति को विधिवत सूचना और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
मिश्रा के अनुसार परिवार का एक सदस्य सेना में है और कार्रवाई की जानकारी उन्हें कार्यकर्ता के माध्यम से मिली, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे। उनका दावा है कि परिवार को नगर निगम की ओर से कार्रवाई संबंधी पर्याप्त नोटिस प्राप्त नहीं हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई से एक दिन पहले अनावेदक को पुलिस अधीक्षक कार्यालय से संबंधित पत्र की एक प्रति प्राप्त हुई थी, लेकिन नगर निगम की ओर से नोटिस और उसकी तामील को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। उनका कहना है कि यदि संबंधित व्यक्ति को समय दिया जाता है तो वह अपने सभी दस्तावेज निगम के सामने रखेगा और दस्तावेज नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर निगम कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद विवाद ने नया रूप ले लिया है। वीडियो में कथित तौर पर भाजपा नेता और निगम अधिकारी के बीच तीखी बातचीत दिखाई देती है। इसमें अधिकारी से आदेश दिखाने और कार्रवाई करने की स्थिति में परिणाम देखने जैसी बातें कथित तौर पर कही गई हैं। वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या किसी प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध इस तरह मौके पर टकराव की स्थिति तक पहुंचना चाहिए।

हालांकि दूसरी ओर भाजपा नेता का पक्ष है कि मौके पर पहुंचने का उद्देश्य परिवार के पक्ष को सुना जाना और कथित रूप से प्रक्रिया का पालन नहीं होने पर आपत्ति दर्ज कराना था। इसलिए पूरे वीडियो के साथ-साथ उससे पहले और बाद के घटनाक्रम की भी जांच जरूरी है, तभी स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

राजनीतिक हस्तक्षेप या नागरिक के अधिकार की आवाज
इस पूरे मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू राजनीतिक हस्तक्षेप का है। किसी प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाना या किसी नागरिक का पक्ष रखना राजनीतिक पदाधिकारी का अधिकार हो सकता है, लेकिन सरकारी अधिकारी के साथ मौके पर होने वाला व्यवहार भी सार्वजनिक पद की गरिमा के अनुरूप होना चाहिए। दूसरी ओर, सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि कार्रवाई के लिए आवश्यक नोटिस, आदेश और तामील की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी तो संबंधित अधिकारी को भी इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए। यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कार्रवाई सही थी या गलत। बड़ा सवाल यह है कि क्या पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई और क्या सभी पक्षों ने अपनी-अपनी संवैधानिक एवं प्रशासनिक मर्यादा का पालन किया।

नगर निगम को सामने रखने होंगे दस्तावेज
मामले को लेकर अब नगर निगम से सबसे अधिक अपेक्षा पारदर्शिता की है। निगम यदि यह स्पष्ट कर दे कि, कार्रवाई का आदेश किस अधिकारी ने जारी किया था,संबंधित भवन स्वामी को नोटिस कब दिया गया,नोटिस की तामील किस प्रकार हुई,
कार्रवाई का कानूनी आधार क्या था, कथित अनधिकृत निर्माण की जांच किस रिपोर्ट के आधार पर की गई और मौके पर कार्रवाई रोककर एक सप्ताह की मोहलत किस आधार पर दी गई,तो विवाद के कई सवाल स्वतः समाप्त हो सकते हैं।
इसी तरह भवन स्वामी पक्ष को भी अपने स्वामित्व, निर्माण अनुमति और अन्य संबंधित दस्तावेज जांच के लिए प्रस्तुत करने चाहिए।

भाजपा संगठन के लिए भी बना असहज करने वाला सवाल
मामला अब केवल नगर निगम और भवन स्वामी के बीच का विवाद नहीं रहा। भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे नेता के नाम से घटनाक्रम जुड़ने के बाद राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा होना स्वाभाविक है। यदि किसी राजनीतिक पदाधिकारी द्वारा अधिकारी से कथित रूप से अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है तो उस पर सवाल उठना भी स्वाभाविक है। वहीं यदि अधिकारी द्वारा बिना पर्याप्त प्रक्रिया के कार्रवाई की जा रही थी तो उस पर सवाल उठाना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि इस पूरे मामले में किसी एक पक्ष को पहले से सही या गलत मानने के बजाय दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना अधिक उचित होगा।

शहर से भोपाल तक चर्चा,अब असली परीक्षा किसकी
पन्ना तिराहे की घटना अब कटनी की सीमाओं से आगे राजनीतिक चर्चा का विषय बनती दिखाई दे रही है। एक तरफ नगर निगम की कार्रवाई और उसकी प्रक्रिया पर सवाल हैं, तो दूसरी तरफ सरकारी अमले के सामने राजनीतिक पदाधिकारी के हस्तक्षेप और कथित तीखे व्यवहार को लेकर बहस है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि किसी भवन पर नियम विरुद्ध निर्माण पाया जाता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि कार्रवाई में नियमों का पालन नहीं हुआ है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। कानून न राजनीतिक प्रभाव से चलना चाहिए और न ही प्रशासनिक मनमानी से। अब सबसे बड़ा सवाल यही है, पन्ना तिराहे पर नियम जीतेगा या प्रभाव। एक सप्ताह की मोहलत के बाद नगर निगम की अगली कार्रवाई, भवन स्वामी द्वारा पेश किए जाने वाले दस्तावेज और निगम की ओर से सामने आने वाला आधिकारिक रिकॉर्ड ही इस पूरे विवाद की अगली दिशा तय करेगा। फिलहाल नियम, नोटिस और राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच उलझा पन्ना तिराहे का यह मामला नगर से लेकर भोपाल तक राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed