तिरंगे की सिलवटें मिटाते-मिटाते देशभक्ति की मिसाल बन गए रमेश तिरंगे की सेवा में बीते 25 साल, रमेश रजक की देशभक्ति को सलाम निःस्वार्थ भाव से राष्ट्रीय ध्वज की सफाई और प्रेस कर सम्मानपूर्वक पहुंचाते हैं रमेश
तिरंगे की सिलवटें मिटाते-मिटाते देशभक्ति की मिसाल बन गए रमेश
तिरंगे की सेवा में बीते 25 साल, रमेश रजक की देशभक्ति को सलाम
निःस्वार्थ भाव से राष्ट्रीय ध्वज की सफाई और प्रेस कर सम्मानपूर्वक पहुंचाते हैं रमेश
कटनी । देशभक्ति केवल सीमा पर बंदूक उठाकर देश की रक्षा करने का नाम नहीं है। देशभक्ति वह भावना भी है, जिसमें राष्ट्र के प्रतीक तिरंगे के सम्मान और उसकी गरिमा के लिए इंसान अपना जीवन समर्पित कर दे। नगर के रमेश रजक पिछले 25 वर्षों से लगातार निःशुल्क सेवा देकर इसी सच्ची देशभक्ति की मिसाल कायम कर रहे हैं।

रमेश रजक का जीवन राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और समर्पण की ऐसी कहानी है, जो हर देशवासी को प्रेरणा देती है। नगर के विभिन्न स्कूलों, नगर निगम कार्यालय, सरकारी अस्पतालों और कलेक्ट्रेट कार्यालय सहित अनेक शासकीय संस्थानों में उपयोग किए जाने वाले राष्ट्रीय ध्वजों को वे पूरी श्रद्धा के साथ धोते हैं, साफ करते हैं और फिर प्रेस कर उन्हें सम्मानपूर्वक उनके निर्धारित स्थान तक पहुंचाते हैं।
उनके हाथों में जब तिरंगा होता है तो वह उनके लिए महज कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि भारत की आन, बान और शान होता है। इसी भावना के साथ वे वर्षों से बिना किसी पारिश्रमिक की अपेक्षा के अपना यह दायित्व निभा रहे हैं।
आज के दौर में जहां छोटी-सी सेवा के बदले भी लोग मेहनताना चाहते हैं, वहीं रमेश रजक करीब ढाई दशक से राष्ट्रीय ध्वज की सेवा निःस्वार्थ भाव से करते आ रहे हैं। उनके लिए यह काम रोजी-रोटी का साधन नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का माध्यम है।
तिरंगे को धोते समय उसकी पवित्रता का ध्यान रखना, उसे प्रेस करते समय उसकी गरिमा बनाए रखना और फिर उसे सम्मानपूर्वक उसके स्थान तक पहुंचाना—उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
तिरंगे की सिलवटें मिटाते-मिटाते देशभक्ति की मिसाल बन गए रमेश
रमेश रजक जिस गर्म प्रेस से तिरंगे की सिलवटें दूर करते हैं, उसी के साथ मानो उनके भीतर की राष्ट्रभक्ति भी हर बार और प्रखर होती जाती है। उनके लिए तिरंगे की प्रत्येक पट्टी और अशोक चक्र भारत की पहचान है।
केसरिया उन्हें साहस और त्याग की याद दिलाता है, सफेद शांति और सत्य का संदेश देता है तथा हरा देश की समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है। बीच में बना अशोक चक्र उन्हें निरंतर कर्म और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य की प्रेरणा देता है।
देश के वीरों को सलाम करने का अपना अनोखा तरीका
हमारे जवान सीमा पर खड़े होकर देश की रक्षा करते हैं, किसान खेतों में अन्न उगाकर देश का पेट भरते हैं और अनेक लोग अपने-अपने क्षेत्र में राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं। उसी कड़ी में रमेश रजक का यह कार्य भी देशसेवा की एक ऐसी मिसाल है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। तिरंगे की सेवा करना, तिरंगे का सम्मान करना और उसकी गरिमा बनाए रखना,यह भी राष्ट्रभक्ति है।
रमेश रजक ने पिछले 25 वर्षों में शायद कोई पदक या सम्मान पाने के लिए यह कार्य नहीं किया, लेकिन उनका निःस्वार्थ समर्पण स्वयं में किसी सम्मान से कम नहीं है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि देश के लिए कुछ करने के लिए सीमा पर होना जरूरी नहीं, सच्ची नीयत और समर्पण हो तो अपने स्थान पर रहकर भी मातृभूमि की सेवा की जा सकती है।
रमेश रजक की कहानी उन हजारों गुमनाम देशभक्तों की कहानी है, जो बिना किसी प्रचार और प्रसिद्धि की चाह के अपने स्तर पर राष्ट्र की सेवा करते रहते हैं।
25 वर्षों से तिरंगे की शान को बनाए रखने वाले रमेश रजक को नमन।
उनकी मेहनत में देशप्रेम है, उनकी सेवा में समर्पण है और उनके हाथों में सजे तिरंगे में 140 करोड़ भारतीयों का गौरव। तिरंगा केवल हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं, हमारी पहचान है।
उसकी आन-बान-शान की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।