गोरखपुर तालाब घोटाला या लीपापोती? बोर्ड पर कार्य ‘पूर्ण’, कागजों में ‘अपूर्ण’—CM हेल्पलाइन में शिकायत होते ही आनन-फानन में जुटाए गए मजदूरों के अंगूठे, उठ रहे गंभीर सवाल!
गौरेला:
गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत गोरखपुर (ग्राम बेलगहना) में मनरेगा के तहत स्वीकृत पथरा तालाब नवीनीकरण कार्य भ्रष्टाचार और लीपापोती के गंभीर घेरे में आ चुका है। लाखों रुपये के सरकारी बजट के बंदरबांट का यह खेल तब बेनकाब होने लगा जब मौके पर लगे नागरिक सूचना पटल और जमीनी हकीकत के बीच का भारी झोल सामने आया।
पूर्व में जब मीडिया की टीम ने धरातल पर पहुंचकर पड़ताल की थी, तब सरपंच महोदय ने बगले झांकते हुए इसे महज ‘तालाब गहरीकरण’ बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी। लेकिन जैसे ही मामले की गूंज सीएम हेल्पलाइन तक पहुंची, जिम्मेदारों के हाथ-पांव फूल गए और अब लीपापोती का पूरा प्रशासनिक ताना-बाना बुना जाने लगा है।
बोर्ड पर कार्य ‘पूर्ण’, तो सरपंच की चिट्ठी में ‘अपूर्ण’ कैसे?
मौके पर लगा शासकीय सूचना पटल चीख-चीख कर कह रहा है कि कार्य 24 जून 2026 को ‘पूर्ण’ हो चुका है और 1839 मानव दिवस के एवज में ₹4,49,552.45 का आहरण भी दर्ज है। वहीं दूसरी ओर, सीएम हेल्पलाइन की शिकायत के बाद जनपद सीईओ को दिए जवाब में सरपंच रामप्रकाश लिखित तौर पर दावा कर रहे हैं कि “कार्य वर्तमान में अपूर्ण है”।
बड़ा सवाल: जब कार्य पूर्ण ही नहीं हुआ था, तो सरकारी बोर्ड पर कार्य पूर्णता की तारीख 24/06/2026 दर्ज कर वाहवाही क्यों लूटी गई? क्या अधूरे कार्य को पूर्ण दिखाकर राशि का आहरण कर लिया गया, या फिर शिकायत के डर से बचने के लिए अब इसे कागजों में आनन-फानन ‘अपूर्ण’ बताया जा रहा है?
शिकायत होते ही 34 मजदूरों के अंगूठे और दस्तखत का ‘सुरक्षा कवच’
शिकायत दर्ज होते ही ग्राम पंचायत स्तर पर 34 मजदूरों के हस्ताक्षर व अंगूठे वाला एक पंचनामा तैयार कर लिया गया, जिसमें लिखा गया कि मजदूरों ने ‘गोदी मिट्टी खुदाई’ की है।
जांच पर सवाल: क्या यह पंचनामा वास्तव में कार्यस्थल पर काम करने वाले मजदूरों का है, या फिर कार्रवाई से बचने के लिए दबाव बनाकर अंगूठे लगवाए गए हैं?
सत्यापन का अभाव: क्या किसी स्वतंत्र जांच दल ने मौके पर जाकर 120×60 मीटर के तय क्षेत्रफल में मिट्टी की वास्तविक खुदाई का भौतिक सत्यापन किया, या फिर टेबल पर बैठकर माप पुस्तिका (MB 5023/1-27) और बयानों के आधार पर ही क्लीनचिट तैयार कर दी गई?
फाइल दबाने और शिकायत विलोपित करने की इतनी जल्दबाजी क्यों?
जनपद पंचायत गौरेला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा नोडल अधिकारी को पत्र भेजकर मामले को ‘नियमसम्मत’ बताते हुए शिकायत को सीधे ‘विलोपित’ करने की अनुशंसा कर दी गई है। बिना किसी निष्पक्ष तकनीकी जांच और स्वतंत्र क्रॉस-वेरिफिकेशन के इतनी फुर्ती से शिकायत को रफा-दफा करने की यह जल्दबाजी खुद प्रशासन की भूमिका पर कड़े सवाल खड़े करती है।
जनता पूछ रही है कि आखिर ग्राम पंचायत गोरखपुर के इस पथरा तालाब के नाम पर खर्च हुए लाखों रुपयों का सच क्या है?
क्या जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर मौके पर एक-एक इंच की पैमाइश कराने की हिम्मत जुटा पाएंगे, या फिर कागजी घोड़ों के सहारे इस गोलमाल को हमेशा के लिए दफन कर दिया जाएगा?