NH-43 पर हादसों का सिलसिला जारी, कोनी में दो बाइक सवार गंभीर; आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार….?
शहडोल। राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहडोल मुख्यालय से लेकर जिले के अंतिम छोर बटूरा तक आए दिन हो रहे हादसे सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। ताजा मामला कोनी क्षेत्र में सोहागपुर थाना अंतर्गत ओवरब्रिज के पास का है, जहां एक नए ट्रेलर के अनियंत्रित होने से दो बाइक सवारों को टक्कर लग गई। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तत्काल चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई गई है।
NH-43 पर आखिर क्यों नहीं थम रहे हादसे?
बताया जाता है कि कुछ समय पहले NH-43 बाईपास पर हुई इस दुर्घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की गई। लगातार हो रही दुर्घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर राजमार्ग पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे। स्थिति यह है कि मार्ग पर दुर्घटनाओं की खबरें लगातार सामने आ रही हैं और कई हादसों में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से ठोस पहल की अपेक्षा
इस गंभीर स्थिति में शहडोल कलेक्टर पार्थ जायसवाल और पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय अग्रवाल से अपेक्षा है कि वे NH-43 पर सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर प्रभावी कार्ययोजना तैयार कराएं। मुख्यालय से लेकर जिले की सीमा तक दुर्घटना संभावित स्थलों का सर्वेक्षण कर ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए जाने चाहिए। इन स्थानों पर दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण कर गति नियंत्रण, चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू किए जाने की जरूरत है।
अधूरे निर्माण और संपर्क मार्ग भी बनें समीक्षा का विषय
राजमार्ग पर अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को गति देना भी जरूरी है। NH-43 से जुड़े गांवों और अन्य संपर्क मार्गों पर पर्याप्त सूचना पट्टों का अभाव तथा सुरक्षित प्रवेश और निकास की व्यवस्था न होना दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकता है। संबंधित तकनीकी अधिकारियों से ऐसे स्थानों का निरीक्षण कराकर आवश्यक संकेतक, सुरक्षित जंक्शन और नियमानुसार गति नियंत्रक उपाय स्थापित किए जाने चाहिए। जहां अतिक्रमण यातायात में बाधा बन रहा है, वहां नियमानुसार कार्रवाई भी आवश्यक है।
हादसों पर अंकुश लगाने के लिए जवाबदेही जरूरी
सड़क दुर्घटनाओं को केवल चालक की लापरवाही बताकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। सड़क की स्थिति, अधूरे निर्माण, संकेतकों की उपलब्धता और यातायात नियंत्रण की भी समीक्षा होनी चाहिए। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के स्तर पर नियमित समीक्षा, दुर्घटना वाले स्थानों का निरीक्षण और सुधार कार्यों की समयसीमा तय करना जरूरी है।
NH-43 जिले के लोगों के लिए महत्वपूर्ण आवागमन मार्ग है। ऐसे में प्रत्येक दुर्घटना के बाद औपचारिक कार्रवाई के बजाय दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी उपाय किए जाने चाहिए, ताकि अनमोल जिंदगियों को असमय मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सके।