रेवड़ी तरह मिली गौतम जी को शासकीय उचित मूल्य की दुकाने

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नियम विरूद्ध पहुंचा जाया जा रहा लाभ, जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी

(विपिन शिवहरे+7987171060)
उमरिया। जिले की पाली जनपद पंचायत में शासकीय उचित मूल्य दुकान पर अनियमितता चरम पर पहुंच गई हैं। दुकान का संचालन करने वाले केरोसीन, शक्कर, चावल, गेहूं, नमक की कालाबाजारी सरेआम कर रहे हैं। खबर है कि पाली जनपद में संचालित ममान, बरहाई, गोइरा, बेली जैसी पंचायत को कैलाश गौतम द्वारा लघु वन उपज के नाम से समिति बनाकर स्थानीय ग्रामीणों के हक पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है, मजे की बात तो यह हैं जिस समिति को स्थानीय ग्रामीणों से अवाला, हर्रा, बहेरा सहित अन्य वस्तुएं खरीदनी चाहिए थी, उसे ही सेल्स मैन बनाकर शासकीय उचित मूल्य की दुकानों की कमान सौंप दी गई है।
जनपद पंचायत की कुछ दुकानों पर अनियमितता चरम पर पहुंच गई है, गरीबों का राशन इन दुकान संचालक द्वारा ऊंचे दामों में बेच दिया जा रहा हैं, यहां तक कि केरोसिन की कालाबाजारी तो आम हो चली है। शक्कर, गेहूं, चावल भी बेचे जा रहे है। उचित मूल्य की दुकान की जिम्मेदारी देख रहे गौतम जी यह खेल खुलेआम खेल रहे है। इस अनियमितता व समय पर राशन न मिलने की शिकायत कई बार उच्च अधिकारियों से की गई, किन्तु अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
नियम विरूद्ध सौंपी दुकानें
जानकारों का कहना है कि ममान, बरहाई, गोइरा सहित बेली की शासकीय उचित मूल्य की दुकान नियमों के विपरीत जाकर दी गई है, सूत्रों का कहना है कि इसकी पूरी जिम्मेदारी पाली में शासकीय उचित मूल्य की दुकान दिलाने के लिए अग्रवाल नामक दलाल सक्रिय है, जो अधिकारियों से सांठ-गांठ कर एक ही व्यक्ति को कई दुकान दिलवाकर योजना में पलीता लगवा रहा है, इसी क्रम में गौतम जी का नाम जनपद में पहले नंबर पर है, जिन्हें उचित मूल्य की दुकान दी गई है, सूत्रों का कहना है कि लगभग 5 दुकानों का संचालन अकेले गौतम जी द्वारा करवाया जा रहा है, यह अलग बात है कि उन्हीं के रिश्तेदारों को उक्त दुकानें दी गई है।
पूर्व में हुआ था विरोध
ऐसा नहीं है कि गौतम जी का विवादों से नाता नहीं रहा है, पूर्व में जनपद पंचायत के घुनघुटी ग्राम में गौतम जी के कारनामों के चलते ग्रामीणों ने इनके खिलाफ बिगुल फूंक दिया था, लेकिन सेटिंग बनाने में माहिर गौतम जी को घुनघुटी क्षेत्र से तो हटाया गया, लेकिन उसके बाद भी गौतम जी अपने आपको 15-16 गांवों के मालिक समझने लगे हैं। इस पूरे मामले की जांच की जाये तो पूर्व में विभाग की जिम्मेदारी देख रहे और वर्तमान में मानपुर में पदस्थ चौकसे नामक बाबू ने इनकी सेटिंग करवा खूब मलाई खाई है, मामले में कितनी सत्यता है यह तो जांच के बाद ही सामने आ सकेगा, स्थानीय लोगों ने जिले में बैठे अधिकारियों से जांच कर कार्यवाही की मांग की है।

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