पिता की वर्दी अब बेटे के नाम….शहीद नहीं, लेकिन कर्तव्य निभाते पिता की विरासत को मिला सम्मान….2 साल 5 माह के पृथ्वीराज को मिली बाल आरक्षक की नियुक्ति पिता की कमी नहीं भर सकती, लेकिन भविष्य संवारने को आगे आया शासन स्वर्गीय आरक्षक के निधन के बाद मध्यप्रदेश शासन की अनुकंपा नीति से परिवार को मिला संबल, पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने सौंपा नियुक्ति पत्र
पिता की वर्दी अब बेटे के नाम….शहीद नहीं, लेकिन कर्तव्य निभाते पिता की विरासत को मिला सम्मान….2 साल 5 माह के पृथ्वीराज को मिली बाल आरक्षक की नियुक्ति पिता की कमी नहीं भर सकती, लेकिन भविष्य संवारने को आगे आया शासन
स्वर्गीय आरक्षक के निधन के बाद मध्यप्रदेश शासन की अनुकंपा नीति से परिवार को मिला संबल, पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने सौंपा नियुक्ति पत्र
पिता का साया सिर से उठ जाए, तो एक परिवार की दुनिया बदल जाती है। लेकिन जब वही पिता वर्दी पहनकर अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दुनिया छोड़ जाए, तब उनके परिवार का संबल बनना भी शासन और समाज का दायित्व होता है।
ऐसी ही एक भावुक तस्वीर कटनी में सामने आई, जब महज 2 साल 5 माह के मासूम पृथ्वीराज लोधी को बाल आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति का पत्र प्रदान किया गया। नन्हे हाथों में नियुक्ति पत्र था और परिजनों की आंखों में आंसुओं के साथ भविष्य की उम्मीद।
कटनी।। कभी-कभी शासन के फैसले सिर्फ एक औपचारिकता नहीं होते, बल्कि टूटे हुए परिवार के लिए उम्मीद की नई किरण बन जाते हैं। ऐसा ही एक भावुक पल उस समय देखने को मिला, जब महज 2 वर्ष 5 माह के मासूम पृथ्वीराज लोधी को बाल आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति का पत्र प्रदान किया गया।
पृथ्वीराज के पिता स्वर्गीय आरक्षक भूपेंद्र सिंह ठाकुर, जो जिला दमोह में पदस्थ थे, का शासकीय सेवा के दौरान एक सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन मध्यप्रदेश शासन की संवेदनशील अनुकंपा नियुक्ति नीति ने उस परिवार को यह भरोसा दिलाया कि कर्तव्यपथ पर बलिदान देने वाले कर्मियों के परिवार को शासन अकेला नहीं छोड़ता।
कटनी पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने आज पृथ्वीराज को बाल आरक्षक पद का नियुक्ति पत्र सौंपते हुए परिवार को आश्वस्त किया कि पुलिस परिवार अपने प्रत्येक सदस्य और उसके परिजनों के साथ हर परिस्थिति में खड़ा है।
यह नियुक्ति तत्काल नौकरी नहीं है, बल्कि शासन द्वारा उस मासूम के भविष्य को सुरक्षित करने की एक संवेदनशील व्यवस्था है। आज जो बच्चा अपनी नियुक्ति का अर्थ भी नहीं समझता, वही बड़ा होकर अपने पिता की वर्दी और उनके कर्तव्य की विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर पाएगा।
इस भावुक अवसर पर परिजनों की आंखें नम थीं, लेकिन उनमें भविष्य की उम्मीद भी साफ दिखाई दे रही थी। उन्होंने मध्यप्रदेश शासन और पुलिस विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस निर्णय ने उनके परिवार को मानसिक संबल और भविष्य का भरोसा दिया है। यह विषय बताती है कि मध्यप्रदेश शासन और पुलिस विभाग अपने कर्मियों के परिवारों के प्रति केवल जिम्मेदारी नहीं निभाते, बल्कि कठिन समय में उनके साथ संवेदनशीलता से भी खड़े रहते हैं। यह निर्णय मानवता, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरक उदाहरण है।