25 रुपए की एक नशीली गोली… 9 हजार गोलियों की 2.25 लाख की खेप 5760 ग्राम नाइट्राबेट के साथ दो गिरफ्तार, रंगनाथनगर पुलिस की कार्रवाई ने खड़े किए बड़े सवाल—आखिर इतनी बड़ी खेप आई कहां से, सप्लायर कौन और मास्टरमाइंड कौन
25 रुपए की एक नशीली गोली… 9 हजार गोलियों की 2.25 लाख की खेप
5760 ग्राम नाइट्राबेट के साथ दो गिरफ्तार, रंगनाथनगर पुलिस की कार्रवाई ने खड़े किए बड़े सवाल—आखिर इतनी बड़ी खेप आई कहां से, सप्लायर कौन और मास्टरमाइंड कौन

कटनी।। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच रंगनाथनगर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नशीली दवाओं की भारी खेप बरामद की है। पुलिस ने आर्डनेंस फैक्ट्री ग्राउंड के पीछे से दो युवकों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से नाइट्राजेपाम नाइट्राबेट की 9,000 गोलियां बरामद की हैं। जब्त गोलियों का कुल वजन करीब 5 किलो 760 ग्राम बताया गया है, जबकि इनकी बाजार कीमत करीब 2 लाख 25 हजार रुपए आंकी गई है।
पुलिस की कार्रवाई से नशीली गोलियों की एक बड़ी खेप तो पकड़ ली गई, लेकिन इस बरामदगी ने कटनी में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। आखिर 9 हजार गोलियां आरोपियों तक पहुंचीं कहां से, इतनी बड़ी खेप किसने उपलब्ध कराई, इसके पीछे कोई बड़ा सप्लायर या नेटवर्क तो नहीं, और इस पूरे कारोबार का मास्टरमाइंड कौन है
25 रुपए की एक गोली और हजारों गोलियों की खेप

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि इन गोलियों का उपयोग नशे के लिए किया जाता है तथा एक गोली की कीमत करीब 25 रुपए बताई गई। इस हिसाब से बरामद 9 हजार गोलियों की बाजार कीमत करीब 2 लाख 25 हजार रुपए होती है।
नशीली दवाओं का अवैध कारोबार केवल दवा की बिक्री तक सीमित नहीं रहता। ऐसी दवाओं के दुरुपयोग से युवाओं के नशे की गिरफ्त में जाने और अपराध की दुनिया से जुड़ने का खतरा भी बढ़ सकता है। यही वजह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीली गोलियों की बरामदगी को पुलिस के लिए गंभीर सफलता माना जा रहा है।
आर्डनेंस फैक्ट्री ग्राउंड के पीछे संदिग्ध हालत में मिले दोनों आरोपी

पुलिस के मुताबिक 1 अगस्त 2026 को रंगनाथनगर थाना पुलिस की टीम क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान आर्डनेंस फैक्ट्री ग्राउंड के पीछे दो व्यक्ति एक प्लास्टिक की बोरी लेकर संदिग्ध हालत में दिखाई दिए।
पुलिस को देखते ही दोनों ने भागने का प्रयास किया। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया। पूछताछ में उनकी पहचान पंकज उर्फ देवा मिश्रा, उम्र 38 वर्ष, निवासी रिलेक्सो शोरूम के पीछे बरगवां, थाना रंगनाथनगर और देवा कोल, उम्र 21 वर्ष, निवासी रिलेक्सो शोरूम के पीछे बरगवां, थाना रंगनाथनगर के रूप में हुई।
संदेह के आधार पर जब उनके पास मौजूद सफेद रंग की प्लास्टिक बोरी की तलाशी ली गई तो उसमें नाइट्राजेपाम की 30 पैकेट में कुल 9,000 गोलियां मिलीं।
अब असली जांच—गोलियां आई कहां से
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में वैधानिक कार्रवाई की गई है। लेकिन इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण कड़ी नशीली गोलियों की सप्लाई लाइन है।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने बताया है कि वे उक्त गोलियों को खरीदकर लाते थे। ऐसे में जांच का दायरा अब उन लोगों तक पहुंचना जरूरी है, जिनसे आरोपियों ने इतनी बड़ी मात्रा में गोलियां खरीदीं।
किससे खरीदी गईं,कहां से लाई गईं,किस वाहन या माध्यम से पहुंचीं, भुगतान कैसे हुआ, इससे पहले कितनी बार ऐसी खेप लाई गई और इन गोलियों को आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था इन सवालों के जवाब ही इस मामले की असली तस्वीर सामने ला सकते हैं।
क्या लंबे समय से चल रहा था नशे का कारोबार
9 हजार गोलियों की एक साथ बरामदगी के बाद यह सवाल भी उठना स्वाभाविक है कि क्या आरोपी पहली बार इतनी बड़ी खेप लेकर निकले थे या लंबे समय से नशीली गोलियों की खरीद-फरोख्त में सक्रिय थे।
पुलिस जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन, संपर्क में रहने वाले लोगों तथा पूर्व गतिविधियों की पड़ताल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आरोपियों के पीछे कौन लोग सक्रिय हैं और नशीली दवाओं की सप्लाई का नेटवर्क कितना बड़ा है।
पहले की कार्रवाइयों से भी जोड़ी जा सकती हैं कड़ियां
रंगनाथनगर पुलिस द्वारा पूर्व में भी नशे और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। ऐसे में मौजूदा मामले की जांच के दौरान पुराने मामलों में सामने आए आरोपियों, संदिग्ध सप्लायरों और मोबाइल नंबरों की भी पड़ताल किए जाने से महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आ सकती हैं।
यदि वर्तमान आरोपियों का संपर्क पहले पकड़े गए नशे के कारोबारियों या सप्लायरों से मिलता है तो मामला केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कटनी में नशीली दवाओं की सप्लाई करने वाले नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
हालांकि फिलहाल पुलिस जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए किसी व्यक्ति को मास्टरमाइंड या मुख्य सप्लायर कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन 9 हजार गोलियों की बरामदगी निश्चित रूप से इस दिशा में गंभीर जांच की जरूरत बताती है।
2.25 लाख का माल बाजार में पहुंचने से पहले पकड़ा
रंगनाथनगर पुलिस की कार्रवाई से नशीली गोलियों की यह खेप बाजार में पहुंचने से पहले ही जब्त हो गई। पुलिस ने 30 पैकेट में 9,000 नाइट्राजेपाम गोलियां, वजन करीब 5,760 ग्राम, जिनकी बाजार कीमत करीब 2,25,000 रुपए बताई गई है, बरामद की हैं। मामले में अपराध क्रमांक 331/2026 दर्ज कर धारा 8/21,22 एनडीपीएस एक्ट एवं धारा 5/13 मध्यप्रदेश ड्रग कंट्रोल अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी रंगनाथनगर उपनिरीक्षक अरुणपाल सिंह, सउनि बहादुर सिंह, प्रधान आरक्षक लालजी यादव, महेंद्र दुबे, अजय तिवारी, असंत सिंह, उमारमन बागरी, रामनेश शुक्ला, आरक्षक वीरेंद्र दहायत, रोशन तिवारी, निर्भय सिंह, अंकित पटेल, संतोष यादव, महिला आरक्षक रुचिका, नीलम, एनआरएस रमजान, संदीप तथा साइबर सेल के आरक्षक अमित की सराहनीय भूमिका बताई गई है। रंगनाथनगर पुलिस ने नशीली गोलियों की बड़ी खेप पकड़कर कार्रवाई की शुरुआत तो कर दी है, लेकिन इस मामले की असली सफलता तब मानी जाएगी जब 9 हजार गोलियों के पीछे छिपे सप्लायर, नेटवर्क और मुख्य सूत्रधार तक पुलिस पहुंचेगी।
क्योंकि सवाल सिर्फ 9 हजार गोलियां पकड़ने का नहीं है,सवाल यह है कि 25 रुपए की एक गोली वाला यह नशे का कारोबार कटनी में कितनी गहराई तक पहुंच चुका है और इसके पीछे आखिर कौन-कौन लोग सक्रिय हैं