रेत माफियाओं के आगे नतमस्तक प्रशासन! पीपरडोल नदी से दिन-रात हो रहा अवैध उत्खनन, ओवरलोड ट्रैक्टरों ने मरवाही की सड़कों को बनाया खस्ताहाल

0

मरवाही

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही क्षेत्र अंतर्गत आने वाली पीपरडोल नदी इन दिनों रेत माफियाओं का मुख्य गढ़ बन चुकी है। खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की लगातार अनदेखी और संदिग्ध मौन स्वीकृति के चलते रेत का अवैध उत्खनन व बेधड़क परिवहन थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिन-रात बिना किसी डर के दौड़ रहे ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की वजह से न केवल नदी का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह बर्बाद हो रहा है, बल्कि मरवाही क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों की सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं।

 

जर्जर सड़कें और उड़ती धूल से ग्रामीण बेहाल

 

पीपरडोल नदी तट से रेत लादकर बेधड़क दौड़ने वाले ओवरलोड ट्रैक्टरों ने पक्की सड़कों के परखच्चे उड़ा दिए हैं। सड़कों पर जगह-जगह गड्डों का साम्राज्य कायम हो चुका है, जिससे आए दिन बाइक सवार और राहगीर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। सड़कों से दिन-रात उड़ने वाले धूल के गुबार से राहगीरों और आसपास के ग्रामीणों का सांस लेना दूभर हो गया है। इसके बावजूद जिम्मेदार महकमा कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।

 

खनिज विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

 

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पीपरडोल नदी में हो रहे इस अवैध कारोबार की पूरी जानकारी खनिज विभाग और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को है। इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है या फिर फाइलों को दबा दिया जाता है। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? क्या जिला प्रशासन और खनिज विभाग ने रेत माफियाओं के आगे घुटने टेक दिए हैं?

 

एनजीटी और माइनिंग नियमों की उड़ रही धज्जियां

 

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और खनिज नियमों के अनुसार नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को नुकसान पहुँचाकर बिना वैध परमिट के रेत निकालना संगीन अपराध की श्रेणी में आता है। लेकिन पीपरडोल नदी में रेत माफिया बेखौफ होकर प्राकृतिक संपदा की लूट मचा रहे हैं।

 

‘हाल-ए-हलचल’ के सीधे सवाल:

 

पीपरडोल नदी पर कब होगी कड़ी कार्रवाई?

क्या खनिज विभाग केवल शिकायत का इंतजार करेगा या मौके पर छापेमारी कर गाड़ियों को जब्त करेगा?

 

सड़कों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

अवैध ओवरलोड परिवहन से टूटी सड़कों और ग्रामीणों को हो रही समस्याओं का जिम्मेदार कौन है?

 

माफियाओं के आकाओं पर कार्रवाई कब?

क्या प्रशासन केवल ट्रैक्टर चालकों तक सीमित रहेगा या इस पूरे काले कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य सरगनाओं पर नकेल कसेगा?

 

जनता अब कागजी आश्वासनों से तंग आ चुकी है। यदि पीपरडोल नदी में तत्काल अवैध उत्खनन बंद नहीं कराया गया और जर्जर सड़कों की सुध नहीं ली गई, तो क्षेत्रवासी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed