खोंगसरा–टेंगनमाड़ा के बीच सुखनाला में भालू की मौत, वन्यजीव संरक्षण पर फिर उठे सवाल लगातार वन्यजीवों की मौत से चिंतित लोग, सरकार और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

0

 

खोंगसरा/कोटा/बिलासपुर

 

बिलासपुर वन्य परिक्षेत्र।

बिलासपुर वन्य परिक्षेत्र के खोंगसरा-टेंगनमाड़ा के बीच स्थित सुखनाला में एक वृद्ध भालू का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, पत्रकार और वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भालू काफी समय से भोजन और पानी की तलाश में जंगल से निकलकर आसपास के गांवों और तेंदूपत्ता फड़ों के आसपास भटकता देखा जा रहा था।

ग्रामीणों का कहना है कि भालू की उम्र अधिक हो चुकी थी और उसे सुनने में भी परेशानी थी। इसके बावजूद समय रहते उसका रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि वन विभाग ने सक्रियता दिखाई होती तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी।

घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि सूचना देने के बाद भी विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी को लेकर असमंजस की स्थिति रही। वहीं, भालू के शरीर पर कुछ स्थानों पर चोट के निशान और एक पंजे के नाखून के पास क्षति जैसी स्थिति दिखाई देने से लोगों के बीच विभिन्न आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं। हालांकि इन चोटों का कारण और उनका मौत से संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वन विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।

 

*सामाजिक कार्यकर्ता वनप्रेमी प्रदीप शर्मा ने उठाए सवाल*

सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप कुमार शर्मा ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार वन्यजीवों की हो रही मौतें बेहद चिंताजनक हैं।

उन्होंने कहा,

“वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर विभाग और सरकार संवेदनशील नजर नहीं आती। मैंने कई बार अधिकारियों के माध्यम से सरकार को पत्र लिखे हैं, शिकायतें भी की हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि समय रहते निगरानी, रेस्क्यू और संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाती तो कई वन्यजीवों की जान बचाई जा सकती थी।”

उन्होंने आगे कहा कि केवल घटनाओं के बाद औपचारिक जांच करना पर्याप्त नहीं है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी, त्वरित रेस्क्यू टीम, जल स्रोतों का संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना आवश्यक है।

लगातार हो रही घटनाएं बढ़ा रहीं चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय में हिरण, तेंदुआ और अब भालू की मौत जैसी घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा करने तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

अब सभी की नजर वन विभाग की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि भालू की मौत किन कारणों से हुई और क्या इसे समय रहते बचाया जा सकता था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed