मसीही समाज छत्तीसगढ़ शासन के समान नागरिक संहिता UCC के साथ – बिशप डॉ. अतुल आर्थर

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छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समान नागरिक संहिता UCC कानून बनाए जाने से पूर्व विभिन्न समाज के प्रतिनिधियों से पक्ष व सुझाव लिया गया। विशेष कार्यशाला का आयोजन देवकीनंदन दीक्षित सभा भवन बिलासपुर में किया गया, आयोजन में प्रतिनिधित्व हेतु जिला कलेक्टर महोदय विजय दयाराम के. एवं सहायक आयुक्त गोपेश कुमार मनहर द्वारा जिले से प्रतिनिधित्व करने के लिए विभिन्न समाज के प्रतिनिधियों एवं जनप्रतिनिधियों को अवसर प्रदान किया गया, जीपीएम जिले से मसीह समाज की ओर से छत्तीसगढ़ के बिशप डॉ. अतुल आर्थर एवं मसीह समाज के अध्यक्ष प्रफुल्ल जेम्स उपस्थित हुए उन्होंने अपने समाज का पक्ष रखा और कहा कि समान नागरिक संहिता को बहुत ही गंभीरता से समझने के पश्चात मसीही समाज सरकार के न्याय कानून UCC के साथ है।

 

*चार प्रमुख बिंदुओं पर लागू होगा नया कानून*

गौरतबल है कि छत्तीसगढ़ में नया कानून लागू किया जाना है जिसके लिए उच्च स्तरीय समिति का निर्माण किया गया है जिन्हें कानून लागू होने से पूर्व अपनी रिपोर्ट जमा करना है, समिति में पूर्व कलेक्टर एम. के.राउत व अन्य प्रमुख सदस्य शामिल थे। बिशप डॉ.अतुल आर्थर ने कहा कि जब पर्सनल लॉ के कारण समाज के किसी वर्ग के साथ अन्याय और प्रताड़ना होता है तो न्याय व स्वस्थ समाज की स्थापना हेतु विशिष्ट कानून लागू किए जाना आवश्यक हो जाता है, छत्तीसगढ़ समान नागरिक संहिता के अंतर्गत चार प्रमुख बिंदु है, जिसपर विशेष चर्चा की गई, विवाह एवं तलाक, उत्तराधिकार एवं विरासत, भरण एवं सहायता, और लाइव इन संबंध। उपरोक्त तीन बिंदुओं पर मसीह समाज किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं रखता परंतु कानून लागू करने से पूर्व इस बात का भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए कि अगर कोई नया कानून बनाया जाता है तो संविधान के आर्टिकल 25 और 26 के धार्मिक स्वतंत्रता पर किसी प्रकार का प्रहार, प्रभाव व छेड़छाड़ नहीं किया जाना चाहिए।

 

*समान नागरिक संहिता के चौथा बिंदु लाइव इन रिलेशन पर आपत्ति*

UCC के चौथे बिंदु लिव इन संबंध पर अतुल आर्थर ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रकार के संबंध भारतीय संस्कृति , व हमारे स्वस्थ समाज के लिए घातक है, अगर इस तरह के संबंधों को मान्यता प्रदान की गई तो विवाह जैसे पवित्र संस्कारों की जरूरत ही नहीं होगी, अतः कोई भी धर्म व समाज इसको स्वीकार नहीं कर सकते न ही मान्यता दे सकते है, और इस तरह के संबंधों पर रोक लगाया जाना जरूरी है इसलिए यूसीसी में इसको शामिल न किया जाए , बल्कि इस पर विशेष रूप से विभिन्न समाज व धार्मिक समूहों को समाज के बीच नैतिक मूल्यों कि सुदृढ़ स्थापना व बढ़ाने हेतु नई पीढ़ी को सिखाया जाना बहुत जरूरी है, चौथे बिंदु को अगर अलग या संशोधित कर दिया जाए तो मसीही समाज, समान नागरिक संहिता के पक्ष में सरकार के नए प्रस्तावित कानून के साथ है। कार्यशाला में विभिन्न जिलों के अलावा जीपीएम जिले से समाज व अन्य जनप्रतिनिधि भी कार्यशाला में उपस्थित थे।

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