अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कोडीन कफ सिरप,कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासन सख्त, दवा विक्रेताओं के लिए मासिक सीमा तय बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई, हर पर्चे पर लगानी होगी सील और तारीख

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अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कोडीन कफ सिरप,कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासन सख्त, दवा विक्रेताओं के लिए मासिक सीमा तय
बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई, हर पर्चे पर लगानी होगी सील और तारीख
कटनी।। जिले में कोडीन युक्त कफ सिरप और नार्कोटिक्स दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अब इन दवाओं की बिक्री और खरीद पर सख्त निगरानी लागू कर दी है। नए निर्देशों के तहत बिना डॉक्टर की वैध पर्ची के कोडीन युक्त कफ सिरप या नार्कोटिक्स दवाएं बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
ड्रग इंस्पेक्टर सोनम जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि अब सीएंडएफ एजेंसियों से थोक विक्रेता एक पैक साइज में अधिकतम 1000 बोतल ही प्राप्त कर सकेंगे। वहीं फुटकर दवा विक्रेताओं को एक माह में अधिकतम 50 बोतल तक खरीद और बिक्री की अनुमति होगी। प्रशासन का मानना है कि इससे अवैध भंडारण और नशे के कारोबार पर अंकुश लगेगा।
विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि कोई व्यक्ति या विक्रेता निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में कोडीन युक्त दवाओं की खरीद-बिक्री करता है तो इसकी जानकारी तुरंत औषधि निरीक्षक को ई-मेल या व्हाट्सएप के माध्यम से देना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
एक ही पर्चे का दोबारा इस्तेमाल रोकने नई व्यवस्था
प्रशासन ने यह भी अनिवार्य किया है कि दवा देने के बाद मेडिकल स्टोर संचालक संबंधित डॉक्टर की पर्ची पर अपनी सील, हस्ताक्षर और तारीख अंकित करेंगे। इससे एक ही प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार उपयोग कर दवाएं खरीदने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार कोडीन आधारित कफ सिरप का कई स्थानों पर नशे के रूप में दुरुपयोग किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह सख्ती लागू की गई है। विभाग ने केमिस्ट एसोसिएशन से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सभी मेडिकल संचालकों को नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार कोडीन एक ओपिओइड आधारित दवा है, जो दर्द निवारक और खांसी की दवा के रूप में उपयोग होती है। यह शेड्यूल एच श्रेणी की दवा है, जिसे बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के बेचना या खरीदना गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है। बिना चिकित्सकीय सलाह इसके सेवन से सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक नींद और लत लगने जैसे गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले में नशे के खिलाफ एक बड़े अभियान के रूप में देखा जा रहा है, जिससे युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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