गौरेला में पेयजल संकट से हाहाकार: पार्षदों का फूटा गुस्सा, नगर पालिका में तालाबंदी का दिया अल्टीमेटम, क्या कहा अध्यक्ष ने?

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मोहम्मद शाकिब खान मुख्य संवाददाता गौरेला see video

 

गौरेला (जीपीएम): भीषण गर्मी के मौसम में गौरेला नगर पालिका क्षेत्र में पेयजल की भारी किल्लत हो गई है। पानी की समस्या, वार्डों में लाइट न होने और रुके हुए विकास कार्यों से नाराज होकर सभी पार्षदों ने एकजुट होकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को ज्ञापन सौंपा है। पार्षदों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे नगर पालिका कार्यालय में तालाबंदी करेंगे।

 

“अधिकारी मस्त, जनता त्रस्त”:

मीडिया से बात करते हुए पार्षदों ने बताया कि “अधिकारी मस्त हैं और जनता त्रस्त है।” शहर में राशन कार्ड, सफाई और बिजली जैसी कई समस्याएं हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है। जल संकट के कारण जनता में अपने चुने हुए पार्षदों के खिलाफ भी भारी आक्रोश पैदा हो रहा है।

 

ग्रामीण फीडर से जुड़ा है जलाशय, कटती है बिजली:

ज्ञापन और पार्षदों के बयान के अनुसार, गौरेला नगर में पेयजल की आपूर्ति मल्हनिया जलाशय से की जाती है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इस जलाशय का पंप ‘ग्रामीण विद्युत फीडर’ से जुड़ा हुआ है। थोड़ी सी भी हवा चलने या बारिश होने पर ग्रामीण फीडर की लाइट गोल हो जाती है, जिससे पंप बंद हो जाते हैं और पूरे शहर की जल आपूर्ति ठप हो जाती है। हालात यह हैं कि लोगों को दो-दो, तीन-तीन दिनों तक पानी नहीं मिल पा रहा है।

 

बिना सूचना नहर सफाई से बढ़ी परेशानी:

पार्षदों ने प्रशासन के एक तुगलकी फरमान पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बीच बिना किसी पूर्व सूचना या मुनादी के नहर (कैनाल) की सफाई का काम शुरू करवा दिया गया। इसके कारण पानी की सप्लाई रोक दी गई है। पार्षदों का कहना है कि यह काम गर्मी से पहले होना चाहिए था, या कम से कम जनता को पूर्व सूचना दी जानी चाहिए थी ताकि लोग पानी स्टोर कर सकें।

 

अधिकारियों की लापरवाही पर नगर पालिका अध्यक्ष ने उठाए सवाल:

 

इस पूरे मामले में नगरपालिका परिषद गौरेला के अध्यक्ष मुकेश दुबे का बयान भी सामने आया है। उन्होंने इस बदहाली के लिए सीधे तौर पर अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। अध्यक्ष ने बताया कि:

 

आज से एक वर्ष पूर्व ही मंत्री द्वारा चार पानी टैंकरों की खरीदी के लिए स्वीकृति और राशि जारी कर दी गई थी।

 

नगर पालिका परिषद की बैठक में पंप खरीदी का भी अनुमोदन किया जा चुका है।

 

साथ ही, मल्हनिया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जल शोधन संयंत्र एवं उसमें प्रयुक्त सामग्री की राशि का भी अनुमोदन किया जा चुका है।

 

अध्यक्ष मुकेश दुबे का आरोप है कि परिषद से सब कुछ स्वीकृत होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण इन जरूरी चीजों की खरीदी नहीं की जा रही है, जिसका परिणाम गौरेला के आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

 

पार्षदों की प्रमुख मांगें:

वैकल्पिक व्यवस्था: जब तक मल्हनिया जलाशय को ग्रामीण फीडर से हटाकर ‘शहरी फीडर’ में नहीं जोड़ा जाता, तब तक शहर के बंद पड़े पुराने बोरवेल में ज्यादा एचपी (HP) के पंप डालकर जल आपूर्ति चालू की जाए।

 

बिजली और विकास: वार्डों के बिजली खंभों पर पिछले एक वर्ष से बल्ब/लाइट नहीं लगी है, उसे तुरंत लगाया जाए और ठप पड़े विकास कार्यों को गति दी जाए।

 

28 अप्रैल को तालाबंदी की चेतावनी

पार्षदों ने अपने ज्ञापन (दिनांक 21.04.2026) के माध्यम से प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि 27 अप्रैल 2026 तक उपरोक्त मांगों का निराकरण नहीं होता है, तो 28 अप्रैल 2026 को सभी जनप्रतिनिधि नगर पालिका कार्यालय का घेराव करेंगे और तालाबंदी की जाएगी। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। पार्षदों ने बताया कि वे इस मामले को लेकर कलेक्टर महोदय के पास भी जाएंगे।

 

इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान रोशनी शर्मा (उपाध्यक्ष), मनोज विश्वकर्मा, आयुष सोनी, रियाज कुरैशी, राजेश अग्रवाल, नीलेश साहू, शाहिना परवीन, अरुणा चक्रधारी, अलका ताम्रकार, विक्रांत कुमार रोहाणी और अमृता मरावी सहित कई पार्षद और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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