भ्रष्टाचार छिपाने दस्तावेजों से खेल! गोरखपुर पंचायत सचिव पर RTI की जानकारी न देने का आरोप, खातों पर रोक लगाने की मांग की शिकायत की गई।
ठाकुर घनश्याम सिंह
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: गौरेला – जिले के विकासखंड गौरेला के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गोरखपुर में भारी वित्तीय अनियमितता और फर्जी बिलिंग के आरोप लगे हैं। मामले को लेकर एक स्थानीय नागरिक ने पंचायत सचिव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

आरोप है कि आरटीआई के तहत विकास कार्यों का ब्यौरा मांगने पर 30 दिन बीत जाने के बाद भी जानबूझकर जानकारी नहीं दी गई।
नाराज शिकायतकर्ता ने अब जनपद पंचायत सीईओ और कलेक्टर से मामले की शिकायत कर सचिव के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई और पंचायत के खातों से लेन-देन पर रोक लगाने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम पंचायत गोरखपुर के ककरहियापारा निवासी मोहम्मद शाकिब खान ने 19 मार्च 2026 को ऑनलाइन ‘सूचना का अधिकार’ (RTI) अधिनियम के तहत एक आवेदन प्रस्तुत किया था। इस आवेदन में उन्होंने वर्ष 2024 से 2026 के बीच पंचायत में हुए विकास कार्यों, 15वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त राशि, खर्च का विवरण, निर्माण सामग्री के बिल-वाउचर और मापन पुस्तिका (MB) की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। ग्राम पंचायत सचिव श्रीमती कविता राठौर इस मामले में जन सूचना अधिकारी हैं।
30 दिन बीते, नहीं मिली जानकारी; प्रथम अपील दायर:
आरटीआई अधिनियम की धारा 7(1) के तहत 30 दिन के भीतर जानकारी प्रदान करना अनिवार्य है। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक महीना बीत जाने के बाद भी सचिव द्वारा न तो कोई जानकारी दी गई और न ही कोई पत्राचार किया गया। समय-सीमा समाप्त होने के बाद, शाकिब खान ने 20 अप्रैल 2026 को जनपद पंचायत गौरेला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (प्रथम अपीलीय अधिकारी – शुभा दामोदर मिश्रा) के समक्ष प्रथम अपील दायर कर दी है।
भ्रष्टाचार छिपाने का आरोप, कलेक्टर व सीईओ से शिकायत:
शाकिब खान ने जनपद पंचायत सीईओ को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है (जिसकी प्रतिलिपि जिला कलेक्टर को भी भेजी गई है)। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि पंचायत के निर्माण कार्यों में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। उनका स्पष्ट कहना है कि भ्रष्टाचार और फर्जी बिलिंग को छिपाने के दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से ही जन सूचना अधिकारी (सचिव) द्वारा शासकीय दस्तावेजों को दबाया जा रहा है।
शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें:
कारण बताओ नोटिस: सूचना का अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन करने और शासकीय रिकॉर्ड छिपाने के आरोप में पंचायत सचिव श्रीमती कविता राठौर को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर सख्त कार्रवाई की जाए।
निःशुल्क जानकारी: अधिनियम की धारा 7(6) के तहत, 30 दिन की अवधि समाप्त होने के कारण, चाही गई संपूर्ण जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए।
खातों पर रोक: जब तक सभी बिल-वाउचर और दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाते, तब तक दस्तावेजों के साथ संभावित छेड़छाड़ को रोकने के लिए पंचायत के खातों से आगे के वित्तीय आहरण (पैसे निकालने) पर तत्काल रोक लगाई जाए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस गंभीर शिकायत और आरटीआई अपील के बाद जनपद पंचायत प्रशासन और जिला प्रशासन ग्राम पंचायत गोरखपुर के वित्तीय रिकॉर्ड्स की जांच के लिए क्या कदम उठाता है।