वायरल वीडियो के बाद बड़ा सवाल कब से चल रहा है कबाड़ का खेल, कितनी अमानत में हुई खयानत कितना माल गायब और कौन जिम्मेदार….जांच में खुल सकते हैं बड़े राज वायरल वीडियो पर घिरे अतिक्रमण अधिकारी, सवालों से बचने की कोशिश या सच्चाई छिपाने का प्रयास, जब आम जनता पर चालान और कार्रवाई, तो निगम कर्मचारियों पर जवाबदेही क्यों नहीं

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वायरल वीडियो के बाद बड़ा सवाल कब से चल रहा है कबाड़ का खेल, कितनी अमानत में हुई खयानत कितना माल गायब और कौन जिम्मेदार….जांच में खुल सकते हैं बड़े राज
वायरल वीडियो पर घिरे अतिक्रमण अधिकारी, सवालों से बचने की कोशिश या सच्चाई छिपाने का प्रयास, जब आम जनता पर चालान और कार्रवाई, तो निगम कर्मचारियों पर जवाबदेही क्यों नहीं
कटनी।। नगर निगम के अतिक्रमण विभाग से जुड़े वायरल वीडियो को लेकर शुरू हुआ विषय अब और गहराता जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद जहां शहरभर में जब्त सामग्री के रखरखाव और उसके निस्तारण को लेकर सवाल उठे, वहीं अब अतिक्रमण अधिकारी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण ने भी नए प्रश्नो को जन्म दे दिया है। मामले की निष्पक्ष जांच कराने और तथ्यों को सामने लाने की बजाय अधिकारी पूरे प्रकरण से बचते नजर आ रहे हैं।
गौरतलब है कि गत दिवस पूर्व सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित रूप से अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान जब्त की गई लोहे की सामग्री को ले जाते हुए कुछ लोग दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के एक हिस्से में एक व्यक्ति स्वयं यह कहते हुए सुनाई देता है कि सामान बेचने के लिए ले जाया जा रहा है और उसे भी हिस्सा चाहिए, अन्यथा वह मानवेंद्र सर को जानकारी दे देगा। वहीं एक अन्य व्यक्ति वीडियो को किसी ग्रुप में साझा नहीं करने की बात कहता सुनाई देता है। हालांकि वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन वीडियो में दिखाई और सुनाई दे रही बातें नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही हैं।

स्पष्टीकरण से ज्यादा बढ़े सवाल
विवाद बढ़ने के बाद अतिक्रमण अधिकारी मानवेंद्र सिंह ने एक निजी चैनल को दिए बयान में कहा कि वायरल वीडियो पूरी तरह निराधार है और उसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति नगर निगम का कर्मचारी नहीं है।
लेकिन अधिकारी का यह बयान भी सवालों के घेरे में आ गया है। संबंधित व्यक्ति भले ही आउटसोर्स कर्मचारी हो, लेकिन वह नगर निगम के लिए ही कार्य करता है और अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान नियमित रूप से मौजूद रहता है। नगर निगम द्वारा विभिन्न समाचार समूहों में जारी तस्वीरों में भी ऐसे कर्मचारी कई बार दिखाई दिए हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि यदि कर्मचारी निगम के लिए कार्य कर रहा था तो उसकी गतिविधियों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है….केवल आउटसोर्स बताकर क्या विभाग अपनी जवाबदेही से मुक्त हो सकता है।
आखिर जब्त सामग्री का हिसाब किसके पास….
शहरवासियों का सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान जब्त की गई सामग्री का रिकॉर्ड कहां रखा जाता है। उसका स्टॉक रजिस्टर कौन संधारित करता है। सामग्री कब जमा हुई, कितनी हुई और उसका अंतिम निस्तारण किस आदेश के आधार पर किया गया। यदि वीडियो में दिखाई जा रही सामग्री निगम की नहीं थी तो प्रशासन को रिकॉर्ड सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। और यदि सामग्री निगम की थी तो उसे ले जाने की अनुमति किसने दी, यह भी जांच का विषय है।
अमानत में खयानत का गंभीर सवाल
कानूनी दृष्टि से किसी कार्रवाई के दौरान जब्त की गई सामग्री संबंधित विभाग की अभिरक्षा में रहती है। जब तक उसका विधिवत निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक वह विभाग के संरक्षण में रखी गई अमानत मानी जाती है। यदि किसी भी स्तर पर जब्त सामग्री का अनधिकृत उपयोग, बिक्री या गायब होना सिद्ध होता है, तो यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि अमानत में खयानत जैसे गंभीर आरोपों की श्रेणी में आने वाला विषय बन सकता है।
अधिकारी अनजान थे या निगरानी व्यवस्था फेल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यदि कर्मचारियों द्वारा कोई अनियमित गतिविधि की जा रही थी तो क्या वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी, और यदि जानकारी थी तो अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
नगर निगम आए दिन आम नागरिकों, दुकानदारों और व्यापारियों पर अतिक्रमण के नाम पर चालान और कार्रवाई करता है। ऐसे में जनता यह पूछ रही है कि जब नियम तोड़ने पर आम नागरिकों को दंडित किया जा सकता है तो विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जाती।


कब से चल रहा है कबाड़ का यह खेल, कितना माल गायब हुआ
वायरल वीडियो के सामने आने के बाद अब यह सवाल भी तेजी से उठने लगा है कि यदि वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधियां सही हैं तो आखिर यह कथित कबाड़ का खेल कब से चल रहा है। क्या यह कोई पहली घटना है या फिर लंबे समय से जब्त सामग्री के रखरखाव और निस्तारण की आड़ में ऐसा होता रहा है.यदि जांच होती है तो केवल वायरल वीडियो तक सीमित रहने के बजाय पिछले वर्षों में अतिक्रमण एवं जर्जर भवन कार्रवाई के दौरान जब्त की गई सामग्री का भी ऑडिट कराया जाना चाहिए। नगर निगम द्वारा हर वर्ष बड़ी मात्रा में लोहे, टीन, एंगल, गुमटियों और अन्य सामग्री की जब्ती की जाती है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि जब्त सामग्री का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं, कितनी सामग्री निगम के गोदामों में जमा है और कितनी सामग्री का नियमानुसार निस्तारण किया गया। यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि कथित तौर पर जब्त सामग्री को बेचने या हटाने का खेल चल रहा था तो अब तक कितनी अमानत में खयानत हो चुकी है और उससे नगर निगम को कितना आर्थिक नुकसान पहुंचा है। यही कारण है कि लोग पूरे मामले की गहन जांच के साथ-साथ पिछले वर्षों के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की मांग कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मामला केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा और पुराना खेल छिपा हुआ है।
यह सवाल अब सिर्फ एक वीडियो का नहीं, बल्कि नगर निगम की जवाबदेही, पारदर्शिता और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा का बन चुका है।
क्या कार्रवाई हो सकती हैं यदि जांच सही पाई गईं तो..
अमानत में खयानत (Criminal Breach of Trust) भारतीय कानून में एक गंभीर अपराध माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति को किसी संपत्ति, धन, सामान या वस्तु की जिम्मेदारी सौंपी गई हो और वह उसका दुरुपयोग करे, गबन कर ले, बेच दे या अपने निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करे, तो उस पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है। वर्तमान में यह अपराध मुख्य रूप से भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के अंतर्गत आता है, जिसने पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 का स्थान लिया है।
अमानत में खयानत के मामले में संभावित कार्रवाई
पुलिस द्वारा प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा सकती है।
मामले की जांच की जाती है और संबंधित रिकॉर्ड, दस्तावेज एवं साक्ष्य जुटाए जाते हैं। यदि सरकारी संपत्ति, जब्त सामग्री या सार्वजनिक धन का दुरुपयोग पाया जाता है तो विभागीय जांच भी शुरू हो सकती है।
दोष सिद्ध होने पर कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो सकता है। यदि व्यक्ति सरकारी कर्मचारी या सार्वजनिक पद पर है तो निलंबन, विभागीय दंड, सेवा से बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई भी संभव है।
नगर निगम के मामले में महत्वपूर्ण प्रश्न
यदि किसी नगर निगम या सरकारी विभाग द्वारा जब्त की गई सामग्री विभागीय अभिरक्षा (custody) में रखी गई थी और जांच में यह साबित हो जाए कि उसे बिना अनुमति बेचा गया, गायब किया गया या निजी लाभ के लिए उपयोग किया गया, तो मामला केवल विभागीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसी स्थिति में:आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है।
संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो सकती है। स्टॉक रजिस्टर, जब्ती पंचनामा, नीलामी रिकॉर्ड और गोदाम रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। सरकारी राजस्व को हुई हानि का आकलन किया जा सकता है।
हालांकि नगर निगम के मामले में अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए कानूनी रूप से यह कहना उचित होगा कि यदि जांच में जब्त सामग्री के दुरुपयोग या गबन की पुष्टि होती है, तभी अमानत में खयानत अथवा अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई का प्रश्न उत्पन्न होगा।
निष्पक्ष जांच ही दूर करेगी संदेह
फिलहाल पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की है। जांच से ही स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो में दिख रही गतिविधियां वास्तव में क्या थीं, सामग्री कहां से आई थी, कहां ले जाई जा रही थी और क्या विभागीय प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं। जब तक जांच नहीं होती, तब तक सवाल बने रहेंगे। लेकिन यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह नगर निगम की संपत्ति, राजस्व और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मामला साबित हो सकता है। वहीं यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो अधिकारियों को भी सार्वजनिक रूप से तथ्य रखकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। नजर अब इस बात पर टिकी है कि नगर निगम प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाता है या फिर यह यह विषय भी समय के साथ अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

इनका कहना हैं :-
सुभाष चौक में जर्जन भवन की कार्रवाई के दौरान 88 फुट के एंगल को जप्त किया गया था जिसके बाद वैधानिक कार्रवाई करते हुए उक्त एंग्लो सामग्री को संबंधित विभाग को लौटाया गया था वहीं वायरल वीडियो देश पूर्ण भावना से बनाया गया है कुछ दिन पूर्व एक कर्मचारी को काम में लेट आने की वजह से कम से निकाल देने की बात कही गई थी जिस पर वह क्रोधित होकर बदनाम करने की नीयत से इस वीडियो को बनाया था। उक्त व्यक्ति के द्वारा स्वयं उपस्थित होकर इस विषय पर अपना बयान दिया जाएगा
मानवेंद्र सिंह((अतिक्रमण अधिकारी नगर निगम कटनी ))

(नोट : यह समाचार वायरल वीडियो, उपलब्ध दृश्य सामग्री और संबंधित पक्षों द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। वीडियो की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच के बाद ही सामने आएंगे। संबंधित अधिकारी द्वारा आरोपों को निराधार बताया गया है।) :::

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