922 एकड़ जमीन से 1600 मेगावाट पावर प्रोजेक्ट तक, टोरेंट पर बढ़ा कानूनी शिकंजा
भूमि हस्तांतरण से पर्यावरण मंजूरी तक सवालों के घेरे में परियोजना, बुद्धसेन राठौर की शिकायत के बाद केंद्र ने मांगा रिकॉर्ड
इंट्रो — 60 शब्द:
अनूपपुर में प्रस्तावित टोरेंट पावर के 1600 मेगावाट थर्मल पावर प्रोजेक्ट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। 922 एकड़ जमीन के हस्तांतरण और पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर उठे सवाल अब केंद्र सरकार और राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक पहुंच गए हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य बुद्धसेन राठौर की शिकायत और NGT में अपील के बाद परियोजना की प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गई है।
922 एकड़ जमीन के हस्तांतरण पर उठे गंभीर सवाल
अनूपपुर तहसील के खसरा, कोलमी और देकाल गांव में प्रस्तावित टोरेंट पावर के 2×800 मेगावाट यानी कुल 1600 मेगावाट कोल बेस्ड अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है। मामला करीब 476.788 हेक्टेयर यानी 922 एकड़ जमीन से जुड़ा है। यह जमीन वर्षों पहले किसानों से पावर प्लांट के उद्देश्य से अधिग्रहित की गई थी।
बुद्धसेन राठौर की शिकायत के अनुसार सितंबर 2025 में न्यू जोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने यह पूरी जमीन टोरेंट पावर लिमिटेड को हस्तांतरित कर दी। आरोप है कि इस प्रक्रिया में पुनर्व्यवस्थापन नीति, 2007 के पैराग्राफ 6.25 में दिए गए प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
राठौर का कहना है कि अधिग्रहित जमीन का उद्देश्य बदलने अथवा उसे दूसरी कंपनी को हस्तांतरित करने की स्थिति में विस्थापित किसानों के हितों की सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़े प्रावधानों पर अमल किया जाना जरूरी था। उनका आरोप है कि किसानों को नए सिरे से मुआवजा और पुनर्वास दिए बिना जमीन टोरेंट पावर को हस्तांतरित कर दी गई।
यही आरोप अब इस पूरे मामले का अहम बिंदु बन गया है। सवाल यह है कि किसानों से अधिग्रहित जमीन के हस्तांतरण के दौरान पुनर्वास नीति के प्रावधानों का कितना पालन हुआ और क्या प्रभावित किसानों के हितों को पर्याप्त सुरक्षा मिली?
बुद्धसेन की शिकायत पर केंद्र सक्रिय, रिकॉर्ड सत्यापन के निर्देश
इसी मामले को लेकर पूर्व जिला पंचायत सदस्य बुद्धसेन राठौर ने 7 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार के समक्ष शिकायत की। शिकायत में जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया और किसानों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को उठाया गया।
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के निदेशक ने मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग, वल्लभ भवन को पत्र भेजा। पत्र में NRRP-2007 की प्रयोज्यता, 22 अक्टूबर 2012 के पुनर्वास आदेश और 13 जून 2025 की बैठक की वैधता की जांच का विषय उठाया गया है। पत्र की प्रति कलेक्टर अनूपपुर को भी भेजी गई है और जिला स्तर पर रिकॉर्ड का सत्यापन करने को कहा गया है।
इस घटनाक्रम ने जमीन हस्तांतरण के मामले को और गंभीर बना दिया है। अब यह केवल स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और पूर्व आदेशों की वैधानिक स्थिति भी जांच का विषय बन गई है।
बुद्धसेन राठौर की ओर से लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच अब प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 922 एकड़ जमीन के हस्तांतरण में संबंधित नियमों और पुनर्वास प्रावधानों का पालन हुआ था या नहीं।
पर्यावरण मंजूरी भी NGT में चुनौती, 6 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
जमीन हस्तांतरण विवाद के साथ ही टोरेंट पावर की पर्यावरणीय मंजूरी भी न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है। 17 अप्रैल 2026 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) द्वारा दी गई पर्यावरणीय मंजूरी को बुद्धसेन राठौर ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल में अपील क्रमांक 13/2026 (CZ) के माध्यम से चुनौती दी है।
25 अगस्त 2026 को NGT में हुई सुनवाई में न्यायिक सदस्य जस्टिस शेओ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मामले की सुनवाई की। NGT ने संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। आदेश में जवाब E-filing पोर्टल के माध्यम से searchable PDF/OCR PDF में दाखिल करने को कहा गया है।
NGT ने अपीलकर्ता को अपील और संबंधित दस्तावेज प्रतिवादियों को उपलब्ध कराने तथा सेवा की पुष्टि के लिए शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं। वहीं I.A. No.121/2026, जिसमें देरी माफी और अंतरिम आदेश से संबंधित मांग की गई है, उस पर भी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया गया है। दस्तावेजों की अनुवादित प्रति दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
हालांकि NGT के 25 अगस्त के आदेश में अभी पर्यावरणीय मंजूरी को रद्द करने या परियोजना पर रोक लगाने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया है। अधिकरण ने फिलहाल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
ऐसे में अब निगाहें एक ओर केंद्र और जिला प्रशासन द्वारा 922 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड एवं पुनर्वास प्रक्रिया की जांच पर हैं, वहीं दूसरी ओर NGT की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। बुद्धसेन राठौर द्वारा उठाए गए जमीन, पुनर्वास और पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़े सवालों का जवाब अब संबंधित रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए सामने आना है।