अपराधियों की पहली पसंद बना जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही पुलिस का खौफ खत्म, पहले हत्या-लूट और अब दिनदहाड़े पुलिस बनकर व्यापारी का अपहरण!
गौरेला पेंड्रा मरवाही
मरवाही। जिले में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर आ चुकी है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया है, बल्कि वे खुद ‘खाकी’ का भेष धरकर सरेआम वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। ग्राम उषाढ में दिनदहाड़े एक व्यवसायी का पिस्तौल की नोक पर हुआ अपहरण इस बात का चीख-चीख कर प्रमाण दे रहा है कि मरवाही पुलिस पूरी तरह से नकारा और पंगु साबित हो रही है।
फिल्मी तर्ज पर दिनदहाड़े अपहरण, तमाशबीन बनी पुलिस
जानकारी के अनुसार, ग्राम उषाढ में किराना और छड़-सीमेंट के व्यवसायी गिरीश यादव का उनके ही घर से अपहरण कर लिया गया। सुबह 11 बजे, जब आम तौर पर चहल-पहल होती है, एक नीले रंग की कार से आए दो बदमाशों ने इस दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया।
बदमाशों ने पहले दुकान पर मौजूद बेटे पंकज से सिगरेट-पानी लिया और फिर सीधे घर के अंदर घुस गए। सोते हुए गिरीश यादव को उठाया, खुद को पुलिसकर्मी बताया और स्टील रंग की पिस्तौल तान दी। जब व्यवसायी ने विरोध किया, तो पैर में गोली मारने की धमकी देते हुए उसे जबरन कार में ठूंस लिया गया।
व्यवसायी के भाई मनीष जायसवाल ने बदमाशों की गाड़ी रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन अपराधी बेखौफ होकर गाड़ी (जिसका आंशिक नंबर OD 8552 बताया जा रहा है) मरवाही की तरफ भगा ले गए।
एफआईआर की रस्म अदायगी में जुटा पुलिस प्रशासन
पूरी घटना सीसीटीवी में कैद है, जिसमें अपहरणकर्ता साफ नजर आ रहे हैं। लेकिन हमेशा की तरह पुलिस लकीर पीटती नजर आ रही है। एडिशनल एसपी अविनाश मिश्रा ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3), 3(5), 333, 351(3) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज होने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली है।
सवाल यह है कि जब अपराधी दिन के उजाले में घर में घुसकर अपहरण कर रहे हैं, तो पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र कहां सो रहा था?
पुलिस की नाकामी के ज्वलंत प्रमाण:
लगातार खूनी वारदातें: हाल ही में कोटमी में एक व्यापारी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस उस मामले में भी अपराध रोकने में पूरी तरह विफल रही।
लूट का खुला खेल: महज 10 दिन पहले ही जिले में लूट की एक बड़ी घटना को अंजाम दिया गया, लेकिन पुलिस के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
नशे का बेखौफ काला कारोबार: जिले में अपराधों की असली जड़ अवैध नशा है, जो पुलिस की नाक के नीचे धड़ल्ले से बिक रहा है। नाइट्रा, मेडिकल नशा, गांजा, मध्य प्रदेश की अवैध अंग्रेजी शराब और कच्ची महुआ शराब का कारोबार चरम पर है।
माफिया निडर होकर अपना नेटवर्क चला रहे हैं और ऐसा लगता है जैसे उन्हें स्थानीय पुलिस का मौन समर्थन प्राप्त हो।
क्या पुलिस किसी और अनहोनी का इंतजार कर रही है?
मरवाही की जनता अब दहशत के साये में जीने को मजबूर है। एक के बाद एक हो रही हत्या, लूट और अपहरण की घटनाओं ने साबित कर दिया है कि जिले की कानून-व्यवस्था अब गुंडों और नशे के सौदागरों के हाथों में गिरवी रखी जा चुकी है।
अगर पुलिस इसी तरह कुंभकर्णी नींद सोती रही और केवल कागजों पर धाराएं दर्ज कर अपनी पीठ थपथपाती रही, तो वह दिन दूर नहीं जब मरवाही पूरी तरह से अपराधियों की राजधानी बन जाएगा। जनता अब पूछ रही है—आखिर कब जागेगा पुलिस प्रशासन?