भ्रष्टाचार और अय्याशी का अड्डा बने सरकारी आवास, सिविल विभाग की मौन सहमति

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चचाई। “बाड़ ही जब खेत को खाने लगे, तो फसल की सुरक्षा कौन करेगा?” यह कहावत वर्तमान में अमरकंटक ताप विद्युत गृह , चचाई के सिविल विभाग पर सटीक बैठती है। जहाँ एक ओर विभाग का काम परिसर की व्यवस्था और रखरखाव सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की नाक के नीचे भ्रष्टाचार, अवैध कब्जे और अनैतिक गतिविधियों का काला खेल धड़ल्ले से फल-फूल रहा है।
रखरखाव के नाम पर बजट की बंदरबांट
सूत्रों की मानें तो सिविल विभाग के अधिकारियों का पूरा ध्यान केवल साल भर के बजट को ठिकाने लगाने पर केंद्रित रहता है। गाजर घास की कटाई, नालियों की सफाई और आवासों की पुताई के नाम पर हर साल लाखों-करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा किया जाता है। चहेते ठेकेदारों को काम बांटकर उनसे मोटी कमीशन वसूली जाती है, जबकि धरातल पर काम की गुणवत्ता शून्य है। दशकों पुराने आवास आज जर्जर हाल में हैं, लेकिन कागजों पर उनकी मरम्मत का खेल बदस्तूर जारी है।
आवासों पर अवैध कब्जा और रसूखदारों की साठगांठ
विद्युत गृह परिसर, विशेषकर डबल डी  क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार, लगभग 30 से 40 प्रतिशत आवासों पर बाहरी और अपात्र लोगों का कब्जा है। नाम न छापने की शर्त पर स्थानीय लोगों ने बताया कि विद्युत गृह के डिसटीब्यूशन विभाग के कुछ कर्मचारी, जो अब अनूपपुर और अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं, उन्होंने आज भी यहाँ के आवासों पर अवैध कब्जा जमा रखा है। इतना ही नहीं, कुछ लोग जो पूर्व में कोल इंडिया में कार्यरत थे और वर्षों पहले यहाँ से जा चुके हैं, उनके नाम पर भी आवास आवंटित हैं और उनमें बाहरी लोग निवास कर रहे हैं।
सिविल विभाग के कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर इन सरकारी मकानों को निजी लाभ के लिए “किराए की दुकान” बना लिया है। यहाँ शिक्षा विभाग, पुलिस और पंचायत के नाम पर भी कई बाहरी लोग बिना किसी वैध आवंटन के रह रहे हैं, जिनसे विभाग को फूटी कौड़ी का राजस्व नहीं मिल रहा।
अय्याशी और अनैतिक गतिविधियों का केंद्र
सबसे भयावह पहलू इन आवासों में बढ़ रही सामाजिक गंदगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुनसान और अवैध कब्जे वाले ये आवास अब “अय्याशी के अड्डे” में तब्दील हो चुके हैं। यहाँ रात के अंधेरे में रसूखदारों और असमाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है, जहाँ दारूखोरी के साथ-साथ जिस्मफरोशी का घिनौना खेल खेला जा रहा है। ये सरकारी आवास अब परिवारों के रहने लायक नहीं बल्कि अनैतिक कृत्यों की शरणस्थली बन गए हैं।
अधिकारी सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं क्योंकि इस अवैध तंत्र की जड़ें विभाग के भीतर तक धंसी हुई हैं। मरम्मत के नाम पर लाखों का भ्रष्टाचार और दूसरी तरफ किराए की अवैध वसूली ने संस्थान की छवि को धूमिल कर दिया है। क्या प्रशासन इस “सफेदपोश भ्रष्टाचार” और परिसर में पनप रही इस गंदगी पर लगाम लगाएगा? क्षेत्र की जनता अब ठोस कार्रवाई का इंतज़ार कर रही है।

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