सिस्टम बिका या सो गया? सिवनी से लेकर बानघाट पीढ़ा तक रेत माफियाओं का नंगा नाच, सिर्फ एक कार्रवाई कर खनिज’ महकमा थपथपा रहा पीठ!

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हाल ए हलचल विशेष रिपोर्ट | गौरेला-पेंड्रा-मरवाही

 

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमाओं पर बहने वाली जीवनदायिनी नदियां अब रेत माफियाओं के लिए ‘सोने की खदान’ बन चुकी हैं।

 

दिन के उजाले से लेकर रात के घने अंधेरे तक, ट्रेक्टर हाईवा और बिना नंबर वाले ट्रैक्टरों से नदियों का सीना बेरहमी से चीरा जा रहा है।

 

लेकिन इस पूरे काले खेल में सबसे ज्यादा शर्मनाक है हमारे सिस्टम का नकारापन। खनिज विभाग, वन विभाग और पुलिस प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोए हैं या फिर उन्होंने नोटों की गड्डियों के आगे अपनी आंखें बेच दी हैं?

 

माफियाओं का सिंडिकेट: जहाँ कानून की नहीं, तस्करों की चलती है

सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी चीख-चीख कर बता रही है कि माफियाओं और अधिकारियों के इस गठजोड़ ने नदियों को कैसे नोच खाना शुरू कर दिया है:

 

सिवनी ग्राम पंचायत से मध्यप्रदेश के बार्डर में बहने वाला गुजर नाला में सुबह सबेरे से लूट का तांडव: मरवाही छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमावर्ती गांव सिवनी से लगे मध्यप्रदेश का गूजर नाला को तस्करों ने अपनी जागीर बना लिया है। यहाँ सुबह 4 बजे से लेकर पूरी रात खुलेआम अवैध रेत का उत्खनन और धड़ल्ले से परिवहन किया जा रहा है। यहां की रेत छत्तीसगढ़ के सिवनी मरवाही क्षेत्रों में सरकारी तंत्र के संरक्षण में धड़ल्ले से बेची जा रही है।

 

वनग्राम बानघाट पीढ़ा (फॉरेस्ट लैंड) में डकैती: बानघाट पीढ़ा (पीपरखूंटी), जो कि पूरी तरह से वनग्राम और फॉरेस्ट लैंड (वन भूमि) है, वहां के कौवा नाला में हर सुबह 4 से 7 बजे के बीच योजनाबद्ध तरीके से रेत की डकैती हो रही है और वन विभाग के अफसर खर्राटे मार रहे हैं।

 

अरपा से डिंडोरी तक बिचौलियों का राज: खोंगसरा से शुरू होकर जोबाटोला होते हुए मध्य प्रदेश के अमरकंटक, करंजिया, रुसा, गाड़ासरई और डिंडोरी तक अवैध रेत की तस्करी का काला कारोबार पूरे शबाब पर है।

 

पिपरडोल में दिनदहाड़े नदियों का कत्ल: मरवाही के ग्राम पिपरडोल में सोन नदी पर कानून का खौफ खत्म हो चुका है। रात 8 से 12 और सुबह 4 से 6 बजे की शिफ्ट के अलावा, अब माफिया इतने निडर हैं कि दिनदहाड़े भी नदी को खोखला कर रहे हैं।

 

लखनघाट से अंतर्राज्यीय तस्करी: मध्य प्रदेश बॉर्डर से लगे सिवनी के लखनघाट (सोन नदी) से अंतर्राज्यीय परिवहन बेखौफ जारी है और बॉर्डर पर तैनात अमला अंधा बना बैठा है।

 

सिर्फ एक जब्ती और खनिज विभाग का ‘फोटो-ऑप’

जिले के चारों ओर अवैध रेत का कारोबार कैंसर की तरह फैला है, लेकिन खनिज विभाग की बेशर्मी देखिए! यह विभाग पूरे जिले में सिर्फ एक जगह अवैध रेत पकड़कर अपनी पीठ थपथपाने और कागजी कार्यवाही का ढिंढोरा पीटने में व्यस्त है।

 

बड़ा सवाल यह है कि जिले के कोने-कोने में फैले इस काले कारोबार पर खनिज विभाग का डंडा कब चलेगा?

 

क्या बंट रही है विभागों में ‘हिस्सेदारी’?

 

सूत्रों का साफ कहना है कि बिना ऊपर वालों के आशीर्वाद के नदियों में इतनी बड़ी डकैती मुमकिन ही नहीं है। इस काले कारनामे में केवल खनिज विभाग ही नहीं, बल्कि वन विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की गहरी मिलीभगत है।

 

अंतर्राज्यीय तस्करी का यह पूरा नेटवर्क ‘मोटे लिफाफों’ और गुप्त हिस्सेदारी के दम पर फल-फूल रहा है।

 

‘हाल ए हलचल’ का सवाल: कब टूटेगी यह बेशर्म नींद?

यह पहली बार नहीं है जब ‘हाल ए हलचल’ ने सिस्टम को आइना दिखाया है। इससे पहले भी हमने मरवाही के ग्राम पिपरडोल में सोन नदी से अवैध रेत ढोते बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टरों का पुख्ता खुलासा किया था। विडंबना देखिए, न तो कोई जांच टीम वहां फटकने की जहमत उठा पाई और न ही उन ट्रैक्टरों पर आज तक कोई कार्रवाई हुई।

 

अब वनग्राम बानघाट की फॉरेस्ट लैंड, मध्यप्रदेश का गूजर नाला और सोन नदी में चल रहे इस तांडव के खुलासे के बाद, क्या प्रशासन की यह बेशर्म नींद टूटेगी? या एक बार फिर सिर्फ ‘खानापूर्ति’ का नाटक खेलकर माफियाओं को क्लीन चिट दे दी जाएगी?

 

जनता का सब्र टूट रहा है, और नदियां अपना न्याय मांग रही हैं!

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