विशेष संरक्षित बैगा जनजाति बाहुल्य चुक्तीपानी पंचायत में पंचायत भवन मरम्मत कार्य के लिए 6.60 लाख रुपए बैंक से आहरित किए गए लेकिन पंचायत भवन की हालत जस की तस
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। हाल ए हलचल जिले के गौरेला क्षेत्रांतर्गत ग्राम पंचायत चुक्तिपानी में पंचायत भवन की मरम्मत कार्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड में मई से जुलाई 2026 के बीच पंचायत भवन मरम्मत कार्य के नाम पर लाखों रुपये के आहरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, मौके से सामने आई तस्वीरों में भवन के बाहरी हिस्से में दीवारों पर दाग-धब्बे दिखाई दे रहे हैं। अंदर भी फर्श और दरवाजों के आसपास अव्यवस्था नजर आ रही है जिन पर केवल रंग रोगन किया जा सकता है बाकी भवन की दीवारें,छत, टाईल्स लगी फर्श,लोहे के खिड़की दरवाजे मजबूत और अच्छी अवस्था में हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में अतिरिक्त कार्य में पंचायत भवन में बाहर चेकर टाइल्स लगाने और अंदर पुताई का काम और सामने के दरवाजे में टीन शेड का काम कराया जा रहा था जो कि काफी दिनों से बंद है।
अगर बाहर टीन शेड निर्माण, उसके नीचे चेकर टाईल्स, दरवाजे खिड़कियों पर रंग रोगन, अंदर बाहर की पुताई भी की जाती है तो उसका खर्च क्या 6.60 लाख आ सकता है?
मई से जुलाई के बीच लाखों के आहरण, वह भी अब तक अक्टूबर माह तक जो कार्य पूर्ण ही नहीं हुए हैं?
प्राप्त वित्तीय रिकॉर्ड के अनुसार, पंचायत भवन मरम्मत के नाम पर 12 मई, 13 मई, 19 मई, 23 मई और 2 जुलाई 2026 को अलग-अलग आहरण की प्रविष्टियां दर्ज हैं। इनमें ₹73,860, ₹59,270, ₹50,000, ₹45,000, ₹40,730 और ₹21,000 जैसी राशियां शामिल हैं।
इन प्रविष्टियों का कुल योग लगभग ₹6.60 लाख बैठता है। हालांकि, यह कुल दर्ज राशि है। सभी प्रविष्टियों का मूल बिल, कार्यादेश और भुगतान अभिलेखों से मिलान होना अभी बाकी है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि पंचायत भवन की मरम्मत के लिए पहले ही लाखों रुपये का आहरण किया जा चुका है, तो वर्तमान में कराए जा रहे कार्यों का भुगतान किस मद से किया जा रहा है? क्या पहले स्वीकृत कार्य अधूरे रह गए थे, या अब अतिरिक्त मरम्मत की आवश्यकता पड़ी है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
तस्वीरें और भुगतान रिकॉर्ड आमने-सामने
पंचायत भवन की उपलब्ध तस्वीरों में बाहरी दीवारों पर दाग-धब्बे, छज्जों पर गंदगी और भवन के सामने टीन शेड के लिए एंगल का जंग लगा ढांचा दिखाई दे रहा है।
हालांकि, केवल तस्वीरों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मरम्मत कार्य में अनियमितता हुई है। इसके लिए यह देखना जरूरी होगा कि स्वीकृत प्राक्कलन में कौन-कौन से कार्य शामिल थे, किन कार्यों को पूरा दिखाकर आहरण किया गया और वर्तमान में कौन से कार्य कराए जा रहे हैं और नहीं कराए जा रहे तो उन आहरित राशि का क्या हुआ?
क्या अन्य कार्यों की भी होगी जांच?
स्थानीय सूत्रों ने पंचायत में अन्य विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ कार्यों के अभिलेखों में दर्ज होने और मौके पर उनकी वास्तविक स्थिति के बीच अंतर हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यदि शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं, तो संबंधित पंचायत के कार्यों, भुगतान और निर्माण की गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराई जानी चाहिए।
सरपंच सचिव से संपर्क का प्रयास, नहीं मिला जवाब
मामले में ग्राम पंचायत चुक्तिपानी के सरपंच पूर्व सचिव गोविंद का पक्ष जानने के लिए फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन सरपंच ने फोन नहीं उठाया और पूर्व सचिव का मोबाइल बंद बताया इसके चलते उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। वर्तमान दिनों में स्थानांतरित हो कर पदस्थ नवीन सचिव सोमी खत्री से फोन के माध्यम से इस विषय में जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि उक्त आहरण उनके चुक्तीपानी पंचायत में कार्य भार ग्रहण करने के पूर्व का है जिस कारण वे इस मामले में समुचित जवाब नहीं दे सकती हैं। पंचायत भवन मरम्मत कार्य में हुए भुगतान और वर्तमान में जारी अधुरे कार्यों को लेकर उठ रहे सवालों पर सरपंच और पूर्व सचिव की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
मामले में प्रशासन से मांग की जाती है कि ग्राम पंचायत चुक्तिपानी के पंचायत भवन मरम्मत कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच के दौरान निम्न बिंदुओं का सत्यापन किया जाना चाहिए—
1. मई से जुलाई 2026 तक पंचायत भवन मरम्मत के नाम पर किए गए सभी आहरित राशि का विवरण बैंक से एवं पंचायत के बिल बाउचर से मिलान किया जाए।
2. प्रत्येक भुगतान से संबंधित कार्यादेश, स्वीकृत प्राक्कलन और बिल-वाउचर।
3. माप पुस्तिका (एमबी), कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र और भुगतान स्वीकृति की जांच।
4. पहले कराए गए कार्यों और वर्तमान में चल रहे कार्यों का भौतिक सत्यापन।
5. यदि एक ही कार्य के लिए दोबारा भुगतान या अभिलेखों में अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई।
बड़ा सवाल: पंचायत भवन की मरम्मत के नाम पर जब मई से जुलाई के बीच लाखों रुपये के आहरण दर्ज हैं, तो वर्तमान में चल रहे कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है? इसका जवाब रिकॉर्ड की जांच और मौके के भौतिक सत्यापन से ही सामने आएगा।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है या पंचायत भवन की मरम्मत से जुड़े ये सवाल अनुत्तरित ही रह जाते हैं।