जोगिन्दर सिंह हत्याकांड: बुढ़ार न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला; 5 आरोपियों को उम्रकैद, पुलिस की सूक्ष्म विवेचना और अभियोजन के तर्कों से 2 वर्ष में मिला न्याय

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शहडोल जिले के बुढ़ार न्यायालय ने बहुचर्चित जोगिन्दर सिंह हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पांच मुख्य आरोपियों को उम्रकैद व अर्थदंड से दंडित किया है। महज दो वर्ष के भीतर आए इस फैसले की रीढ़ बुढ़ार पुलिस की सटीक वैज्ञानिक विवेचना और लोक अभियोजकों की अकाट्य दलीलें रहीं, जिसने बचाव पक्ष के हर पैंतरे को ध्वस्त कर दिया।

बुढ़ार (शहडोल): अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार अग्रवाल के न्यायालय ने टिकुरी टोला में घटित जोगिन्दर सिंह हत्याकांड के सत्र प्रकरण क्रमांक 43/2024 में धारा 302, 149 और 120B भारतीय दंड संहिता के तहत सुनवाई करते हुए आरोपी लाला बैगा उर्फ मड्डू, अंजू उर्फ अंजली द्विवेदी, प्रियंका मिश्रा, सैलजा उर्फ अलका मिश्रा तथा आभा द्विवेदी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। दो वर्ष की अल्प अवधि में न्यायालय द्वारा पूर्ण किए गए इस विचारण से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है और न्यायपालिका के प्रति जनमानस का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।

पूरे मामले का घटनाक्रम 27 मई 2024 की रात करीब 9:00 बजे का है। टिकुरी टोला वार्ड क्रमांक 15 निवासी फरियादिया शेफाली सिंह (22 वर्ष) अपने घर की छत पर टहल रही थीं, जबकि उनके पिता जोगिन्दर सिंह चंदेल टहलते हुए नए घर की तरफ जा रहे थे। स्ट्रीट लाइट की रोशनी में जैसे ही वे पड़ोस में कुशमी कोल के घर के सामने पहुंचे, तभी पुरानी रंजिश के चलते पड़ोसी दीपक सिंह, अंजू उर्फ अंजली द्विवेदी और प्रियंका मिश्रा ने उनका रास्ता रोक लिया। आरोपियों ने मां-बहन की अश्लील गालियां देते हुए हत्या की नीयत से जानलेवा हमला कर दिया। दीपक सिंह लोहे की रॉड, अंजू डंडे से और प्रियंका हॉकी स्टिक से जोगिन्दर सिंह के सिर व शरीर पर प्राणघातक वार करने लगे।

शोर सुनकर छत से नीचे उतरी बेटी शेफाली सिंह बीच-बचाव करने पहुंची, तो आरोपियों ने उसे जमीन पर पटककर लात-घूंसों से पीटा। इसी दौरान दीपक सिंह के पक्ष में लाला उर्फ मड्ढा बैगा, आभा द्विवेदी, दो विधि-विरुद्ध नाबालिग बालक एवं तीन अन्य लाठी-डंडा और रॉड लेकर मौके पर आ धमके। बचाव में आए पड़ोसी अजीत सिंह पर भी हमला कर लहूलुहान कर दिया गया। सभी आरोपी ‘आज घेर-घेर कर जान से खत्म कर देंगे’ की धमकी देकर भागे। इसके बाद जब शेफाली ने मिष्ठान भंडार में काम कर रही बड़ी बहन शिवानी को पुलिस बुलाने भेजा, तो न्यायालय बुढ़ार के सामने स्कूटी सवार आरोपियों और एक नाबालिग ने शिवानी का रास्ता रोककर डंडे से सिर पर वार कर उसे भी गंभीर रूप से घायल कर दिया।

गंभीर रूप से घायल और अचेत जोगिन्दर सिंह को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां से नाजुक हालत में उन्हें मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर किया गया। सिर और मस्तिष्क में आई गंभीर चोटों के कारण 16 जून 2024 को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद सउनि हरिकिशोर द्वारा देहाती नालसी दर्ज करने पर थाना बुढ़ार में अपराध क्रमांक 370/2024 पंजीबद्ध हुआ, जिसमें मृत्यु उपरांत धारा 302, 147, 148, 149 और 120B का इजाफा किया गया।

इस संवेदनशील मामले में बुढ़ार थाना प्रभारी निरीक्षक संजय जायसवाल और विवेचना अधिकारी उपनिरीक्षक (SI) उमाशंकर चतुर्वेदी द्वारा की गई सूक्ष्म और पेशेवर विवेचना पूरे प्रकरण की मजबूत नींव बनी। पुलिस ने घटना के तत्काल बाद न केवल घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण कर नजरी नक्शा और हल्का पटवारी से अधिकृत नक्शा तैयार कराया, बल्कि मौके से खून-आलूदा मिट्टी और सादी मिट्टी विधिवत जब्त की।

पुलिस अधिकारियों ने आरोपियों को अभिरक्षा में लेकर उनके मेमोरेंडम बयानों के आधार पर अपराध में प्रयुक्त बांस का डंडा, लकड़ी का डंडा, हॉकी स्टिक और टीवीएस जुपिटर स्कूटी को जब्त कर मालखाने में सीलबंद कराया। इसके बाद विवेचना टीम ने इन सभी घातक हथियारों को अस्पताल भेजकर डॉक्टर से तकनीकी क्वेरी कराई, जिसमें डॉक्टर ने स्पष्ट प्रतिवेदन दिया कि मृतक के सिर पर आई चोटें इन्हीं हथियारों से संभव थीं और यही मृत्यु का मुख्य कारण बनीं। इन हथियारों और रक्त नमूनों को रासायनिक परीक्षण व डीएनए जांच हेतु आरएफएसएल जबलपुर भेजा गया।

इतना ही नहीं, आरोपियों ने कानूनी शिकंजे से बचने के लिए घटना के अगले ही दिन 28 मई को मृतक जोगिन्दर सिंह के खिलाफ थाने में जो क्रास रिपोर्ट (अपराध क्र. 371/24) दर्ज कराई थी, पुलिस ने उसी क्रास कायमी को अपनी विवेचना में शामिल कर अदालत में यह अकाट्य तथ्य स्थापित कर दिया कि घटना के समय सभी आरोपी मौके पर प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित थे। फरियादिया और प्रत्यक्षदर्शियों के धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराकर पुलिस ने 90 दिन की विधिक समयसीमा से पूर्व ही चालान क्रमांक 446/2024 अदालत में पेश कर दिया, जबकि दो विधि-विरुद्ध नाबालिग बालकों के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड में पृथक पूरक चालान प्रस्तुत किया गया।

न्यायालय के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक आलोक राय एवं अशोक सिसौदिया ने अत्यंत प्रभावी, तार्किक और आक्रामक पैरवी की। लोक अभियोजक द्वय ने मेडिकल साक्ष्यों, डॉक्टर क्वेरी, फॉरेंसिक विश्लेषण और चश्मदीदों के बयानों को परस्पर जोड़ते हुए अदालत में ऐसा अभेद्य ताना-बाना पेश किया कि बचाव पक्ष के वकीलों की कोई भी दलील टिक नहीं सकी। लोक अभियोजक आलोक राय और अशोक सिसौदिया के अकाट्य तर्कों ने यह निर्विवाद रूप से सिद्ध कर दिया कि सभी आरोपियों ने पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत गैर-कानूनी जमावड़ा बनाकर जोगिन्दर सिंह की हत्या की थी।

प्रकरण में नामजद मुख्य आरोपी दीपक सिंह घटना दिनांक से ही फरार है, जिसके संबंध में सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़कर विदेश भाग चुका है। पुलिस ने उसकी संपत्ति कुर्की हेतु न्यायालय से धारा 84 के तहत उद्घोषणा कराने के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय से गिरफ्तारी पर इनाम घोषित कराया है और फरार आरोपियों के विरुद्ध धारा 173(8) के तहत विवेचना जारी रखी है। अपर सत्र न्यायालय का यह कड़ा फैसला कानून के राज की मिसाल बनकर सामने आया है।

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