कान्हा के जन्म पर भक्ति में डूबी कटनी नगरी , सत्यनारायण मंदिर के मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब मध्यरात्रि में गूंजा जय कन्हैया लाल का जयघोष, बांकेबिहारी के प्राकट्य के साथ भक्तों ने मनाया नंदोत्सव

0

कान्हा के जन्म पर भक्ति में डूबी कटनी नगरी , सत्यनारायण मंदिर के मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब
मध्यरात्रि में गूंजा जय कन्हैया लाल का जयघोष, बांकेबिहारी के प्राकट्य के साथ भक्तों ने मनाया नंदोत्सव
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की खुशी में शुक्रवार को कटनी नगरी भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। दिनभर मंदिरों में पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का दौर चला तो शाम होते ही श्रद्धालुओं के कदम मंदिरों की ओर बढ़ने लगे। सत्यनारायण मंदिर में आयोजित विशाल जन्माष्टमी मेला आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बना रहा। मंदिर परिसर से लेकर मुख्य मार्ग तक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।


कटनी। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में शुक्रवार की रात कटनी नगर मानो गोकुल में बदल गया। चारों ओर गूंजते ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘नंद के घर आनंद भयो’ के जयघोष, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धा और सत्यनारायण मंदिर के विशाल मेले में उमड़ा जनसैलाब जन्माष्टमी की भव्यता का साक्षी बना। जैसे ही मध्यरात्रि में नंदलाल का प्राकट्य हुआ, पूरा कटनी नगर भक्ति और उल्लास में झूम उठा। रिमझिम बारिश भी श्रद्धालुओं की आस्था के आगे फीकी पड़ गई और देर रात तक शहर के मंदिरों व मेला स्थलों पर भक्तों का सैलाब उमड़ता रहा।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का पावन पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कटनी सहित जिले में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। शुक्रवार को पूरा शहर मानो कान्हा की भक्ति में सराबोर हो गया। मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और भगवान के मनोहारी श्रृंगार का सिलसिला चलता रहा। शाम ढलते ही श्रद्धालुओं के कदम मंदिरों की ओर बढ़ने लगे और मध्यरात्रि के उस दिव्य क्षण का इंतजार होने लगा, जब भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ।
इस दौरान सत्यनारायण मंदिर में लगा विशाल जन्माष्टमी मेला श्रद्धा और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र रहा। शाम से ही मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से भर गया। दूर-दूर से पहुंचे महिला, पुरुष और बच्चों ने मेले में पहुंचकर जहां भगवान बांकेबिहारी के दर्शन किए, वहीं मेले की रौनक का भी आनंद लिया। मंदिर परिसर के साथ मुख्य मार्ग पर सजे झूले, खिलौनों की दुकानें, खान-पान के स्टॉल और विभिन्न आकर्षक दुकानों पर देर रात तक लोगों की भीड़ बनी रही। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। भक्ति और मेले की उमंग का ऐसा संगम दिखाई दिया कि पूरा सत्यनारायण मंदिर परिसर भक्तों से खचाखच भर गया। हर ओर राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयकारे सुनाई दे रहे थे। बच्चे झूलों का आनंद लेते नजर आए तो महिलाएं और बुजुर्ग भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना में लीन रहे।

आधी रात को होंगा हुआ बांकेबिहारी का प्राकट्य
रात के 12 बजते ही सत्यनारायण मंदिर में वह पावन क्षण आएगा , जिसका श्रद्धालुओं को बेसब्री से इंतजार कर रहें हैं । ककड़ी की बौल काटकर भगवान बांकेबिहारी का प्राकट्य कराया जाएगा । जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की घोषणा होंगी , पूरा मंदिर परिसर ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’, ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठेगा । भक्तों ने हाथ जोड़कर नंदलाल के दर्शन किए और भगवान के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
मंदिर में बधाई गीत और भजन गूंजते रहे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो नगरी स्वयं गोकुल बन गई हो और हर श्रद्धालु नंदबाबा के आंगन में कान्हा के जन्म की खुशी मना रहा हो। भगवान का विशेष पूजन-अभिषेक और आरती हुई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

गोविंद देवजी और लक्ष्मीनारायण मंदिर भी रहे आस्था के केंद्र
सिल्वर टॉकीज रोड स्थित श्री गोविंद देवजी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां और थ्री-डी रंगोली श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं लक्ष्मीनारायण मंदिर में भगवान श्रीहरि का भव्य श्रृंगार किया गया और भजन-कीर्तन के बीच मध्यरात्रि में जन्मोत्सव मनाया गया। दिव्य झांकी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जालपा मंदिर, दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, मधई मंदिर, साईं मंदिर, विश्राम बाबा मंदिर और भोलेशंकर मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भी जन्माष्टमी की विशेष पूजा-अर्चना हुई। घर-घर में भी कान्हा का जन्मोत्सव मनाया गया। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर आधी रात को भगवान का पूजन किया और माखन-मिश्री का भोग लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

पुलिस रही मुस्तैद

विशाल मेले और मंदिरों में उमड़ी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के निर्देशन में प्रमुख मंदिरों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा। महिला पुलिस कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई गई। सीसीटीवी कैमरों के जरिए अस्थाई कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी रखी गई, वहीं यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए यातायात पुलिस भी मुस्तैद रही। कुल मिलाकर सत्यनारायण मंदिर का विशाल मेला इस बार जन्माष्टमी की सबसे बड़ी तस्वीर बनकर उभरा। आस्था से उमड़ी भीड़, मंदिर में गूंजते जयकारे, भजनों की मधुर धुन और मध्यरात्रि में कान्हा के प्राकट्य का उल्लास—इन सबने कटनी की जन्माष्टमी को यादगार बना दिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ देर रात तक पूरा शहर ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष में डूबा रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed