कटनी को मेडिकल कॉलेज चाहिए, लेकिन जनता पूछ रही है—सरकारी क्यों नहीं कछगवां में शुरू हुआ पीपीपी मॉडल मेडिकल कॉलेज का निर्माण, वर्षों पुरानी मांग को मिला आकार लेकिन सरकारी स्वरूप न मिलने से जनता और सामाजिक संगठनों में असंतोष बरकरार चुपचाप शुरू हुआ मेडिकल कॉलेज निर्माण, लेकिन थमा नहीं जनभावनाओं का सवाल,वर्षों की मांग और जनता की अपेक्षाओं के बीच खड़ा हुआ नया सवाल
कटनी को मेडिकल कॉलेज चाहिए, लेकिन जनता पूछ रही है—सरकारी क्यों नहीं
कछगवां में शुरू हुआ पीपीपी मॉडल मेडिकल कॉलेज का निर्माण, वर्षों पुरानी मांग को मिला आकार लेकिन सरकारी स्वरूप न मिलने से जनता और सामाजिक संगठनों में असंतोष बरकरार
चुपचाप शुरू हुआ मेडिकल कॉलेज निर्माण, लेकिन थमा नहीं जनभावनाओं का सवाल,वर्षों की मांग और जनता की अपेक्षाओं के बीच खड़ा हुआ नया सवाल
कटनी।। महाकौशल अंचल के लाखों लोगों के लिए मेडिकल कॉलेज सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, स्थानीय चिकित्सा शिक्षा और क्षेत्रीय विकास का सपना है। कटनी की जनता ने वर्षों तक संघर्ष कर जिले में मेडिकल कॉलेज की मांग की, लेकिन अब जब निर्माण कार्य शुरू हुआ है तो उसके स्वरूप को लेकर असंतोष और बहस भी उतनी ही तेज हो गई है।
कछगवां क्षेत्र में चिन्हित लगभग 25 एकड़ भूमि पर पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के मेडिकल कॉलेज की बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। निर्माण स्थल पर बैचिंग प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं, निर्माण सामग्री का भंडारण हो चुका है और मजदूरों के रहने की व्यवस्थाएं भी तैयार कर ली गई हैं। यह संकेत हैं कि परियोजना अब कागजों से निकलकर जमीन पर उतर चुकी है।
लेकिन इसी के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है,क्या कटनी को वह मेडिकल कॉलेज मिल रहा है जिसकी जनता ने मांग की थी
जनता की मांग: मेडिकल कॉलेज का विरोध नहीं, पीपीपी मॉडल पर आपत्ति
जिले के सामाजिक संगठन, बुद्धिजीवी, व्यापारी, युवा और विभिन्न वर्ग लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि उन्हें मेडिकल कॉलेज के निर्माण से कोई आपत्ति नहीं है। बल्कि उनका कहना है कि कटनी में मेडिकल कॉलेज जितनी जल्दी बने, उतना अच्छा है। विरोध केवल इस बात का है कि यह संस्थान पीपीपी मॉडल के बजाय पूर्णतः शासकीय होना चाहिए।
जनता का तर्क है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाएं लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि जनसेवा की भावना से संचालित होनी चाहिए। यदि भविष्य में फीस, इलाज और अन्य सेवाओं पर निजी प्रबंधन का प्रभाव बढ़ा तो इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवारों को उठाना पड़ सकता है।
दो बार टला भूमिपूजन, फिर भी शुरू हो गया निर्माण
इस परियोजना को लेकर जनभावनाएं कितनी प्रबल थीं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रस्तावित भूमिपूजन कार्यक्रम दो बार टल गया। पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आगमन की चर्चा रही, बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के कार्यक्रम की भी संभावनाएं बनीं, लेकिन विरोध के स्वर तेज होने के कारण कोई बड़ा सार्वजनिक आयोजन नहीं हो सका। अब बिना किसी औपचारिक भूमिपूजन और बड़े समारोह के निर्माण कार्य शुरू हो जाना लोगों के बीच चर्चा और सवालों का विषय बना हुआ है।
पड़ोसी जिलों को सरकारी मेडिकल कॉलेज, फिर कटनी क्यों अलग
नागरिकों के मन में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब प्रदेश के कई अन्य जिलों में पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा सकते हैं, तो कटनी के लिए पीपीपी मॉडल क्यों चुना गया। क्या कटनी की जनसंख्या, भौगोलिक महत्व और क्षेत्रीय आवश्यकताएं अन्य जिलों से कम हैं। क्या यहां की जनता को भी वही सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिए जो अन्य जिलों को प्राप्त हो रही हैं। ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर सरकार से अपेक्षित है।
पूरे महाकौशल क्षेत्र की जरूरत है मेडिकल कॉलेज
कटनी का मेडिकल कॉलेज केवल जिले तक सीमित परियोजना नहीं है। इससे कटनी के साथ-साथ उमरिया, डिंडोरी, शहडोल, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, मंडला, नरसिंहपुर और आसपास के अनेक क्षेत्रों के लोगों को लाभ मिलने की संभावना है। आज भी गंभीर बीमारियों और चिकित्सा शिक्षा के लिए हजारों परिवारों को जबलपुर, भोपाल, इंदौर और अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। यदि कटनी में एक मजबूत और पूर्ण सुविधाओं वाला सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित होता है, तो यह पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
सामाजिक संगठन बोले—जनता के हित से समझौता नहीं
जिले के विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे मेडिकल कॉलेज के निर्माण का स्वागत करते हैं, लेकिन सरकारी अस्पताल और चिकित्सा व्यवस्था को निजी नियंत्रण में नहीं जाने देना चाहते। उनका कहना है कि आने वाले समय में जनजागरण अभियान चलाकर सरकार तक जनता की भावनाएं पहुंचाई जाएंगी, ताकि इस परियोजना के स्वरूप पर पुनर्विचार हो सके।
सरकार के लिए अवसर भी, चुनौती भी
सरकार के सामने यह एक महत्वपूर्ण अवसर है।
यदि जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज को पूर्णतः शासकीय स्वरूप देने की दिशा में पहल होती है, तो यह निर्णय क्षेत्र के लाखों लोगों का विश्वास और समर्थन प्राप्त कर सकता है। लेकिन यदि जनता की आशंकाओं और मांगों की लगातार अनदेखी होती रही, तो यह मुद्दा भविष्य में एक बड़े जनआंदोलन और राजनीतिक बहस का कारण भी बन सकता है।
जनता की अंतिम अपेक्षा
कटनी की जनता मेडिकल कॉलेज चाहती है। युवा डॉक्टर बनना चाहते हैं। मरीजों को बेहतर इलाज चाहिए। परिवारों को सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं चाहिए। समाज चाहता है कि आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और स्वास्थ्य का अधिकार बिना आर्थिक बोझ के मिले।
आज आवश्यकता विरोध और समर्थन से आगे बढ़कर एक ऐसे समाधान की है, जिसमें मेडिकल कॉलेज भी बने, विकास भी हो और जनता का विश्वास भी कायम रहे। कटनी की आवाज सिर्फ इतनी है, मेडिकल कॉलेज का स्वागत है, लेकिन जनहित सर्वोपरि है। यदि संभव हो तो सरकार इस परियोजना को पूर्णतः शासकीय स्वरूप देने पर गंभीरता से विचार करे, ताकि शिक्षा और स्वास्थ्य का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
🔹 25 एकड़ भूमि पर शुरू हुआ निर्माण कार्य
🔹 बिना भूमिपूजन के तेजी से बन रही बाउंड्री वॉल
🔹 दो बार टल चुका है वीआईपी भूमिपूजन कार्यक्रम
🔹 जनता का विरोध मेडिकल कॉलेज से नहीं, पीपीपी मॉडल से
🔹 सामाजिक संगठन बोले सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं तो संघर्ष जारी रहेगा
🔹 पूरे महाकौशल क्षेत्र के लाखों लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा है मुद्दा
विशेष टिप्पणी
कटनी के लोग मेडिकल कॉलेज का विरोध नहीं कर रहे हैं। वे तो वर्षों से इसकी मांग कर रहे हैं। सवाल सिर्फ इतना है कि जब प्रदेश के अन्य जिलों को पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज मिल सकते हैं, तो कटनी को पीपीपी मॉडल क्यों,यह सिर्फ एक भवन निर्माण का मामला नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों की चिकित्सा शिक्षा, गरीब मरीजों के इलाज और पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा प्रश्न है। आज सरकार के पास अवसर है कि वह जनभावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसा मॉडल प्रस्तुत करे, जिसमें विकास भी हो और जनता का भरोसा भी बना रहे।
मेडिकल कॉलेज का स्वागत, निजीकरण का विरोध
सामाजिक संगठनों का कहना है कि कटनी में मेडिकल कॉलेज की स्थापना का सभी स्वागत करते हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की आशंका लोगों को चिंतित कर रही है। उनका मानना है कि यदि यह संस्थान पूर्णतः शासकीय होगा तो गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों तथा मरीजों को अधिक लाभ मिलेगा।
कटनी मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू हो चुका है, लेकिन जनता का सवाल अब भी वहीं खड़ा है क्या यह मेडिकल कॉलेज केवल बनेगा, या फिर वास्तव में जनहित का मेडिकल कॉलेज बनेगा आने वाले समय में सरकार का निर्णय ही इस सवाल का जवाब तय करेगा।