कटघोरा वन मंडल की लापरवाही से धधके जंगल: तुमान से जटगा तक आग का कहर, ग्रामीणों को जागरूक करने की जरूरत

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फैज मोहम्मद कोरबा जिला रिपोर्टर

 

कटघोरा वन मंडल के अंतर्गत आने वाले तुमान और जटगा वन परिक्षेत्र इन दिनों भीषण जंगल की आग की चपेट में हैं। गर्मी बढ़ते ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ गई हैं, जिससे हजारों पेड़-पौधे, वन संपदा और वन्यजीवों के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। आग की लपटें कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रही हैं, जिससे आसपास के ग्रामीणों में दहशत और चिंता का माहौल है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन इस बार भी कटघोरा वन मंडल आग पर समय रहते काबू पाने में विफल नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि तुमान से लेकर जटगा वन परिक्षेत्र तक कई स्थानों पर आग फैलने के बावजूद समय पर प्रभावी राहत और बचाव कार्य नहीं हो पाए, जिससे जंगलों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

 

जंगलों में लगी आग से न सिर्फ हरियाली और वन संपदा को नुकसान हो रहा है, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास भी खतरे में पड़ गए हैं। लगातार बढ़ती घटनाओं ने वन विभाग की तैयारियों, निगरानी और त्वरित कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

विशेषज्ञों और जागरूक ग्रामीणों का मानना है कि जंगलों को बचाने के लिए सिर्फ विभागीय प्रयास काफी नहीं हैं, बल्कि जनभागीदारी भी जरूरी है। वन विभाग को गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को यह समझाना चाहिए कि बीड़ी-सिगरेट, जलती लकड़ी, सूखी घास या लापरवाही से फैली छोटी चिंगारी भी बड़े जंगल को राख कर सकती है।

 

ग्रामीणों से अपील की गई है कि जंगल में आग न लगाएं, आग जैसी घटना दिखते ही तुरंत वन विभाग को सूचना दें, और वन सुरक्षा समितियों के साथ मिलकर जंगलों की निगरानी करें। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कटघोरा वन मंडल में आग बुझाने के संसाधन बढ़ाए जाएं, त्वरित राहत दल तैनात किए जाएं और वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए ठोस योजना लागू की जाए, ताकि हर साल होने वाले इस भारी नुकसान को रोका जा सके।

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