तपस्या परिहार की पहल कागजों के ढेर से डिजिटल व्यवस्था की ओर बढ़ता कटनी नगर निगम

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तपस्या परिहार की पहल कागजों के ढेर से डिजिटल व्यवस्था की ओर बढ़ता कटनी नगर निगम
किसी भी नगर निगम की पहचान केवल सड़कों, नालियों, सफाई और निर्माण कार्यों से नहीं होती। उसकी असली पहचान इस बात से होती है कि वह अपने नागरिकों के लिए कितना सहज, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन उपलब्ध करा पा रहा है। इसी दृष्टि से कटनी नगर निगम में निगमायुक्त तपस्या परिहार द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक बदलावों को देखने की जरूरत है।
कटनी।। आज के दौर में जब देश डिजिटल शासन की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब वर्षों पुराने कागजी अभिलेखों और नस्तियों को डिजिटल स्वरूप देने की पहल महज तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नगर निगम की कार्यसंस्कृति में बदलाव का संकेत है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पहल का केंद्र नागरिक है।
अक्सर किसी पुराने रिकॉर्ड, नामांतरण, राजस्व संबंधी दस्तावेज, नस्ती या विभागीय जानकारी के लिए आम नागरिक को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। रिकॉर्ड किस शाखा में है, किस कर्मचारी के पास है, फाइल कहां तक पहुंची इन सवालों के जवाब तलाशने में ही नागरिक का समय और ऊर्जा खर्च हो जाती है। कई बार इसी व्यवस्था की जटिलता का लाभ बिचौलियों को भी मिलता है। यदि डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली पूरी पारदर्शिता और प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो यह स्थिति काफी हद तक बदल सकती है। नागरिक और निगम के बीच बिचौलिये की भूमिका जितनी कम होगी, प्रशासन उतना ही अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा। निगमायुक्त तपस्या परिहार की पहल का यही सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। डिजिटल रिकॉर्ड का मतलब केवल फाइल को स्कैन करके कंप्यूटर में रख देना नहीं होना चाहिए। इसका वास्तविक उद्देश्य ऐसी व्यवस्था बनाना होना चाहिए, जिसमें अधिक से अधिक सेवाओं की जानकारी नागरिकों को सीधे उपलब्ध हो, रिकॉर्ड तलाशने में समय न लगे और किसी काम की प्रगति को लेकर अनावश्यक अनिश्चितता समाप्त हो।
यह पहल नगर निगम के कर्मचारियों के लिए भी चुनौती और अवसर दोनों है। चुनौती इसलिए कि वर्षों से चली आ रही कागजी कार्यप्रणाली को बदलना आसान नहीं होता। अवसर इसलिए कि डिजिटल व्यवस्था कर्मचारियों का भी समय बचाएगी और उन्हें बार-बार पुराने रिकॉर्ड खोजने की परेशानी से मुक्ति दिलाएगी।

तपस्या परिहार के काम में दिखाई देता है प्रशासनिक सुधार का प्रयास
निगमायुक्त तपस्या परिहार के कार्यों को यदि व्यापक दृष्टि से देखा जाए तो उनका जोर केवल किसी एक निर्माण कार्य अथवा एक विभाग तक सीमित नहीं दिखाई देता। प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करना, रिकॉर्ड को सुरक्षित करना, समयबद्ध कार्यप्रणाली को बढ़ावा देना और नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना—ये सभी प्रयास एक आधुनिक नगर निगम की बुनियाद तैयार करते हैं। किसी अधिकारी के कार्यकाल का मूल्यांकन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि उसकी पहल का लाभ आम नागरिक तक कितना पहुंचा। डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था इसी कसौटी पर सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि कल किसी नागरिक को नगर निगम से संबंधित वर्षों पुराना दस्तावेज चाहिए और उसे कई दिनों तक कार्यालय के चक्कर लगाने के बजाय कुछ समय में प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध हो जाए, तो यही इस पहल की वास्तविक सफलता होगी।

डिजिटल व्यवस्था के साथ जवाबदेही भी जरूरी
हालांकि डिजिटल व्यवस्था अपने आप में कोई जादुई समाधान नहीं है। इसके लिए रिकॉर्ड की सही स्कैनिंग, डेटा की शुद्धता, साइबर सुरक्षा, नियमित बैकअप, अधिकृत एक्सेस और कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी उतना ही जरूरी है।
डिजिटल रिकॉर्ड में यदि गलत जानकारी दर्ज हो गई या नागरिकों को उस तक पहुंच का व्यावहारिक रास्ता नहीं मिला, तो कागज से डिजिटल होने का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। इसलिए निगम प्रशासन को चाहिए कि डिजिटाइजेशन के साथ-साथ नागरिकों के लिए सरल ऑनलाइन व्यवस्था, स्पष्ट प्रक्रिया और शिकायत निवारण प्रणाली भी विकसित करे। डिजिटल सुविधा का लाभ उन नागरिकों तक भी पहुंचे जो तकनीकी रूप से बहुत सक्षम नहीं हैं।

कटनी के लिए यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है
कटनी तेजी से बढ़ता हुआ शहर है। जैसे-जैसे शहर का विस्तार होगा, नगर निगम पर प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी। ऐसे में पुरानी कागजी व्यवस्था पर निर्भर रहकर भविष्य की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल होगा। आज यदि रिकॉर्ड को व्यवस्थित और डिजिटल किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में यही व्यवस्था नगर निगम के लिए एक मजबूत प्रशासनिक आधार बन सकती है। इसलिए निगमायुक्त तपस्या परिहार की डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली की पहल को केवल एक विभागीय आदेश के रूप में नहीं, बल्कि कटनी नगर निगम को आधुनिक प्रशासन की दिशा में ले जाने वाले प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी भी अच्छी पहल की असली परीक्षा उसके जमीन पर उतरने के बाद होती है। नागरिकों को इसका लाभ कितनी जल्दी मिलता है, कितने रिकॉर्ड डिजिटल होते हैं, सेवाओं की गति कितनी बढ़ती है और क्या वास्तव में बिचौलियों की भूमिका कम होती है,इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मिलेंगे। उम्मीद की जानी चाहिए कि निगमायुक्त तपस्या परिहार की इस पहल को केवल रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे पूर्ण नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। क्योंकि एक आधुनिक नगर निगम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि उसके पास कितनी डिजिटल फाइलें हैं, बल्कि यह है कि एक आम नागरिक का काम कितनी आसानी, कितनी पारदर्शिता और कितने कम समय में होता है। और यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो तपस्या परिहार की यह पहल निश्चित रूप से कटनी नगर निगम की कार्यप्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में दर्ज की जाएगी।

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