इलाज या लापरवाही कब सुधरेगा जिला अस्पताल इलाज के बीच थम गई 14 वर्षीय स्नेहा की सांसें क्या जिला अस्पताल में इलाज सुरक्षित है 14 वर्षीय बालिका की मौत पर बवाल, लापरवाही के गंभीर आरोप विहिप ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
इलाज या लापरवाही कब सुधरेगा जिला अस्पताल
इलाज के बीच थम गई 14 वर्षीय स्नेहा की सांसें
क्या जिला अस्पताल में इलाज सुरक्षित है 14 वर्षीय बालिका की मौत पर बवाल, लापरवाही के गंभीर आरोप
विहिप ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
कटनी।। कटनी के मुख्य शासकीय जिला चिकित्सालय में बुधवार को इलाज के दौरान 14 वर्षीय बालिका की मौत के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा खड़ा हो गया। मृतका के परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। घटना की जानकारी मिलते ही विश्व हिन्दू परिषद एवं बजरंग दल के पदाधिकारी भी अस्पताल पहुंचे और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
मृतका की पहचान स्नेहा शुक्ला 14 वर्ष, पिता आदित्य कुमार शुक्ला, निवासी जागृति कॉलोनी, के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार स्नेहा को सुबह पेट दर्द की शिकायत हुई थी। वह सामान्य स्थिति में स्वयं चलकर और दोपहिया वाहन से जिला अस्पताल पहुंची थी। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान ट्रेनी नर्स द्वारा गलत इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कारण बच्ची की मौत हुई।
घटना के बाद अस्पताल पहुंचे विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने चिकित्सकों से घटना की जानकारी मांगी तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। संगठन के पदाधिकारियों का आरोप है कि एक डॉक्टर ने संगठन के प्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार भी किया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। अस्पताल परिसर में नारेबाजी, सिविल सर्जन को हटाने की मांग
घटना के विरोध में परिजनों और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा के खिलाफ कार्रवाई तथा उन्हें पद से हटाने की मांग की। उनका कहना था कि जिला अस्पताल में पहले भी इलाज में लापरवाही के कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली थाना प्रभारी राखी पाण्डेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं और परिजनों एवं प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। बाद में डीएसपी रत्नेश मिश्रा भी अस्पताल पहुंचे और परिजनों से चर्चा की। प्रशासन द्वारा जांच का आश्वासन दिए जाने के बाद स्थिति सामान्य हुई। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार करते हुए शव अपने साथ ले जाने की इच्छा जताई।
विश्व हिन्दू परिषद एवं बजरंग दल के प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम प्रभात चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी चिकित्साकर्मियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई तथा जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली की व्यापक जांच की मांग की।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जिला अस्पताल में पूर्व में भी कई बार इलाज में लापरवाही के आरोप सामने आते रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पाया।
इस घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
क्या उपचार के दौरान सभी आवश्यक चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया यदि ट्रेनी स्टाफ उपचार प्रक्रिया में शामिल था तो क्या वरिष्ठ चिकित्सक की निगरानी मौजूद थी,मरीज की स्थिति बिगड़ने पर आपातकालीन चिकित्सा कितनी तेजी से उपलब्ध कराई गई,आखिर ऐसी घटनाओं के बाद जवाबदेही किसकी तय होगी इन सभी सवालों का उत्तर अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों को मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी समाज की सबसे संवेदनशील व्यवस्था होती हैं। सरकारी अस्पताल उन लोगों की अंतिम उम्मीद होते हैं जो आर्थिक रूप से निजी अस्पतालों में उपचार कराने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए प्रत्येक मरीज को समय पर, सुरक्षित और मानक चिकित्सा उपलब्ध कराना अस्पताल प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। कटनी जिला अस्पताल को लेकर समय-समय पर व्यवस्थाओं और उपचार संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि इस मामले में भी जांच के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही सिद्ध होती है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है। वहीं यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो जांच के निष्कर्ष भी पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि आमजन का विश्वास स्वास्थ्य व्यवस्था पर बना रहे। हर मौत केवल एक आंकड़ा नहीं होती, बल्कि किसी परिवार की पूरी दुनिया उजड़ जाती है। इसलिए इस प्रकरण की निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी जांच ही न्याय की पहली शर्त है।