कल जो कहा आज वो किया: सीएम डॉ. मोहन यादव अचानक पहुंचे गेहूं उपार्जन केंद्र, किसानों से किया संवाद खरगोन जिले के कतरगांव में बनाए गए उपार्जन केंद्र पहुंचे प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिया उपार्जन की व्यवस्थाओं का जायजा,केंद्र से संबंधित लोगों को दिए जरूरी दिशा-निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आकस्मिक रूप से खरगोन जिले के कतरगांव में बनाये गए उपार्जन केंद्र के निरीक्षण लिए पहुँचे

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कल जो कहा आज वो किया: सीएम डॉ. मोहन यादव अचानक पहुंचे गेहूं उपार्जन केंद्र, किसानों से किया संवाद
खरगोन जिले के कतरगांव में बनाए गए उपार्जन केंद्र पहुंचे प्रदेश के मुखिया
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिया उपार्जन की व्यवस्थाओं का जायजा,केंद्र से संबंधित लोगों को दिए जरूरी दिशा-निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आकस्मिक रूप से खरगोन जिले के कतरगांव में बनाये गए उपार्जन केंद्र के निरीक्षण लिए पहुँचे
भोपाल।। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खरगोन जिले में मंडलेश्वर तहसील के कतरगांव स्थित उपार्जन केंद्र का औचक रूप से निरीक्षण पर पहुँचे। इस दौरान उन्होंने उपार्जन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया साथ ही आवश्यक दिशा निर्देश संबंधितों को दिए। गौरतलब है कि डॉ यादव ने उ महेश्वर में रात्रि विश्राम किया था।
किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कल यानी 29 अप्रैल को जो कहा था, वैसा ही 30 अप्रैल को किया। उन्होंने कहा था कि वे किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक दौरा कर सकते हैं। और, हुआ भी यही। वे आज सुबह अचानक खरगोन जिले के कतरगांव में बनाए गए उपार्जन केंद्र के निरीक्षण लिए पहुंचे। इस दौरान उन्होंने उपार्जन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने यहां किसानों से चर्चा की और उनके साथ चाय भी पी। इसके अलावा उन्होंने केंद्र से संबंधित लोगों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महेश्वर में 29 अप्रैल को रात्रि विश्राम किया था।
बता दें, मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के लिए उपार्जन केंद्रों पर छाया, बैठक और कई अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की है। अब किसान जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय कर सकते हैं। इतना ही नहीं, किसानों को गेहूं की तौल के लिए इंतजार नहीं करना पड़े इसके लिए उपार्जन केन्द्रों में तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है। सरकार जिलों में और भी तौल कांटे बढ़ा रही है। सरकार ने चमक विहीन गेहूं की सीमा भी 50 प्रतिशत कर दी है। सूकड़े दाने की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक की गई है। क्षतिग्रत दानों की सीमा बढ़ाकर 6 प्रतिशत तक की गई है। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन ,गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अब तक इतने लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी
गौरतलब है कि अभी तक प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए 9.83 लाख किसानों द्वारा 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। प्रदेश में अभी तक 5 लाख 8 हजार 657 किसानों से 22 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है।

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