सीमा पर सियासी संग्राम: रेत कार्रवाई बनी मौत का कारण? ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
शहडोल।मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित बरना नदी मंगलवार को उस समय रणभूमि में बदल गई, जब अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ की जा रही कार्रवाई ने एक 25 वर्षीय युवक की जान ले ली। घटना के बाद इलाके में ऐसा उबाल आया कि आक्रोशित ग्रामीणों ने मध्यप्रदेश पुलिस की टीम को मौके से खदेड़ दिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिसकर्मी अपना वाहन तक छोड़कर भागने को मजबूर हो गए।मिली जानकारी के अनुसार, दरसिला चौकी पुलिस (मध्यप्रदेश) अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई करने बरना नदी पहुंची थी। आरोप है कि छत्तीसगढ़ सीमा में खड़े एक रेत से भरे ट्रैक्टर को जबरन मध्यप्रदेश की सीमा में ले जाने की कोशिश की गई। इसी दौरान ट्रैक्टर चालक 25 वर्षीय सोनू चक्रवाक ने इसका विरोध किया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विवाद बढ़ने पर पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर युवक के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की।
हंगामे और भगदड़ के बीच ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया। ट्रैक्टर के नीचे दबने से सोनू की मौके पर ही मौत हो गई। जैसे ही यह खबर गांव में पहुंची, ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर जुट गए। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों ने पुलिस टीम की घेराबंदी कर दी और उन्हें वहां से हटने पर मजबूर कर दिया। कुछ पुलिसकर्मी जान बचाने के लिए अपना वाहन छोड़कर भागते नजर आए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के केल्हारी थाना प्रभारी मनीष धुर्वे मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद ग्राम रक्षा समिति के सदस्य मधुर जैसवाल को पकड़ लिया और बाद में पुलिस के हवाले किया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस मधुर जैसवाल को मौके पर छोड़कर भाग आई थी, जिससे उसकी जान को खतरा हो सकता था।
यह पूरा घटनाक्रम दो राज्यों की सीमा पर हुआ, जहां नदी का एक हिस्सा मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में आता है और दूसरा हिस्सा छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले में। घटना के बाद शहडोल के जैतपुर क्षेत्र में भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। सोनू चक्रवाक के परिजन और ग्रामीण निष्पक्ष जांच तथा दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, मध्यप्रदेश पुलिस की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या कार्रवाई के नाम पर सीमा का उल्लंघन किया गया? क्या युवक के साथ बल प्रयोग हुआ? और अगर मारपीट नहीं हुई तो ट्रैक्टर अनियंत्रित कैसे हुआ? इन तमाम सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
फिलहाल बरना नदी का शांत किनारा राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का केंद्र बन गया है। एक तरफ अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई की जरूरत है, तो दूसरी ओर एक युवक की मौत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते संयम बरता जाता, तो एक परिवार का चिराग यूं नहीं बुझता।
सीमा पर हुई इस घटना ने दो राज्यों की पुलिस के समन्वय और कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर जांच पर टिकी है क्या सोनू को न्याय मिलेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?