उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के लिए भूमि चयन में गड़बड़ी का आरोप, 30 मार्च से चक्का जाम और अनिश्चितकालीन बंद की चेतावनी
मोहम्मद शाकिब खान मुख्य संवाददाता गौरेला
मरवाही (जीपीएम): मरवाही में प्रस्तावित उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के लिए भूमि चयन को लेकर विवाद गहरा गया है।
क्षेत्रवासियों, नगर पंचायत और व्यापार संघ ने प्रशासन पर कूटरचना, भेदभावपूर्ण नीति और अदूरदर्शिता का आरोप लगाते हुए कलेक्टर (जीपीएम) को ज्ञापन सौंपा है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर उचित भूमि का चयन नहीं किया गया, तो 30 मार्च 2026 से मरवाही में चक्का जाम किया जाएगा और सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेंगे।
ज्ञापन में लगाए गए मुख्य आरोप:
नियमों की अनदेखी और कूटरचना: भूमि आवंटन की उद्घोषणा का प्रकाशन नियमतः दो बहुप्रसारित दैनिक समाचार पत्रों में होना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि तहसीलदार द्वारा बदरौड़ी एवं देवगवां की भूमि की उद्घोषणा सिर्फ ‘नवभारत’ अखबार में कराई गई, जो पिछले 10 महीनों से मरवाही क्षेत्र में आ ही नहीं रहा है।
प्रशासन की भेदभावपूर्ण नीति: राजस्व विभाग ने मरवाही नगर पंचायत और उससे लगे ग्रामों में सर्वसुविधायुक्त भूमि को यह कहकर खारिज कर दिया कि वह ‘पहाड़ चट्टान’ और ‘जंगल मद’ की भूमि है। जबकि पूर्व में ग्राम कुम्हारी में इसी तरह की भूमि (खसरा नं. 1818) न्यायालय के आवासीय भवन और पॉलिटेक्निक कॉलेज के लिए आवंटित की जा चुकी है। वहीं, अब देवगवां में जिस भूमि (खसरा नं. 290/1 व 324/1) को चिह्नित किया गया है, वह भी जंगल मद की ही है।
अदूरदर्शिता और सुविधाओं का अभाव: जिस नई जगह का चिन्हांकन किया गया है, वह मरवाही मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। वहां स्वास्थ्य, शिक्षा और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। जबकि कॉलेज में प्रदेश भर से छात्र और कर्मचारी आएंगे, जिनके लिए ये सुविधाएं अनिवार्य हैं।
सर्वदलीय और जनसमर्थन से हो रहा विरोध:
इस मामले में पूर्व में भी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों— जिनमें भाजपा और कांग्रेस के ब्लॉक व जिला अध्यक्ष, सरपंच संघ, नगर पंचायत अध्यक्ष और व्यापार संघ शामिल हैं— ने प्रशासन से उचित भूमि चयन का निवेदन किया था। लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने पर अब 27 मार्च 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मरवाही के माध्यम से कलेक्टर को यह कड़ा अल्टीमेटम भेजा गया है।
ज्ञापन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक (जीपीएम), तहसीलदार और थाना प्रभारी मरवाही को भी सूचनार्थ भेज दी गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन 30 मार्च के उग्र आंदोलन को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।