प्रतिबंधित वन्य-जीवों की खरीद-फरोख्त पर सख्ती, उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
प्रतिबंधित वन्य-जीवों की खरीद-फरोख्त पर सख्ती, उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
कटनी।। वन्य-जीवों के संरक्षण को लेकर वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रतिबंधित प्रजातियों की अवैध बिक्री, खरीद-फरोख्त और पालन पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत अनुसूचीबद्ध वन्य-जीवों का शिकार, व्यापार, परिवहन, कब्जा या पालन पूरी तरह दंडनीय अपराध है।
वन विभाग को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ पेट शॉप और एक्वेरियम दुकानों में प्रतिबंधित कछुओं, पक्षियों व अन्य जीवित प्रजातियों की अवैध बिक्री की जा रही है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि वन्य-जीवों की प्राकृतिक स्वतंत्रता के भी खिलाफ है।
विभाग ने दुकानदारों और पालतू पशु-पक्षी विक्रेताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति CITES अंतरराष्ट्रीय संकटग्रस्त प्रजाति व्यापार संधि में शामिल प्रजातियों का व्यापार न करें। साथ ही प्रतिष्ठानों में उपलब्ध पशु-पक्षियों से संबंधित सभी वैध दस्तावेज सुरक्षित रखना अनिवार्य बताया गया है।
वन विभाग ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित प्रजातियों की बिक्री एवं प्रचार-प्रसार से दूर रहने की भी चेतावनी दी है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे ऐसे वन्य-जीवों को न खरीदें और न ही घरों में पालें।
यदि कहीं अवैध वन्य-जीव व्यापार की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तत्काल वन विभाग या पुलिस को दें। इसके लिए विभाग ने टोल-फ्री नंबर 0755-2524000 जारी किया है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना शामिल है। विभाग ने नागरिकों से वन्य-जीव संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है, ताकि जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन को सुरक्षित रखा जा