महिला सुरक्षा पर सियासत गरम महिला कांग्रेस का सरकार पर तीखा प्रहार दोषियों को संरक्षण, पीड़िताओं को न्याय से वंचित-पत्रकार वार्ता में गूंजे सवाल
महिला सुरक्षा पर सियासत गरम महिला कांग्रेस का सरकार पर तीखा प्रहार दोषियों को संरक्षण, पीड़िताओं को न्याय से वंचित-पत्रकार वार्ता में गूंजे सवाल
कटनी।। देश और प्रदेश में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार के मुद्दे को लेकर महिला कांग्रेस ने सत्तापक्ष के खिलाफ जोरदार हमला बोला। जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में महिला कांग्रेस अध्यक्ष रजनी वर्मा ने आरोप लगाया कि महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रही है।
महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर विपक्ष ने एक बार फिर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। कटनी में आयोजित इस पत्रकार वार्ता ने न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महिला सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को तेज कर दिया है।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए महिला कांग्रेस अध्यक्ष रजनी वर्मा ने कहा कि देश में बलात्कार और महिला उत्पीड़न के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश मामलों में आरोपी सत्तापक्ष से जुड़े होते हैं, जिससे निष्पक्ष कार्रवाई प्रभावित होती है। उन्होंने उत्तरप्रदेश के चर्चित कुलदीप सेंगर मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि किस तरह राजनीतिक संरक्षण के चलते पीड़िताओं को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
महिला कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि महिलाओं के शोषण के आरोपों में घिरे नेताओं के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए। रजनी वर्मा ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर गंभीर आरोप होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना बेहद चिंताजनक है और इससे महिलाओं का न्याय व्यवस्था से भरोसा कमजोर हो रहा है।
पत्रकार वार्ता में यह भी स्पष्ट किया गया कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। महिला कांग्रेस ने कहा कि वह महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी और सरकार को जवाबदेह बनाने का काम करती रहेगी।
इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष अमित शुक्ला, महिला ग्रामीण अध्यक्ष माधुरी जैन, सुमन रजक, आदिता वर्मा, मंजू निषाद, शोभा मंगलानी, लता खरे सहित बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध केवल एक राज्य या क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि यह पूरे देश के सामने खड़ी एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से परे, यह आवश्यक है कि सभी दल मिलकर एक सशक्त और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करें, जहां पीड़िताओं को त्वरित न्याय मिल सके और दोषियों को बिना किसी भेदभाव के सख्त सजा दी जाए।
कानून का भय और न्याय की निश्चितता ही ऐसे अपराधों पर अंकुश लगा सकती है। साथ ही, समाज में जागरूकता, शिक्षा और संवेदनशीलता को बढ़ावा देना भी उतना ही जरूरी है। यह पत्रकार वार्ता एक बार फिर इस सवाल को केंद्र में ले आई है कि क्या देश में महिलाएं वास्तव में सुरक्षित हैं? और यदि नहीं, तो जवाबदेही किसकी है सरकार की, व्यवस्था की या समाज की?