एक पेड़ मां के नाम का जाप,साहब के बंगले के सामने हरे-पेड़ का काम तमाम!

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शहडोल। एक तरफ देश के मुखिया एक पेड़ मां के नाम लगाने की मार्मिक अपील कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ संभाग के आला अफसरान इस मुहिम को फोटो सेशन और नौटंकी की खाद-पानी देकर अपनी पीठ थपथपाने में मस्त हैं। हद तो तब हो गई जब हरियाली का ढोंग रचने वाले इस तंत्र ने संभागीय मुख्यालय में ही नियम-कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ा दीं। संभागायुक्त के बंगले के ठीक सामने स्थित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  के सरकारी बंगले में लगे वर्षों पुराने, फलदार और हरे-भरे जामुन के पेड़ की बेरहमी से बलि चढ़ा दी गई। ताज्जुब की बात यह है कि वर्तमान में  बरसात का दौर चल रहा है।
क्लोज्ड पीरियड में कुल्हाड़ी चलाने की जुर्रत
नियमों की बात करें तो मध्य प्रदेश संरक्षित वन नियम, 2015 के नियम-6 के तहत प्रतिवर्ष 1 जुलाई से 15 अक्टूबर तक की अवधि को क्लोज्ड पीरियड  घोषित किया गया है। इस मानसून अवधि में पेड़ों को किसी भी सूरत में काटने या गिराने पर पूरी तरह प्रतिबंध होता है, क्योंकि यह समय पौधों के पनपने और प्रकृति के पुनर्जीवन का होता है। इसके अलावा हाल ही में मध्य प्रदेश शासन द्वारा नगरीय क्षेत्रों में पेड़ काटने की अनुमति के अधिकार नगर निगम व प्रशासन से छीनकर पूरी तरह वन विभाग को सौंपे गए हैं, ताकि अंधाधुंध कटाई रोकी जा सके, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो कानून की पोथी पर कुल्हाड़ी चलने में देर नहीं लगती। आम जनता अगर अपने घर के सामने सूखी टहनी भी काट दे, तो पटवारी से लेकर वन विभाग के सिपाही तक डंडा लेकर वसूली करने पहुंच जाते हैं। मगर जब साहब के सरकारी आवास  में एक जीवित, फलदार पेड़ का मर्डर कर दिया गया, तो समूचा प्रशासनिक अमला आंखों पर पट्टी बांधकर मौन व्रत पर बैठ गया है।
साहब! जामुन का फल खटक रहा था या उसकी छांव?
चर्चा है कि क्या साहब को जामुन के फल खटक रहे थे या उसकी ठंडी छांव से अफसरों की वातानुकूलितजिंदगी में खलल पड़ रहा था? संभागायुक्त रोज सुबह अपने बंगले से निकलती होंगी, तो उन्हें यह कटता हुआ पेड़ क्यों नहीं दिखा, क्या सरकार की वृक्षारोपण योजनाएं सिर्फ आम जनता को नसीहत देने और अखबारों में रंगीन तस्वीरें छपवाने के लिए हैं? शहडोल की जागरूक जनता अब इस हरे कत्लेआम पर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांग रही है। देखना यह है कि पर्यावरण प्रेम का ढोल पीटने वाला प्रशासन अपने ही घर में हुए इस अपराध पर क्या कार्रवाई करता है या फिर इस मामले को भी सरकारी फाइलों के मलबे में दबा दिया जाएगा।

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