दूरदृष्टि के सभी हुए कायल : महाभारत के संजय की याद ताजा कर दी
शहडोल। महाभारत काल और महाभारत सीरियल की जानकारी देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लोगों को है। महाभारत के दौरान संजय को मिली दिव्य दृष्टि के जरिए धृतराष्ट्र महल में बैठे-बैठे ही कुरुक्षेत्र के युद्ध का पूरा हाल जान लेते थे। कुछ ऐसा ही मामला इन दिनों जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। भले ही इनका तबादला पुराने विभाग से नारी शक्ति की सेवा वाले विभाग में कर दिया गया हो, लेकिन इनकी दूरदृष्टि के आज भी कई लोग कायल बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि जिनकी पदस्थापना संबंधित थाने में है, उनसे ज्यादा भरोसा साहब इनकी दूरदृष्टि पर करते नजर आ रहे हैं।
अपनी इसी दूरदृष्टि और वफादारी निभाने के अंदाज में इन्होंने पुराने थाने की वफादारी भी दिखाई। बच्चों को स्कूल तक ले जाने वाले वाहनों के मासिक शुल्क को साहब का हवाला देते हुए दोगुना करने की बात कही जाने लगी। अब लोगों का कहना था कि दूरदृष्टि से देखा तो जा सकता है, लेकिन यह कैसे बताया जा सकता है कि मासिक शुल्क 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये करना है? लिहाजा, कहीं किसी से आमने-सामने बात हुई तो कहीं फोन पर यह संदेश पहुंचाया गया।
इसी दौरान कुछ लोगों ने नई तकनीक का सहारा लिया और नारी शक्ति वाले विभाग में पदस्थ इस वर्दीधारी की जुबानी कथित तौर पर रिकॉर्डिंग भी कर ली। जब यह रिकॉर्डिंग लोगों के पास पहुंची तो चर्चा शुरू हो गई कि अब बात यहीं नहीं रुकेगी, चाहे बड़े साहब तक ही क्यों न जाना पड़े।
इधर, पुराने थाने से जुड़े लोगों तक भी संदेश पहुंचा कि कोई भी 500 रुपये से सीधे 1000 रुपये मासिक शुल्क करने को तैयार नहीं है। इसके बाद कार्रवाई का दौर शुरू हुआ। ताबड़तोड़ कार्रवाई की खबरें सोशल मीडिया पर भी नजर आईं और प्रेस नोट के माध्यम से भी सामने आने लगीं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वाकई बड़े साहब 500 रुपये का शुल्क बढ़ाकर 1000 रुपये करने के पक्ष में थे? या फिर बड़े साहब का हवाला देकर, विभाग से तबादला होने के बाद भी अपनी कथित दूरदृष्टि को दृष्टि में तब्दील कर चुके इस वर्दी-धारी के खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई होगी? फिलहाल, पूरे मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोगों की नजर अब बड़े साहब की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।