जल सत्याग्रह की राह पकडने को मजबूर हो सकते है ग्रामीण
Ajay Namdev-7610528622
जिला पंचायत सदस्य ने कलेक्टर को सौपा पत्र

अनूपपुर। जिले की ग्राम पंचायत बरगवां में ओपीएम प्रबंधन द्वारा सोन नदी में बनाया गया पक्का बांध अब आस-पास के ग्रामीणों के लिए मुसीबत से कम नही, बांध का पानी लगभग 12 किलोमीटर तक फैला हुआ है। लेकिन न तो प्रबंधन और न ही प्रशासन यह स्पष्ट कर पा रहा है कि उसे कितने किलोमीटर तक पानी के ठहराव की अनुमति प्रदान की गई है। ग्रामीणों की समस्या को लेकर एक बार फिर मंगलवार जनसुनवाई में क्षेत्र की जिला पंचायत सदस्या श्रीमती स्नेहलता फुक्कू सोनी के द्वारा अपने हस्ताक्षरित पत्र से समस्या का समाधान करने की मांग की गई, उन्होने स्पष्ट उल्लेख किया है कि 27 नवंबर तक प्रबंधन व प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की समस्या का निदान नही किया गया तो वह ग्रामीणों के साथ जल सत्याग्रह करने के लिए बाध्य होगे।
क्या आ रही समस्या
सोन नदी में ओपीएम प्रबंधन के द्वारा पक्का बंाध का निर्माण कराये जाने से जो महत्वपूर्ण समस्या दिखाई पड रही है, उसमें क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन ग्रामवासियों का आवागमन अवरूद्व हुआ है, उन्हे आवागमन जारी रखने के लिए अपनी प्रतिदिन की आय से 40-50 रूपए किराये के रूप में भुगतान करना पड रहा है। 200 रूपए कमाने वाले व्यक्ति का यदि 50 रूपए किराये में जायेगा तो स्वभाविक है वह इस मामले पर अपने जनप्रतिनिधि को घेरेगा और वही जिला पंचायत की सदस्या के साथ हो रहा है।
खतरे में है छात्रों की जिंदगी
जिस तरह से नाव का सफर प्रतिदिन छात्र-छात्राएं करते है और पानी का भराव जितनी मात्रा में वर्तमान समय है उससे निश्चित ही दुर्घटना का डर बना रहता है। सुबह-शाम विभिन्न ग्रामों से पढने के लिए आन वाले छात्र-छात्राओं को नाव में सवार हो सफर करना पडता है, जो उनकी जिंदगी से खिलवाड से कम नही है। अगर यही हालात रहे तो एक दिन ग्रामीण अपने बच्चो को पढने ही नही जाने देंगे, क्योकि दुर्घटना की संभावना और नाव का किराया दोनो का सामना प्रतिदिन करना पडता है।
जल संसाधन नही दे रहा जवाब
पूरे मामले में जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पहले तो यह नही बता पा रहे कि सोन नदी में पक्का बांध निर्माण किये जाने की अनुमति ओपीएम प्रबंधन को किन शर्तो पर दी गई है, दूसरा लगातार समस्याएं सामने आने के बाद भी अधिकारी प्रबंधन के विरूद्व किसी प्रकार कार्यवाही का कोई कदम नही उठा रहे है, तीसरा जलभराव की दूरी कितनी तय की गई है यह भी स्पष्ट नही किया जा रहा है। कुल मिलाकर कहा जाये तो कमीशन का सारा खेल चल रहा है वहीं ओपीएम जल प्रबंधन द्वारा करोडो का जल कर बकाया है जो शासन के कोश में जमा होना चाहिए, लेकिन लापरवाह अधिकारियों की वजह से शासन के राजस्व की भी क्षति हो रही है।