BIG BREAKING:बैगा बाहुल्य गांव ठाड़पथरा में मनरेगा के कार्यों में भारी भ्रष्टाचार: ठाड़पथरा में घटिया सामग्री से हो रहा चेक डैम का निर्माण

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बेस की खुदाई मात्र 1 फीट, नाले के पत्थरों और काली रेत का हो रहा धड़ल्ले से उपयोग

 

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही:

जिले के विकासखंड गौरेला के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत ठाड़पथरा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत चल रहे चेक डैम निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और लापरवाही का मामला सामने आया है।

 

निर्माण कार्य में गुणवत्ता को पूरी तरह से ताक पर रखकर घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे शासन की लाखों रुपये की योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है। साथ ही राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहलाए जाने वाले विशेष संरक्षित जाति बैगा जनजाति के लाभ के लिए बनी योजना को ध्वस्त किया जा रहा है।

 

निर्माण कार्य में उजागर हुईं प्रमुख अनियमितताएं:

मानकों की खुली अनदेखी (बेस की खुदाई): किसी भी चेक डैम की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है। तकनीकी मानकों के अनुसार चेक डैम के बेस की खुदाई लगभग 1.40 मीटर फुट में 4.7 इंच होना अनिवार्य है, लेकिन मौके पर यह खुदाई महज 1 फीट के आसपास ही की गई है।

 

नाले के बोल्डर पत्थर से हो रहा बेस निर्माण: बाहर से गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित सामग्री मंगाने के बजाय, निर्माण स्थल के उसी नाले से बड़े-बड़े बोल्डर (पत्थर) बिनकर चेक डैम का बेस डाला जा रहा है।

 

घटिया काली रेत का उपयोग: कांक्रीट मिक्सिंग के लिए भी अत्यंत निम्न स्तर की काली रेत का उपयोग किया जा रहा है, जो इस पूरे स्ट्रक्चर की मजबूती को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। रेत मिट्टी मिक्स भुरभुरी है जबकि कांक्रीट मिक्सिंग में दानेदार, मिट्टी रहित साफ रेत का उपयोग किया जाना है।

 

पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे सवाल

सबसे अधिक हैरानी की बात यह है कि निर्माण कार्य में यह लीपापोती पंचायत के जिम्मेदारों की नाक के नीचे हो रही है।

 

जानकारी के अनुसार, रोजगार सहायक, सरपंच और उप-सरपंच की मौजूदगी में इस गुणवत्ताविहीन कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। मौके पर खड़े होकर ऐसे घटिया निर्माण को शह देना इनकी कार्यप्रणाली और संभावित मिलीभगत पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।

 

अगर शुरुआत में बेस का निर्माण ही इस स्तर का है, तो यह स्पष्ट है कि पूरा चेक डैम इसी भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा किया जाएगा और पहली तेज बारिश में ही इसके बह जाने की आशंका है।

 

उच्च स्तरीय जांच की दरकार:

इस पूरे मामले में अब जिला प्रशासन और जनपद पंचायत के उच्च अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेने की आवश्यकता है। मौके पर तकनीकी अधिकारियों की टीम भेजकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और बेस की खुदाई का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए, ताकि शासन के पैसों का दुरुपयोग रुक सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।

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