मानवता हुई शर्मसार….जिंदगी से जंग और व्यवस्था का जख्म,घायल तड़पता रहा, पत्नी से एम्बुलेंस धुलवाई गई,जिला अस्पताल की संवेदनहीनता उजागर फिर सवालों में
मानवता हुई शर्मसार….जिंदगी से जंग और व्यवस्था का जख्म,घायल तड़पता रहा, पत्नी से एम्बुलेंस धुलवाई गई,जिला अस्पताल की संवेदनहीनता उजागर फिर सवालों में
कटनी का शासकीय जिला अस्पताल एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि इंसानियत को झकझोर देने वाली संवेदनहीनता है। एक ओर सड़क हादसे में घायल युवक जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा था, वहीं दूसरी ओर उसकी पत्नी से एम्बुलेंस साफ करवाए जाने का आरोप सामने आया है। वायरल वीडियो ने इस पूरी व्यवस्था की परतें खोल दी हैं।
कटनी।। शासकीय जिला अस्पताल एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की उस हद का है जहाँ एक घायल मरीज की पीड़ा के बीच उसकी पत्नी से एम्बुलेंस साफ करवाए जाने का आरोप सामने आया है। वायरल वीडियो ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, जिससे अस्पताल प्रशासन और जिम्मेदार व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल राहुल बर्मन (32), निवासी करेला, बरही को 108 एम्बुलेंस वाहन क्रमांक CG 04 NV 6385 के माध्यम से जिला अस्पताल लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद जब उसकी हालत नाजुक बनी रही, तो चिकित्सकों ने उसे जबलपुर रेफर कर दिया। लेकिन इसी बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। वायरल वीडियो के आधार पर आरोप लगाया जा रहा है कि अस्पताल परिसर में मौजूद 108 एम्बुलेंस के MT मोहित नामक कर्मचारी ने मरीज की पत्नी शालू बर्मन से एम्बुलेंस पर पानी डालकर उसकी सफाई करवाई। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि महिला स्वयं यह कह रही है कि वह उक्त व्यक्ति के कहने पर एम्बुलेंस धो रही है, जबकि उसका पति गंभीर अवस्था में उपचार की प्रतीक्षा कर रहा था।
यह घटना सिर्फ एक कर्मचारी की गलती नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की विफलता को उजागर करती है, जहाँ संवेदनशीलता की जगह औपचारिकता और जिम्मेदारी की जगह दबाव ने ले ली है। जिस एम्बुलेंस सेवा को “जीवन रक्षक” कहा जाता है, वही सेवा आज पीड़ित परिवार के लिए अपमान का कारण बन गई।,कल्पना कीजिए उस महिला की मनःस्थिति, जिसका पति जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा हो, और उसी समय उसे एम्बुलेंस धोने के लिए कहा जाए। यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि गरीब और असहाय वर्ग की उस बेबसी का प्रतीक है, जो व्यवस्था के सामने सिर झुकाने को मजबूर है।
यह घटना न केवल अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आपातकालीन सेवाओं में संवेदनशीलता किस हद तक कमजोर हो चुकी है। जिस एम्बुलेंस सेवा को जरूरतमंदों के लिए राहत और सहारा माना जाता है, वही सेवा अब सवालों के घेरे में आ गई है।
एक ओर पति जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था, वहीं दूसरी ओर उसकी पत्नी से ऐसी स्थिति में श्रम करवाना न केवल अमानवीय है, बल्कि यह व्यवस्था की संवेदनहीनता का भी जीवंत उदाहरण है। यह घटना समाज के उस दर्दनाक सच को उजागर करती है जहाँ गरीब और असहाय व्यक्ति व्यवस्था के आगे मजबूर नजर आता है।
जिला अस्पताल पहले भी अपनी व्यवस्थाओं को लेकर विवादों में रहा है, लेकिन इस तरह की घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। क्या आपातकालीन सेवाओं में लगे कर्मचारियों को संवेदनशीलता का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता क्या ऐसी घटनाओं की जवाबदेही तय होगी। इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करता है। क्या दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा फिलहाल, यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि व्यवस्था को आईना दिखाने वाली एक कड़वी सच्चाई बनकर सामने आई है। जिला अस्पताल पहले भी अपनी लचर व्यवस्थाओं और लापरवाही को लेकर सुर्खियों में रहा है। लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि सुधार के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। जमीनी हकीकत अब भी उतनी ही कड़वी है।
(( www.halehulchal.in इस वायरल वीडियो के सत्यता कि किसी तरह से कोई पुष्टि नही करता है ))