बालिकाओं के भविष्य से खिलवाड़? गुणवत्ता पर उठे सवाल, डेढ़ माह बाद भी 45 छात्राओं को नहीं मिली सरस्वती साइकिल
खोंगसरा ब्लॉक कोटा- (बिलासपुर)।
*छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी सरस्वती साइकिल योजना* का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली छात्राओं को विद्यालय आने-जाने की सुविधा उपलब्ध कराना, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना तथा स्कूल छोड़ने की दर को कम करना है। लेकिन बिलासपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, खोंगसरा में यह योजना सवालों के घेरे में आ गई है। विद्यालय परिसर में साइकिलें पहुंचने के बावजूद करीब डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी 45 पात्र छात्राओं को साइकिलों का वितरण नहीं किया गया है।
विद्यालय परिसर में दर्जनों नई साइकिलें रखी हुई हैं, लेकिन उनका लाभ अब तक छात्राओं को नहीं मिल सका है। स्थानीय स्तर पर यह जानकारी सामने आई है कि मुख्य अतिथि की अनुपलब्धता के कारण वितरण कार्यक्रम आयोजित नहीं हो पाया। इस कारण प्रतिदिन दूर-दराज के गांवों से आने वाली छात्राओं को योजना का लाभ समय पर नहीं मिल रहा है।
*गुणवत्ता पर उठे सवाल*
विद्यालय में रखी साइकिलों को लेकर स्थानीय लोगों एवं पालकों ने गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहली नजर में कुछ साइकिलों की फिटिंग और निर्माण गुणवत्ता अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिख रही है। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी सक्षम तकनीकी एजेंसी या विभाग द्वारा आधिकारिक जांच नहीं की गई है और न ही गुणवत्ता पर कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने आई है।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यदि शासन छात्राओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर योजना चला रहा है तो उन्हें मजबूत, सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाली साइकिलें मिलनी चाहिए। वितरण से पहले गुणवत्ता की जांच कराना आवश्यक है ताकि भविष्य में छात्राओं की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
*शाला विकास समिति का गठन भी अधूरा*
विद्यालय में शाला विकास समिति (एसडीएमसी) का नया गठन भी अब तक नहीं हो पाया है। समिति का गठन लंबित होने से कई प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इससे विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
*प्रभारी प्राचार्य ने क्या कहा?*
विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य दुजलाल लहरे ने बताया कि शाला विकास समिति के गठन के लिए कई बार बैठक बुलाई गई, लेकिन पर्याप्त संख्या में पालकों की उपस्थिति नहीं होने के कारण समिति का गठन नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया जारी है। वहीं साइकिल वितरण के संबंध में उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्यक्रम आयोजित कर वितरण कराया जाएगा।
*स्थानीय लोगों ने उठाई मांग-*
ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने मांग की है कि छात्राओं के हितों को देखते हुए मुख्य अतिथि की प्रतीक्षा किए बिना साइकिलों का शीघ्र वितरण किया जाए। साथ ही यदि गुणवत्ता को लेकर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं तो स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। यदि जांच में साइकिलें निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती हैं, तो संबंधित कंपनी से उन्हें वापस लेकर उच्च गुणवत्ता की नई साइकिलें उपलब्ध कराई जाएं।
*उठ रहे अहम सवाल*
विद्यालय खुलने के डेढ़ माह बाद भी छात्राओं को साइकिल क्यों नहीं मिली?
क्या सरकारी योजनाओं का लाभ मुख्य अतिथि की उपलब्धता पर निर्भर होना चाहिए?
गुणवत्ता संबंधी शिकायतों की तकनीकी जांच कब होगी?
यदि साइकिलें मानक के अनुरूप नहीं हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
दूर-दराज से आने वाली छात्राओं की परेशानी का जिम्मेदार कौन है?
बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने वाली इस महत्वपूर्ण योजना में देरी और गुणवत्ता संबंधी सवालों ने स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अब अभिभावकों और छात्राओं की नजर जिला शिक्षा विभाग और शासन की कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर कब उन्हें सुरक्षित, गुणवत्तायुक्त साइकिलें मिलेंगी और योजना का वास्तविक लाभ समय पर प्राप्त होगा।