तिरंगे की खबर पर ललित पाठक पेंड्रारोड रेलवे सिग्नल मेंटेनर ने पत्रकार से की कथित अभद्रता, खबर हटाने का दबाव बनाने का आरोप
पेंड्रा रोड। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पेंड्रा रोड स्थित सहायक मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता, S.E.C. रेलवे कार्यालय परिसर में राष्ट्रीय ध्वज की स्थिति को लेकर प्रकाशित खबर के बाद अब पत्रकार से कथित अभद्रता और खबर हटाने के दबाव का मामला सामने आया है।
दरअसल, कार्यालय परिसर में फहराए गए राष्ट्रीय ध्वज के झुके हुए एवं नीचे की ओर लटकते दिखाई देने की तस्वीरें सामने आने के बाद हाल-ए-हलचल ने राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और निर्धारित नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाते हुए खबर प्रकाशित की थी। खबर में यह भी स्पष्ट किया गया था कि केवल तस्वीर के आधार पर जानबूझकर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किए जाने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता तथा वास्तविक स्थिति संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
खबर प्रसारित होने के कुछ ही घंटों बाद संबंधित कार्यालय के एक अधिकारी द्वारा हाल-ए-हलचल के ब्यूरोचीफ मोहम्मद शाकिब खान को गोरखपुर रेलवे फाटक के पास बुलाकर अपना पक्ष रखने का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है। इसी दौरान वहां मौजूद सिग्नल मेंटेनर ललित पाठक द्वारा कथित तौर पर पत्रकार से ऊंची आवाज में बात करते हुए कहा गया कि “मामूली-मामूली बात को ऐसे ही छाप दोगे?”
पत्रकार का आरोप है कि बातचीत के दौरान प्रकाशित खबर को डिलीट करने के लिए दबाव बनाया गया। जब मोहम्मद शाकिब खान ने खबर हटाने से इनकार किया तो कथित तौर पर ललित पाठक ने “देखते हैं इसको” कहते हुए वहां से चले जाने को कहा।
खबर हटाने का दबाव क्यों?
मामले में अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि रेलवे कार्यालय की ओर से राष्ट्रीय ध्वज की स्थिति को लेकर कोई तकनीकी या प्रशासनिक कारण था, तो उसका तथ्यात्मक पक्ष पत्रकार के सामने रखा जा सकता था। लेकिन किसी प्रकाशित खबर को हटाने के लिए कथित दबाव और पत्रकार के साथ ऊंची आवाज में बातचीत किए जाने से स्वतंत्र पत्रकारिता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
हाल-ए-हलचल का स्पष्ट मत है कि किसी भी सरकारी कार्यालय से संबंधित खबर में संबंधित पक्ष का जवाब प्रकाशित करना पत्रकारिता का हिस्सा है। यदि रेलवे प्रशासन के पास ध्वज की स्थिति को लेकर कोई स्पष्टीकरण, तकनीकी कारण अथवा तथ्य उपलब्ध हैं, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
रेलवे प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
मामले में रेलवे के सक्षम अधिकारियों से मांग है कि राष्ट्रीय ध्वज की स्थिति से जुड़े मूल मामले के साथ-साथ पत्रकार से कथित तौर पर किए गए व्यवहार और खबर हटाने के लिए बनाए गए दबाव की भी निष्पक्ष जांच की जाए।
राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा महत्वपूर्ण है, लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण पत्रकारिता की स्वतंत्रता, तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और किसी खबर पर आपत्ति होने की स्थिति में वैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपना पक्ष रखना भी है।