जंगलों पर बोझ बनी लैंटाना अब बनेगी कमाई का जरिया, कटनी वन विभाग ने शुरू किया अनोखा प्रयोग IWST बंगलुरु के सहयोग से लैंटाना से पेलेट्स और जैविक खाद बनाने का डेमो, वन संरक्षण के साथ रोजगार की भी उम्मीद

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जंगलों पर बोझ बनी लैंटाना अब बनेगी कमाई का जरिया, कटनी वन विभाग ने शुरू किया अनोखा प्रयोग
IWST बंगलुरु के सहयोग से लैंटाना से पेलेट्स और जैविक खाद बनाने का डेमो, वन संरक्षण के साथ रोजगार की भी उम्मीद
वर्षों से जंगलों की हरियाली और जैव विविधता के लिए खतरा बनी लैंटाना झाड़ी अब नई पहचान बनाने जा रही है। जिस पौधे को अब तक वन विभाग हटाने पर लाखों रुपये खर्च करता था, उसी को अब संसाधन में बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। कटनी वन विभाग ने भारतीय लकड़ी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IWST), बंगलुरु के सहयोग से लैंटाना के उपयोग पर एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत इससे ईंधन के लिए पेलेट्स और कृषि उपयोग के लिए जैविक खाद तैयार की जाएगी।


कटनी।। अब तक जंगलों और किसानों के लिए बड़ी समस्या मानी जाने वाली लैंटाना झाड़ी आने वाले समय में आय और संसाधन का नया स्रोत बन सकती है। कटनी वन विभाग ने इस विदेशी आक्रामक खरपतवार के उन्मूलन के साथ उसके उपयोग का अभिनव मॉडल तैयार किया है। इस पहल के तहत लैंटाना से वैकल्पिक ईंधन और जैविक खाद तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया गया है।
कटनी वनमंडल में भारतीय लकड़ी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IWST), बंगलुरु के सहयोग से लैंटाना से पेलेट्स तैयार करने और उसके ईंधन के रूप में उपयोग का डेमन्स्ट्रेशन किया गया। वन विभाग का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है तो इससे जंगलों की सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर खुल सकते हैं।
लैंटाना (Lantana camara), जिसे कई क्षेत्रों में रायमुनी या पंचफूली के नाम से भी जाना जाता है, एक विदेशी आक्रामक प्रजाति है जो तेजी से फैलकर घने झुरमुट बना लेती है। इसके कारण स्थानीय वनस्पतियों का विकास रुकता है, जंगलों का प्राकृतिक पुनर्जनन प्रभावित होता है और जैव विविधता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। यह वन्यजीवों के लिए उपलब्ध घास और खाद्य पौधों को भी प्रतिस्थापित कर देती है। वहीं इसके सूखे पौधे जंगलों में आग की घटनाओं को और अधिक गंभीर बना सकते हैं।
कटनी वनमंडल अधिकारी गर्वित गंगवार ने बताया कि लैंटाना वर्षों पहले विदेश से भारत पहुंची और धीरे-धीरे देश के कई वन क्षेत्रों में फैल गई। वर्तमान में मध्य प्रदेश के कई जिलों में यह गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने बताया कि विभाग फिलहाल कट-रूट सिस्टम तकनीक के माध्यम से इसकी जड़ों को जमीन के भीतर से काटकर समाप्त करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया में हर वर्ष बड़ी राशि खर्च होती है।
इसी चुनौती को अवसर में बदलने के उद्देश्य से वन विभाग अब हटाई गई लैंटाना झाड़ियों का उपयोग करेगा। योजना के तहत इसकी लकड़ी से ईंधन तैयार कर जिले की फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों में उपयोग किया जाएगा, जबकि इसकी पत्तियों से जैविक खाद तैयार कर कृषि क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा। वन विभाग का मानना है कि इस पहल से एक साथ कई लक्ष्य पूरे हो सकते हैं। जंगलों को आक्रामक प्रजाति से राहत मिलेगी, वनाग्नि का जोखिम घटेगा, किसानों को जैविक विकल्प मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यदि यह मॉडल सफल साबित होता है तो आने वाले समय में इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।

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